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नए साल पर सोने में हल्की बढ़त,चाँदी में बड़ी गिरावट — निवेशकों के रुझान पर फिर बदला बाजार का मिज़ाज

नई दिल्ली,2 जनवरी (युआईटीवी)- नए साल की शुरुआत के साथ ही सर्राफा बाजार में दिलचस्प उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को जहाँ सोने की कीमतों में मामूली तेजी दर्ज की गई,वहीं चाँदी की दरों में हजार रुपए से भी ज्यादा की गिरावट आई। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है,जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिकतर बड़े बाजार नए साल के जश्न के कारण बंद रहे और ट्रेडिंग गतिविधियाँ सीमित रहीं।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार,24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत 266 रुपए बढ़कर 1,33,461 रुपए हो गई,जबकि इससे पहले इसका भाव 1,33,195 रुपए प्रति 10 ग्राम था। सोने की इस हल्की तेजी से यह संकेत मिलता है कि घरेलू बाजार में अभी भी पीली धातु को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

22 कैरेट सोने के दाम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह 1,22,007 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,22,250 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुँच गया। वहीं,18 कैरेट सोना भी 99,896 रुपए से बढ़कर 1,00,096 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया। यानी सोने की अलग-अलग कैटेगरी में खरीदारों को मामूली अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ रही है,मगर इस वृद्धि को विशेषज्ञ स्वाभाविक और सीमित दायरे में मान रहे हैं।

इसके उलट,चाँदी के बाजार में गिरावट का रुख देखने को मिला। चाँदी का भाव 1,170 रुपए घटकर 2,29,250 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गया,जबकि पहले यह 2,30,420 रुपए प्रति किलोग्राम पर था। इस गिरावट ने उन निवेशकों को थोड़ी निराशा जरूर दी है,जिन्होंने पिछली तेज रफ्तार को देखते हुए भारी निवेश किया था।

वायदा कारोबार में भी सोने और चाँदी में हल्का उतार-चढ़ाव दिखाई दिया। सोने के 5 फरवरी 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में 0.08 प्रतिशत की कमी आई और यह 1,35,690 रुपए पर आ गया। वहीं,चाँदी के 5 मार्च 2026 वाले कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 0.03 प्रतिशत घटकर 2,35,800 रुपए दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में निवेशकों के बीच सावधानी का रुख बना हुआ है और बड़े सौदों से परहेज किया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वहाँ अधिकतर इंडेक्स और कमोडिटी एक्सचेंज नए साल की छुट्टियों के कारण बंद रहे। इसीलिए वैश्विक स्तर पर सोना और चाँदी के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोना 4,332 डॉलर प्रति औंस और चाँदी 70.8 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही। माना जा रहा है कि शुक्रवार से जब वैश्विक कारोबार सामान्य होगा,तब इन धातुओं में फिर से नई दिशा देखने को मिल सकती है।

पिछला साल सोने और चाँदी के निवेशकों के लिए बेहद फलदायी साबित हुआ था। आँकड़ों के अनुसार, 2025 में सोने और चाँदी की कीमतों में रिकॉर्ड 65 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। खास बात यह रही कि चाँदी ने इस अवधि में 140 प्रतिशत से भी अधिक रिटर्न दिया,जिसने इसे निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बना दिया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी छलांग वैश्विक अस्थिरता,अमेरिकी टैरिफ नीतियों और विभिन्न देशों के बीच जारी तनावपूर्ण हालात की वजह से संभव हुई,जिसके चलते निवेशकों ने सुरक्षित परिसंपत्तियों का रुख किया।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सोने और चाँदी जैसे कीमती धातु हमेशा अनिश्चित परिस्थितियों में सुरक्षा कवच का काम करते हैं। जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है या भू-राजनीतिक तनाव गहराता है,तो निवेशक पारंपरिक रूप से सोने-चाँदी की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि बीते वर्ष के दौरान कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।

हालाँकि,नए साल के शुरुआती दिनों में जो तस्वीर उभर रही है,वह यह बताती है कि बाजार फिलहाल संतुलन खोजने की कोशिश कर रहा है। सोने की हल्की बढ़त और चाँदी की गिरावट इस बात का संकेत देती है कि निवेशक अब पिछले साल की ऊँचाइयों के बाद सावधानीपूर्वक कदम बढ़ा रहे हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आने वाले दिनों में आर्थिक आँकड़ें,मुद्रा बाजार की चाल और वैश्विक नीतिगत फैसले इन धातुओं की दिशा तय करेंगे। डॉलर इंडेक्स,ब्याज दरें और केंद्रीय बैंकों के संकेत—ये सभी कारक निवेशकों की मानसिकता को प्रभावित करेंगे। यदि भू-राजनीतिक तनाव बरकरार रहता है,तो सोना फिर से मजबूती पकड़ सकता है। वहीं,औद्योगिक माँग से जुड़ी चाँदी का प्रदर्शन कई सेक्टरों के विकास पर निर्भर करेगा।

फिलहाल,घरेलू बाजार में त्योहारों का सीजन भले ही खत्म हो चुका हो,लेकिन शादियों और निवेश के लिए सोने की खरीदारी का सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं,चाँदी के हालिया गिरावट के बाद कुछ निवेशक इसे “डिप पर खरीद” का अवसर भी मान सकते हैं।

संक्षेप में,नए साल के पहले ही दिन सर्राफा बाजार ने दिखा दिया कि 2026 भी निवेश के लिहाज से उतना ही रोमांचक रहने वाला है। हल्की तेजी,अचानक गिरावट और सावधानी भरा ट्रेड—इन सबके बीच निवेशकों की नजर अब आने वाले दिनों के रुझान पर टिकी है,जहाँ हर बदलाव नई संभावनाओं और नए जोखिमों के साथ दस्तक दे सकता है।