‘सरके चुनर तेरी सरके’ पर बवाल (तस्वीर क्रेडिट@krishnakamal077)

‘सरके चुनर तेरी सरके’ पर बवाल,महिला आयोग का संज्ञान; संसद से सोशल मीडिया तक छिड़ी बहस

मुंबई,19 मार्च (युआईटीवी)- फिल्मी दुनिया में अक्सर गाने और कंटेंट को लेकर विवाद सामने आते रहते हैं, लेकिन इस बार अपकमिंग फिल्म केडी: द डेविल के आइटम नंबर “सरके चुनर तेरी सरके” ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया है,जो सोशल मीडिया से निकलकर संसद तक पहुँच गया है। इस गाने के हिंदी वर्जन को लेकर अश्लीलता और अभद्रता के आरोप लगे हैं,जिसके बाद इसे सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। हालाँकि,विवाद यहीं नहीं थमा और अब इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।

महिला आयोग ने इस गाने को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है और कहा है कि प्रथम दृष्टया इसके बोल और प्रस्तुति यौन उत्तेजक और आपत्तिजनक प्रतीत होते हैं। आयोग के अनुसार, यह सामग्री भारतीय न्याय संहिता,सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन कर सकती है। आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इस पूरे विवाद में फिल्म और गाने से जुड़े कई बड़े नाम भी घिरते नजर आ रहे हैं। महिला आयोग ने अभिनेत्री नोरा फतेही,अभिनेता संजय दत्त,गीतकार रकीब आलम,फिल्म के निर्माता वेंकट के. नारायण और निर्देशक को समन जारी किया है। सभी को 24 मार्च को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए,तो कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह विवाद केवल कानूनी स्तर तक सीमित नहीं है,बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूँज सुनाई दे रही है। संसद में भी इस मुद्दे को उठाया गया, जहाँ केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट रूप से कहा कि कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अश्लीलता को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि गाने के हिंदी वर्जन को पहले ही बैन कर दिया गया है और सरकार इस तरह की सामग्री को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।

गौरतलब है कि “सरके चुनर तेरी सरके” गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था,लेकिन इसके बोल और प्रस्तुति को लेकर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की,वहीं कुछ लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया। देखते ही देखते यह मुद्दा ट्रेंड करने लगा और विरोध की आवाजें तेज हो गईं।

विवाद बढ़ने के बाद अभिनेत्री नोरा फतेही ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्हें हिंदी वर्जन के बोलों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि गाने की शूटिंग कन्नड़ भाषा में की गई थी और हिंदी वर्जन में क्या बदलाव किए गए,इसकी उन्हें जानकारी नहीं दी गई। नोरा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस गाने का प्रचार नहीं करेंगी और इस पूरे विवाद से खुद को अलग रखना चाहती हैं।

फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं,लेकिन इस बार मामला जिस तेजी से कानूनी और राजनीतिक स्तर तक पहुँचा है,वह इसे और गंभीर बना देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि फिल्मों और गानों में अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा क्या होनी चाहिए और समाज की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए किस तरह का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

वहीं,कुछ लोग इस कार्रवाई को सेंसरशिप के रूप में भी देख रहे हैं और उनका कहना है कि रचनात्मक अभिव्यक्ति पर अत्यधिक नियंत्रण से कला की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। हालाँकि,इसके विपरीत एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है,जो मानता है कि समाज में बढ़ती अश्लीलता और महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक सामग्री पर रोक लगाना बेहद जरूरी है।

फिलहाल,इस पूरे मामले में सभी की नजरें 24 मार्च को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ यह स्पष्ट होगा कि महिला आयोग आगे क्या कदम उठाता है। यह विवाद न केवल एक गाने तक सीमित रह गया है,बल्कि यह फिल्म इंडस्ट्री,कानून और समाज के बीच संतुलन की एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।

“सरके चुनर तेरी सरके” विवाद ने यह साबित कर दिया है कि आज के दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जारी किसी भी सामग्री का प्रभाव कितना व्यापक हो सकता है। ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स और फिल्म निर्माताओं के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपनी रचनात्मकता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी पूरा ध्यान रखें।