अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव, ट्रंप बोले—जल्द खुलेगा अहम समुद्री मार्ग,ईरान सतर्क

वाशिंगटन,11 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि यह अहम समुद्री मार्ग जल्द ही खुल जाएगा,चाहे ईरान सहयोग करे या नहीं। उनके इस बयान ने पहले से ही संवेदनशील हालात को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि शनिवार को पाकिस्तान में ईरान के साथ बातचीत करेंगे,जिसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि यह समुद्री मार्ग “अपने आप खुल जाएगा” और इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। ट्रंप का यह बयान इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका इस मुद्दे को लेकर बेहद गंभीर है और किसी भी स्थिति में इस मार्ग को चालू कराने की दिशा में काम कर रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है,जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस जलमार्ग के बंद होने से न केवल तेल बाजार प्रभावित होता है,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक असर पड़ता है। ऐसे में इस मार्ग को खोलने को लेकर अमेरिका की सक्रियता स्वाभाविक मानी जा रही है।

खबरों के मुताबिक,अमेरिका,इजरायल और ईरान के बीच एक महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के दौरान ईरान ने इस मार्ग को बंद कर दिया था। यह कदम वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया माना जा रहा है। हालाँकि,अब युद्धविराम जैसी स्थिति के बीच इसे दोबारा खोलने की कवायद तेज हो गई है।

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ किसी भी समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वह परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने कहा कि “परमाणु हथियार नहीं होंगे,यही 99 प्रतिशत मुद्दा है।” यह बयान अमेरिका की प्राथमिकता को दर्शाता है,जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता सबसे ऊपर है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा समय में ईरान के पास सीमित विकल्प हैं और वह होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल केवल अस्थायी दबाव बनाने के लिए कर रहा है। ट्रंप के अनुसार, ईरान अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों का उपयोग कर दुनिया पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रहा है,लेकिन यह रणनीति ज्यादा समय तक कारगर नहीं रहेगी।

दूसरी ओर,ईरान ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। ईरानी अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सेना पूरी तरह सतर्क और तैयार है। उनका आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने अतीत में कई बार अपने वादे तोड़े हैं,इसलिए ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान फिलहाल किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि ईरान के पास अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों के जरिए दुनिया पर दबाव बनाने के अलावा कोई ठोस विकल्प नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति में ईरान केवल इसलिए मौजूद है,ताकि वह बातचीत कर सके। इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को और उजागर करते हैं।

इससे पहले ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरान के साथ बातचीत के नतीजे बहुत जल्द सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता विफल रहती है,तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोतों को इस संभावना को ध्यान में रखते हुए फिर से तैयार किया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि अमेरिका,ईरान और इजरायल तीनों ने इस संघर्ष में अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। हालाँकि,विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हकीकत इससे कहीं अधिक जटिल है। उनके अनुसार,मौजूदा युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और किसी भी समय हालात फिर से बिगड़ सकते हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच पुराने मतभेदों और अविश्वास के कारण स्थायी शांति समझौता करना आसान नहीं होगा। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव,परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद और क्षेत्रीय राजनीति में टकराव इस प्रक्रिया को और कठिन बना देते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रहा यह विवाद केवल एक समुद्री मार्ग का मुद्दा नहीं है,बल्कि इसमें वैश्विक राजनीति,ऊर्जा सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कानून जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में पाकिस्तान में होने वाली वार्ता और अमेरिका की रणनीति इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। फिलहाल,दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग जल्द खुल पाएगा या फिर तनाव और बढ़ेगा।