तमिलनाडु के राज्यपाल के खिलाफ मुद्दा उठाएगी डीएमके

चेन्नई, 10 जनवरी (युआईटीवी/आईएएनएस)- सत्तारूढ़ द्रमुक तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा राज्य सरकार के कामकाज में दखल देने का मुद्दस राजनीतिक रूप से उठाने के लिए तैयार है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को यह बात कही। सोमवार को राज्य विधानसभा में अपना भाषण पढ़ते हुए राज्यपाल द्वारा एक पैराग्राफ को छोड़ना, डीएमके के लिए राज्य भर में इस मुद्दे को उठाने का कारण बन गया है। पार्टी नेता ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, राज्यपाल केंद्र के इशारों पर नाच रहे हैं और डीएमके चुप नहीं बैठ सकती है, जब तमिल गौरव का अपमान एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है, जिसे हमारी विरासत और हमारी द्रविड़ विचारधारा के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

राज्यपाल आर.एन. रवि ने सोमवार को राज्य विधानसभा के पहले सत्र को संबोधित करते हुए द्रविड़ विचारकों ई.वी. रामासामी पेरियार, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज, सी.एन. अन्नादुराई और कलैगनार करुणानिधि का नाम पढ़े बिना दूसरी पंक्ति में बढ़ गए।

राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इसका कड़ा विरोध किया और राज्यपाल को सौंपे लिखित भाषण के पूरे पाठ को पढ़ने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पारित किया गया और विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने इसे पढ़ा।

राजनीतिक दलों द्वारा 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अभियान शुरू करने और राज्य की सभी 39 सीटों के लिए डीएमके के लक्ष्य के साथ पार्टी राज्यपाल के खिलाफ अभियान चलाने व भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाना बनाने की योजना बना रही है।

सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष अप्पावु ने मीडियाकर्मियों से कहा कि भाजपा शासित राज्यों के राज्यपाल अपने राज्यों के मंत्रिमंडल का पालन कर रहे हैं, जबकि गैर-भाजपा शासित राज्यों के राज्यपाल शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाए हैं।

राज्यपाल के अभिभाषण के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने के बाद जब मुख्यमंत्री बोल रहे थे, तब राज्यपाल के सदन से बाहर चले जाने का मुद्दा भी पार्टी उठा रही है। अध्यक्ष ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि राज्यपाल ने राष्ट्रगान का अपमान किया है, क्योंकि वह राष्ट्रगान बजने से पहले विधानसभा से बाहर चले गए।

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