एआर रहमान

बॉलीवुड में भेदभाव के बयान पर उठा विवाद,एआर रहमान ने वीडियो के जरिए रखी अपनी बात

नई दिल्ली,19 जनवरी (युआईटीवी)- भारतीय संगीत जगत के सबसे प्रतिष्ठित नामों में शुमार एआर रहमान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। अपनी अनोखी धुनों, अंतर्राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विविधता को संगीत के जरिए जोड़ने के लिए पहचाने जाने वाले रहमान हाल ही में उस समय विवादों में घिर गए,जब उन्होंने बॉलीवुड में कथित सांप्रदायिक भेदभाव को लेकर अपनी राय जाहिर की। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं और कई लोगों ने उनकी आलोचना भी की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एआर रहमान ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर अपनी भावनाओं और दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है,जिसमें उन्होंने न सिर्फ अपने इरादों की सफाई दी,बल्कि भारत और भारतीय संस्कृति के प्रति अपने गहरे लगाव को भी सामने रखा।

वीडियो में एआर रहमान ने बेहद शांत और भावुक अंदाज में कहा कि उनके लिए संगीत हमेशा से लोगों और संस्कृतियों को जोड़ने का माध्यम रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ उनका घर नहीं है,बल्कि उनकी प्रेरणा और गुरु भी है। रहमान के अनुसार,उनका उद्देश्य कभी भी किसी समुदाय,संस्कृति या व्यक्ति की भावनाओं को आहत करना नहीं रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग उनकी ईमानदारी और सच्चे इरादों को समझेंगे और उनके शब्दों को गलत अर्थों में नहीं लेंगे।

अपने वीडियो संदेश में रहमान ने भारतीय होने पर गर्व जताते हुए कहा कि भारत ने उन्हें वह मंच दिया,जहाँ वह पूरी रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ अपने विचारों और संगीत को अभिव्यक्त कर सके। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है और इसी विविधता ने उनके संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई। रहमान के अनुसार,भारत ने उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों की आवाजों को सम्मान देने और संगीत के माध्यम से उन्हें एक-दूसरे से जोड़ने का अवसर दिया है। यही वजह है कि उनका हर काम किसी न किसी रूप में सांस्कृतिक समावेश और सम्मान की भावना को दर्शाता है।

एआर रहमान ने वीडियो में अपने करियर की कई महत्वपूर्ण और यादगार परियोजनाओं का जिक्र करते हुए यह बताने की कोशिश की कि उनका रचनात्मक सफर हमेशा सीमाओं से परे रहा है। उन्होंने ‘जला’ प्रोजेक्ट का उल्लेख किया,जिसमें उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक ध्वनियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। इसके अलावा उन्होंने नागा संगीतकारों के साथ मिलकर स्ट्रिंग ऑर्केस्ट्रा बनाने के अपने अनुभव को साझा किया,जिसे वह अपने करियर के खास पड़ावों में से एक मानते हैं। रहमान ने सनशाइन ऑर्केस्ट्रा को मेंटर करने की बात भी कही,जो वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों को संगीत के जरिए सशक्त बनाने का एक प्रयास रहा है।

उन्होंने भारत के पहले मल्टीकल्चरल वर्चुअल बैंड ‘सीक्रेट माउंटेन’ की स्थापना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे यह परियोजना विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को एक डिजिटल मंच पर लाने की कोशिश थी। इसके साथ ही उन्होंने रामायण के संगीत में विश्व प्रसिद्ध संगीतकार हांस जिमर के साथ किए गए सहयोग का भी उल्लेख किया। रहमान के अनुसार,इन सभी अनुभवों ने उनके संगीत के उद्देश्य को और मजबूत किया और उन्हें यह एहसास दिलाया कि संगीत की भाषा सार्वभौमिक होती है,जो किसी भी भेदभाव से ऊपर होती है।

वीडियो के अंत में एआर रहमान ने भारत के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनका संगीत हमेशा अतीत का सम्मान करेगा,वर्तमान का जश्न मनाएगा और भविष्य को प्रेरित करेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगीत कभी किसी को चोट पहुँचाने का माध्यम नहीं रहा है,बल्कि यह हमेशा लोगों को जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करने का जरिया रहा है। उनका यह संदेश उन आलोचनाओं के जवाब के रूप में देखा जा रहा है,जिनमें उनके बयान को लेकर तरह-तरह की व्याख्याएँ की जा रही थीं।

दरअसल,यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ,जब एआर रहमान ने हाल ही में बीबीसी नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में बॉलीवुड में अपने काम को लेकर खुलकर बात की। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अब उन्हें बॉलीवुड में पहले की तुलना में कम काम मिलने लगा है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि कई बार रचनात्मक फैसले ऐसे लोगों के हाथ में होते हैं,जिनमें असल मायनों में रचनात्मकता की समझ नहीं होती। रहमान ने यह भी कहा कि कभी-कभी इसके पीछे साम्प्रदायिक कारण भी हो सकते हैं,हालाँकि यह सीधे तौर पर सामने नहीं आता।

इंटरव्यू में रहमान ने बताया था कि अक्सर उन्हें यह सुनने को मिलता है कि किसी प्रोजेक्ट के लिए उनका नाम तय हो चुका था,लेकिन बाद में प्रोडक्शन कंपनी ने अपने पाँच अन्य कंपोजर्स को हायर कर लिया। उनके मुताबिक,यह सब बातें ज्यादातर अफवाहों के रूप में ही सामने आती हैं,जिससे सच्चाई का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। हालाँकि,उनके इस बयान को कुछ लोगों ने बॉलीवुड पर गंभीर आरोप के रूप में लिया,जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।

एआर रहमान का इंस्टाग्राम वीडियो इस पूरे विवाद के बीच एक संतुलित और भावनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है। उन्होंने साफ कर दिया कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या समुदाय को बदनाम करना नहीं है,बल्कि अपने अनुभवों को साझा करना है। रहमान का मानना है कि रचनात्मक दुनिया में संवाद और समझ बेहद जरूरी है और गलतफहमियों को बातचीत के जरिए ही दूर किया जा सकता है।

एआर रहमान का यह पूरा प्रकरण एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि कला, रचनात्मकता और व्यक्तिगत अनुभवों को किस तरह देखा और समझा जाना चाहिए। एक ऐसे कलाकार के लिए,जिसने दशकों तक भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है,यह विवाद केवल आलोचना का विषय नहीं,बल्कि आत्ममंथन और संवाद का अवसर भी बन सकता है।