सिडनी,16 फरवरी (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया में 14 दिसंबर को सिडनी के बोंडी बीच पर यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किए गए भीषण हमले के मुख्य आरोपी नवीद अकरम को सोमवार को अदालत में पेश किया गया। लगभग तीन दशकों में देश में हुई सबसे बड़ी मास शूटिंग के बाद यह उसकी पहली सार्वजनिक सुनवाई थी। अकरम ने जेल से वीडियो लिंक के जरिए ऑस्ट्रेलिया की सुपरमैक्स कोर्ट में पेशी दी। सुनवाई के दौरान वह करीब पांच मिनट तक अदालत के समक्ष रहा।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार,24 वर्षीय नवीद अकरम पर कुल 59 आरोप लगाए गए हैं। इनमें 15 लोगों की हत्या,40 लोगों को घायल करने के इरादे से हमला और एक आतंकी कृत्य को अंजाम देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि हमला पूरी तरह से योजनाबद्ध था और इसका उद्देश्य अधिकतम नुकसान पहुँचाना था।
जाँच एजेंसियों के मुताबिक,नवीद अकरम और उसके पिता साजिद पर आरोप है कि दोनों ने दिसंबर में यहूदी त्योहार हनुक्का के दौरान हमला किया। हनुक्का समारोह के मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित थे,जब अचानक गोलियाँ चलने लगीं और अफरातफरी मच गई। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। हमले के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में नवीद के पिता साजिद की गोली लगने से मौत हो गई थी।
अदालत में पेशी के दौरान अकरम ज्यादातर समय शांत रहा। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,उसने केवल तब बात की जब पीठासीन न्यायाधीश ने उससे सीधे प्रश्न किया। उसके वकील बेन आर्चबोल्ड ने सुनवाई के बाद कहा कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उनका मुवक्किल दोषी या निर्दोष की क्या दलील देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बचाव पक्ष सबूतों की बारीकी से जाँच कर रहा है।
अदालत ने मामले में साक्ष्यों की टाइमलाइन पर भी चर्चा की। जाँच एजेंसियों ने डिजिटल रिकॉर्ड,सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एकत्र किए हैं। माना जा रहा है कि आरोपियों ने हमले की योजना काफी पहले से बनाई थी और इसे अंजाम देने के लिए कई स्तरों पर तैयारी की गई थी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में निर्धारित की है।
इस बीच, इस महीने की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा खुफिया संगठन के सुरक्षा महानिदेशक माइक बर्गेस ने सीनेट में बयान दिया कि हमलावरों ने पूरी वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया और उसे छिपाने के लिए अत्यधिक सावधानी बरती। उन्होंने कहा कि कथित आतंकवादियों ने रडार से बचने के लिए अपने डिजिटल और भौतिक निशान मिटाने की कोशिश की। बर्गेस के अनुसार,हमलावरों ने संचार के ऐसे तरीकों का इस्तेमाल किया जिससे उनकी गतिविधियाँ लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की नजर से दूर रहीं।
यह हमला ऑस्ट्रेलिया में 1996 के बाद का सबसे घातक आतंकी हमला माना जा रहा है। हनुक्का जैसे धार्मिक उत्सव को निशाना बनाए जाने से देश में गहरा आक्रोश और चिंता फैल गई है। यह घटना न केवल यहूदी समुदाय के लिए बल्कि पूरे ऑस्ट्रेलियाई समाज के लिए एक झकझोर देने वाला क्षण रही। प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे नफरत और कट्टरता से प्रेरित कृत्य बताया था।
घटना के बाद देशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। धार्मिक स्थलों,सामुदायिक केंद्रों और सार्वजनिक आयोजनों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यहूदी समुदाय के नेताओं ने सरकार से स्थायी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की माँग की है,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
बोंडी बीच,जो आमतौर पर पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए जाना जाता है,उस दिन खौफ और अफरातफरी का गवाह बना। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गोलियों की आवाज सुनते ही लोग इधर-उधर भागने लगे और कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। इस हमले ने ऑस्ट्रेलिया में आतंकवाद और साम्प्रदायिक नफरत से जुड़े खतरे पर फिर से बहस छेड़ दी है।
अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं,जहाँ अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच कानूनी लड़ाई तेज होने की संभावना है। अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य और गवाहों के बयान इस मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल,नवीद अकरम न्यायिक हिरासत में है और उस पर लगे गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है।
