चेन्नई,18 मार्च (युआईटीवी)- दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों को स्वतंत्र,निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इसी दिशा में राज्य सरकार ने चुनावी प्रक्रिया के लिए 800 करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटित किया है। यह राशि चुनाव प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं—जैसे कर्मचारियों की तैनाती, बुनियादी ढाँचे की व्यवस्था और मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है।
चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के लिए मजबूत वित्तीय और तकनीकी आधार बेहद जरूरी है। यही कारण है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा मतदान कर्मचारियों के पारिश्रमिक पर खर्च किया जाएगा। खास तौर पर बूथ स्तर के अधिकारी,जिन्हें चुनावी व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है,उनके लिए लगभग 100 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। ये अधिकारी मतदाता सूची के अद्यतन से लेकर मतदान के दिन तक जमीनी स्तर पर पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तकनीकी दृष्टि से भी इस बार चुनाव प्रक्रिया को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। राज्यभर में लगभग एक लाख आईपी-आधारित सीसीटीवी कैमरे किराए पर लगाने की योजना बनाई गई है। ये कैमरे 75,032 मतदान केंद्रों पर स्थापित किए जाएँगे,जिससे हर गतिविधि पर वास्तविक समय में नजर रखी जा सकेगी। इस पहल का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकना है।
राजधानी चेन्नई में सबसे अधिक 4,079 मतदान केंद्र स्थापित किए जाएँगे,जो राज्य के किसी भी जिले में सबसे ज्यादा हैं। इससे साफ है कि शहरी क्षेत्रों में भी चुनावी तैयारियों को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि हर मतदाता को बिना किसी बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिले।
मतों की गिनती के लिए भी विस्तृत तैयारियाँ की जा रही हैं। राज्य के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने के लिए लगभग 45 से 46 मतगणना केंद्र स्थापित किए जाएँगे। इन केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा,जिसमें सुरक्षित स्ट्रांग रूम भी शामिल होंगे। मतदान समाप्त होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें और कंट्रोल यूनिट इन्हीं स्ट्रांग रूम में कड़ी सुरक्षा के बीच रखी जाएँगी।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों के अनुसार,स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों पर बहु-स्तरीय सुरक्षा तंत्र लागू किया जाएगा,ताकि किसी भी तरह की अनधिकृत पहुँच को रोका जा सके। इसके अलावा,केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों की तैनाती भी की जाएगी,जिससे चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे।
चुनाव विभाग केवल तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों तक ही सीमित नहीं है,बल्कि मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास कर रहा है। ‘व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और चुनावी भागीदारी’ यानी एसवीईईपी कार्यक्रम के तहत जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इस पहल के माध्यम से लोगों को मतदान के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने एक अनोखी पहल भी शुरू की है। मतदाता जागरूकता से संबंधित कंटेंट तैयार करने वाले व्यक्तियों और मीडिया संगठनों को 50,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसका उद्देश्य रचनात्मक और प्रभावशाली माध्यमों से अधिक से अधिक लोगों तक संदेश पहुँचाना है,ताकि मतदान प्रतिशत में वृद्धि हो सके।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। दिव्यांग मतदाताओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी,जिससे वे भी आसानी से मतदान कर सकें। इसके अलावा,मतदान केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं जैसे पेयजल,शौचालय और बैठने की व्यवस्था को भी सुनिश्चित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यापक और सुविचारित तैयारियाँ चुनाव प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाएँगी। तकनीकी नवाचार,मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और मतदाता जागरूकता पर विशेष ध्यान देकर तमिलनाडु एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जिसे अन्य राज्य भी अपना सकते हैं।
कुल मिलाकर, 800 करोड़ रुपये के इस बड़े बजट,उन्नत निगरानी प्रणाली और व्यापक जागरूकता अभियानों के साथ तमिलनाडु आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर मतदाता को सुरक्षित,पारदर्शी और निष्पक्ष माहौल में अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिले,जिससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत हो सकें।
