तेहरान,13 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है, जहाँ ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों को सख्त चेतावनी दी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की “दुश्मनाना हरकत” का अंजाम बेहद खतरनाक और जानलेवा हो सकता है।
आईआरजीसी की नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट जारी करते हुए दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट में होने वाली हर गतिविधि पर ईरानी सशस्त्र बलों की पूरी नजर है और यह इलाका उनके नियंत्रण में है। इस बयान के साथ ईरान ने ड्रोन निगरानी से जुड़े कुछ वीडियो फुटेज भी साझा किए,जिनमें इस जलडमरूमध्य की गतिविधियों पर नजर रखने का दावा किया गया है। ईरान ने कहा कि कोई भी गलत कदम उठाने वाला “दुश्मन” इस क्षेत्र के खतरनाक भंवरों में फँस सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट,जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है,लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय शक्ति संतुलन का केंद्र रहा है। यहाँ से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है,ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल सकता है। यही वजह है कि ईरान की इस चेतावनी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से देखा जा रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है,जब यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड यानी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हाल ही में दावा किया था कि उसके दो युद्धपोत होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरे हैं और खाड़ी क्षेत्र में बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान शुरू किया गया है। अमेरिकी पक्ष के इस बयान के बाद क्षेत्र में हलचल और बढ़ गई थी। हालाँकि,ईरान ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
ईरान के मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय ने अमेरिकी दावों को “भ्रामक और प्रचारात्मक” करार देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना की ओर से इस तरह का कोई सफल अभियान नहीं चलाया गया। ईरानी मीडिया,खासकर सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका को घेरते हुए कहा कि यह एक असफल प्रचार स्टंट था,जिसे तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रही वार्ता से जोड़कर पेश किया गया।
प्रेस टीवी की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अमेरिकी युद्धपोत,जिनकी पहचान यूएसएस माइकल मर्फी और यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन के रूप में की गई,को ईरानी नौसेना की सख्त प्रतिक्रिया के बाद पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। हालाँकि,इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है,लेकिन इस बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आईआरजीसी ने एक और कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि कोई भी सैन्य जहाज,चाहे वह किसी भी नाम या बहाने से होर्मुज स्ट्रेट के पास आने की कोशिश करे,उसे संघर्ष विराम का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे किसी भी प्रयास के खिलाफ ईरान “सख्त और निर्णायक कार्रवाई” करेगा। इस बयान ने यह संकेत दिया है कि ईरान इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाहरी सैन्य गतिविधि को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
गौरतलब है कि यह तनाव उस समय बढ़ा है,जब संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सकी है। लगभग एक महीने तक चले भीषण संघर्ष के बाद दोनों देशों ने दो हफ्तों के लिए संघर्ष विराम का ऐलान जरूर किया था,लेकिन इस समझौते की शर्तों पर सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में यह युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और किसी भी समय हालात फिर से बिगड़ सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में इजरायल का भी अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया जा रहा है,क्योंकि क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक सहयोग लंबे समय से रहा है। ईरान लगातार इन दोनों देशों पर क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दी गई चेतावनी को एक व्यापक रणनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है,तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस संवेदनशील क्षेत्र पर टिकी हुई हैं,जहाँ हर गतिविधि भविष्य के बड़े घटनाक्रम का संकेत दे सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की यह चेतावनी केवल एक बयान नहीं,बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत है कि वह अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या फिर यह स्थिति किसी बड़े टकराव का रूप ले लेती है।
