ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन(तस्वीर क्रेडिट@SouleFacts)

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा कड़ी,श्रीनगर में मोबाइल-इंटरनेट सेवाएँ बंद

श्रीनगर,2 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन सख्त कदम उठाए हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। श्रीनगर सहित घाटी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है,जबकि मोबाइल और इंटरनेट सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार,यह कदम किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि घाटी के कई इलाकों से विरोध प्रदर्शनों की खबरें मिलीं,जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपायों को सख्त कर दिया। पुलिस का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

श्रीनगर शहर के सैदा कदल,लाल चौक और कुछ अन्य इलाकों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। कई स्थानों पर लोगों ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारे लगाए तथा अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त किया। लाल चौक पर बड़ी संख्या में लोग काले झंडे लेकर एकत्र हुए और शांतिपूर्ण मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने एहतियातन घेरा बनाकर स्थिति को नियंत्रित रखा। फिलहाल किसी बड़े हिंसक टकराव की सूचना नहीं है,लेकिन प्रशासन सतर्क है।

पुलिस ने घोषणा की है कि प्रदेश में आयोजित की जाने वाली सभी परीक्षाएँ स्थगित कर दी गई हैं। इसके साथ ही सभी स्कूल,कॉलेज और विश्वविद्यालय अगले दो दिनों तक बंद रहेंगे। प्रशासन ने 2 और 3 मार्च को सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने सभी समुदायों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उपराज्यपाल ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है।

वहीं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ईरान में घटित घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह ईरान में हो रही घटनाओं,विशेष रूप से सर्वोच्च नेता की हत्या की खबर से बेहद चिंतित हैं। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की। राजनीतिक नेतृत्व की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि किसी भी अंतर्राष्ट्रीय घटना के कारण प्रदेश में शांति भंग नहीं होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर के शिया समुदाय का ईरान के साथ गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। घाटी के कई शीर्ष शिया धार्मिक नेताओं और विद्वानों ने ईरान में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की है। ऐसे में अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबर का भावनात्मक असर स्थानीय स्तर पर देखा जा रहा है। हालाँकि,अधिकांश धार्मिक संगठनों ने भी लोगों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भावनाएं व्यक्त करने की अपील की है।

प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में धारा 144 जैसे प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करने पर भी विचार किया है,ताकि बड़ी भीड़ के जमावड़े को रोका जा सके। सुरक्षा एजेंसियाँ सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर रखे हुए हैं,ताकि भड़काऊ सामग्री या अफवाहों के प्रसार को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट सेवाएँ स्थिति सामान्य होने के बाद बहाल की जाएँगी।

घाटी में पहले भी अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं के प्रभाव देखने को मिले हैं,लेकिन प्रशासन का कहना है कि इस बार एहतियाती कदम समय रहते उठा लिए गए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है,लेकिन किसी भी तरह की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। बाजारों में आंशिक बंद का असर देखा गया है,जबकि कई इलाकों में सन्नाटा पसरा हुआ है। सुरक्षा बल लगातार फ्लैग मार्च कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन लोगों से संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं,यह काफी हद तक जनता की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक सतर्कता पर निर्भर करेगा। प्रशासन की प्राथमिकता स्पष्ट है—कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की हिंसा को रोकना।