चेन्नई,30 मार्च (युआईटीवी)- तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं,राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुँचती जा रही है। इसी कड़ी में राज्य की सत्ताधारी डीएमके और प्रमुख विपक्षी दल एआईएडीएमके ने अपने-अपने चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिए हैं। दोनों ही दलों ने इस बार मतदाताओं को लुभाने के लिए बड़े पैमाने पर कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता के वादों की झड़ी लगा दी है,जिनमें महिलाओं,किसानों, छात्रों और गरीब परिवारों को खास तौर पर केंद्र में रखा गया है।
सत्ताधारी डीएमके ने अपने पिछले चुनावी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए इस बार कुल 525 वादों का ऐलान किया है। 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 505 वादे किए थे,लेकिन इस बार उसने अपनी योजनाओं का दायरा और बढ़ा दिया है। वहीं,सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही एआईएडीएमके ने 297 वादों के साथ अपना घोषणा पत्र पेश किया है, जिसमें लक्षित सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं पर जोर दिया गया है।
दोनों ही दलों के घोषणा पत्रों में एक समानता साफ तौर पर दिखाई देती है और वह है महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई योजनाएँ। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने घोषणा की है कि आयकर न देने वाले परिवारों की गृहिणियों को घरेलू उपकरण खरीदने या बदलने के लिए 8,000 रुपये के कूपन दिए जाएँगे। इसके अलावा,डीएमके ने महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का भी वादा किया है,जो सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर किया गया कदम माना जा रहा है।
वहीं,एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने भी महिलाओं और परिवारों को आकर्षित करने के लिए कई अहम घोषणाएँ की हैं। उन्होंने वादा किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो राशन कार्ड धारकों को मुफ्त रेफ्रिजरेटर दिए जाएँगे। इसके अलावा ‘कुला विलाक्कू’ योजना के तहत सभी परिवार कार्ड धारकों को 2,000 रुपये की सब्सिडी देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में भी दोनों पार्टियों ने लगभग समान वादे किए हैं। वृद्धावस्था पेंशन को 1,200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का आश्वासन दोनों दलों ने दिया है। इसी तरह मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान दी जाने वाली राहत सहायता को 8,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये करने का वादा भी किया गया है। दिव्यांगजनों के लिए डीएमके ने भत्ते को बढ़ाकर 2,500 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है,जबकि एआईएडीएमके ने इसे 2,000 रुपये करने की बात कही है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों दलों ने युवाओं को लुभाने के लिए बड़े वादे किए हैं। डीएमके ने अगले पाँच वर्षों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे 35 लाख छात्रों को मुफ्त लैपटॉप देने का संकल्प लिया है। वहीं एआईएडीएमके ने भी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों के छात्रों को लैपटॉप देने का वादा किया है। यह कदम डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्रों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आवास और ग्रामीण विकास के मुद्दे पर भी दोनों दलों ने खास ध्यान दिया है। डीएमके ने पांच साल के भीतर 10 लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा है,जबकि एआईएडीएमके ने अपनी ‘अम्मा इल्लम’ योजना के तहत बेघर परिवारों को मुफ्त आवास देने का वादा किया है। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों ही पार्टियाँ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को अपने पक्ष में करने के लिए ठोस योजनाएँ पेश कर रही हैं।
किसानों को लेकर भी दोनों दलों ने कई महत्वपूर्ण वादे किए हैं। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,500 रुपये प्रति क्विंटल और गन्ने का समर्थन मूल्य 4,500 रुपये प्रति टन करने जैसे प्रस्ताव किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पेश किए गए हैं। यह कदम कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों दलों के बीच प्रतिस्पर्धा साफ नजर आती है। स्टालिन ने स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत आय सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने और बीमा कवरेज को 10 लाख रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। दूसरी ओर,पलानीस्वामी ने हृदय शल्य चिकित्सा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पूर्ण सरकारी वित्तपोषण का वादा किया है,जो आम जनता के लिए राहत भरा कदम हो सकता है।
शिक्षा नीति के मुद्दे पर भी दोनों दलों का रुख काफी हद तक समान है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कुछ प्रावधानों का विरोध करते हुए राज्य के अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया है। साथ ही शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाने के लिए प्रयास करने का वादा भी किया गया है,जो तमिलनाडु की क्षेत्रीय पहचान और स्वायत्तता के मुद्दे से जुड़ा हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव मुख्य रूप से कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता के वादों के इर्द-गिर्द घूमेगा। दोनों दलों ने जिस तरह से अपने घोषणा पत्र तैयार किए हैं,उससे साफ है कि वे हर वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर महिलाओं,किसानों और युवाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाएँ चुनावी नतीजों पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 एक बार फिर से कल्याणकारी राजनीति का बड़ा मंच बनने जा रहा है,जहाँ डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इन वादों को किस तरह से आँकते हैं और किस पार्टी को सत्ता की चाबी सौंपते हैं।
