लेबनान पर इजरायल के हमले तेज (तस्वीर क्रेडिट@ariel_oseran)

मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: लेबनान पर इजरायल के हमले तेज,ईरान-अमेरिका टकराव और गहराया

नई दिल्ली,10 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता नजर आ रहा है। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपने हमले तेज कर दिए हैं,जिनमें कथित तौर पर कुद्स फोर्स की लेबनानी शाखा के कमांडरों को निशाना बनाया गया है। इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार,इजरायली हवाई हमलों में अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है,जिनमें दो सैनिक भी शामिल हैं। वहीं,स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,राजधानी बेरूत में एक होटल पर ड्रोन हमला किया गया,जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और करीब 10 लोग घायल हो गए। इस हमले ने यह साफ कर दिया है कि संघर्ष अब सीमित क्षेत्रों से निकलकर बड़े शहरी इलाकों तक फैलता जा रहा है।

इससे पहले इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान में एक तेल भंडारण सुविधा को निशाना बनाया था। इस हमले को लेकर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया था। अब लेबनान में बढ़ती सैन्य कार्रवाई इस बात का संकेत दे रही है कि दोनों देशों के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है।

इस बीच,खाड़ी क्षेत्र में भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने 16 बैलिस्टिक मिसाइलों और 113 ड्रोन को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि संघर्ष का दायरा अब कई देशों तक फैल चुका है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

इसी क्रम में बहरीन में भी ईरान के ड्रोन हमले से एक महत्वपूर्ण विलवणीकरण संयंत्र को नुकसान पहुँचा है। यह संयंत्र समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने के लिए इस्तेमाल होता है,जिससे वहाँ के नागरिकों की जल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि नागरिक बुनियादी ढाँचे को भी प्रभावित कर रहा है।

हालाँकि,इस बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने पड़ोसी देशों पर हुए हमलों के लिए माफी माँगी है। उनके इस बयान को क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है,लेकिन जमीनी हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। लगातार हो रहे हमले और जवाबी कार्रवाई यह संकेत दे रहे हैं कि फिलहाल संघर्ष थमने वाला नहीं है।

दूसरी ओर,अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए और भी हमले करने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी भी तरह के समझौते की संभावना नहीं है और जरूरत पड़ने पर और भी क्षेत्रों को निशाना बनाया जाएगा। उनके इस बयान ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

इस पूरे संघर्ष में अब तक भारी जनहानि हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार,ईरान में 1,230 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है,जबकि लेबनान में यह आँकड़ा 290 के पार पहुँच गया है। इजरायल में भी 11 लोगों की जान गई है। इसके अलावा छह अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबर भी सामने आई है। ये आँकड़ें इस बात का प्रमाण हैं कि यह संघर्ष अब बड़े पैमाने पर मानवीय संकट का रूप ले चुका है।

इसी बीच,बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर के हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड पर एक मिसाइल गिरने की खबर आई है। हालाँकि,इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है,लेकिन यह घटना बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। खास बात यह है कि ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से बगदाद के अत्यधिक सुरक्षित ग्रीन ज़ोन में यह पहला हमला है।

ईरान और उसके सहयोगी माने जाने वाले इराकी मिलिशिया समूहों ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य संस्थानों पर कई हमले किए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इराक के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले को आतंकवादी कृत्य बताया और इसकी कड़ी निंदा की है।

मध्य पूर्व की स्थिति बेहद गंभीर और विस्फोटक बनी हुई है। लगातार हो रहे हमले,जवाबी कार्रवाई और कड़े बयान इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष जल्द थमता नजर नहीं आ रहा। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संकट को कम कर पाएँगे या फिर यह टकराव और बड़े युद्ध का रूप ले लेगा।