अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क (तस्वीर क्रेडिट@adilsiddique84)

ईरान से बातचीत के संकेतों पर ट्रंप का दावा,इंटरनेट बहाली के लिए एलन मस्क से चर्चा की तैयारी

वाशिंगटन,12 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उग्र विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहे ईरान को लेकर एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि ईरान अमेरिका से बातचीत करना चाहता है और इस दिशा में तैयारी भी की जा रही है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान में इंटरनेट बहाली के मुद्दे पर वह टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क से चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप के इन बयानों ने मध्य पूर्व की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है,क्योंकि यह सब ऐसे समय में सामने आया है,जब ईरान में 2022 के बाद सबसे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों की खबरें आ रही हैं।

रविवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने उनसे संपर्क किया है और बातचीत की इच्छा जताई है। ट्रंप के मुताबिक, “ईरानी लीडर्स ने कल फोन किया था। उनके साथ एक बैठक तय की जा रही है… वे बातचीत करना चाहते हैं।” हालाँकि,उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रस्तावित बैठक से पहले अमेरिका को “एक्शन” लेना पड़ सकता है। ट्रंप के इस बयान को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि वह कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ दबाव की रणनीति भी अपनाना चाहते हैं।

ईरान इस समय गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रहा है। देश में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं,जिनमें हिंसा की घटनाएँ भी सामने आई हैं। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,इन विरोध प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, हालाँकि ईरानी सरकार ने मृतकों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है। ट्रंप ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग जारी रहा तो अमेरिका इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। उनके इस बयान को ईरान पर संभावित अंतर्राष्ट्रीय दबाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को बढ़ती महँगाई और कीमतों में इजाफे के खिलाफ हुई थी। धीरे-धीरे ये प्रदर्शन सरकार और सत्तारूढ़ व्यवस्था के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गए। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उन नेताओं के खिलाफ है जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से सत्ता में हैं। लगातार बढ़ती हिंसा और अस्थिरता ने ईरान की सरकार को कठिन स्थिति में डाल दिया है,वहीं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी हालात पर नजर बनाए हुए है।

ट्रंप ने ईरान में इंटरनेट बंद किए जाने के मुद्दे पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह ईरान में इंटरनेट बहाली को लेकर एलन मस्क से बातचीत करने की योजना बना रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के साथ इस विषय पर चर्चा करेंगे,तो ट्रंप ने कहा, “वह इस तरह के काम में बहुत अच्छे हैं;उनकी कंपनी बहुत अच्छी है।” स्पेसएक्स की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को कई संकटग्रस्त क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँचाने के लिए जाना जाता है। ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान में सूचना के प्रवाह को फिर से शुरू कराने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।

गौरतलब है कि गुरुवार से ईरान में व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट लागू है,जिसके चलते देश से बाहर सूचना का प्रवाह लगभग ठप हो गया है। मानवाधिकार संगठनों और विदेशी मीडिया के लिए ईरान की जमीनी स्थिति की जानकारी हासिल करना बेहद मुश्किल हो गया है। ट्रंप का यह कहना कि वह इंटरनेट बहाली के लिए निजी कंपनियों की मदद लेने पर विचार कर सकते हैं,इस संकट में एक नया आयाम जोड़ता है।

हालाँकि,एलन मस्क और स्पेसएक्स की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। इससे पहले भी मस्क की कंपनियाँ यूक्रेन जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में सैटेलाइट इंटरनेट उपलब्ध करा चुकी हैं,जिससे वहाँ संचार बहाल करने में मदद मिली थी। ऐसे में ईरान के संदर्भ में भी इस तरह की पहल की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है।

ट्रंप के बयान ऐसे समय आए हैं,जब अमेरिका और ईरान के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु समझौते से लेकर प्रतिबंधों तक,दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से मतभेद हैं। अब ट्रंप का यह दावा कि ईरान बातचीत चाहता है,कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ईरान आंतरिक दबाव और अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को देखते हुए बातचीत का रास्ता तलाश रहा हो सकता है,जबकि कुछ इसे ट्रंप की सख्त बयानबाजी का नतीजा मानते हैं।

वहीं,ट्रंप का यह कहना कि बैठक से पहले “एक्शन” लिया जा सकता है,यह भी संकेत देता है कि अमेरिका किसी सैन्य या कड़े कदम के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहा है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन,इंटरनेट ब्लैकआउट और अमेरिका के साथ संभावित बातचीत की खबरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ट्रंप के दावे और बयान आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई बातचीत होती है और अगर होती है तो वह किस रूप में और किन शर्तों पर आगे बढ़ती है।