नई दिल्ली,16 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला के लिए भारतीय बाजार अब तक उम्मीदों के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। इंडस्ट्री से जुड़े ताजा आँकड़ों के अनुसार,पिछले साल टेस्ला भारत में केवल 225 यूनिट्स ही बेच पाई। यह आँकड़ा ऐसे समय में सामने आया है,जब देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और ईवी सेक्टर को भविष्य की मोबिलिटी के रूप में देखा जा रहा है। इसके बावजूद टेस्ला की सीमित बिक्री ने कंपनी की भारत रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन यानी फाडा के डेटा के मुताबिक,टेस्ला ने सितंबर में 64 यूनिट्स,अक्टूबर में 40 यूनिट्स,नवंबर में 48 यूनिट्स और दिसंबर में 73 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की। पूरे साल को मिलाकर यह आंकड़ा 225 यूनिट्स पर ही सिमट गया। यह संख्या भारतीय पैसेंजर कार बाजार के लिहाज से बेहद छोटी मानी जा रही है,खासकर तब जब टाटा मोटर्स,महिंद्रा और एमजी जैसी कंपनियाँ इलेक्ट्रिक सेगमेंट में हजारों यूनिट्स बेच रही हैं।
टेस्ला ने भारत में अपने सफर की शुरुआत मुंबई में शोरूम खोलकर की थी। कंपनी ने इसे एक बड़े कदम के तौर पर पेश किया था और माना जा रहा था कि भारत जैसे विशाल और तेजी से बदलते ऑटोमोबाइल बाजार में टेस्ला को अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा। हालाँकि,फिलहाल कंपनी भारत में सिर्फ एक ही मॉडल,मॉडल वाई,की बिक्री कर रही है,जो रियर-व्हील-ड्राइव यानी आरडब्ल्यूडी वेरिएंट में उपलब्ध है।
कीमत की बात करें तो यही सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है,जिसने भारतीय ग्राहकों को टेस्ला से दूरी बनाए रखने पर मजबूर किया है। मॉडल वाई के स्टैंडर्ड आरडब्ल्यूडी वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 59.89 लाख रुपये है,जबकि लॉन्ग रेंज आरडब्ल्यूडी वेरिएंट की कीमत 67.89 लाख रुपये तक जाती है। विदेशों में टेस्ला की यही कारें कहीं कम कीमत पर उपलब्ध हैं,लेकिन भारत में पूरी तरह से निर्मित वाहनों के आयात पर लगने वाले भारी शुल्क की वजह से इनकी कीमतें काफी बढ़ जाती हैं। नतीजतन,टेस्ला की कारें यहां प्रीमियम से भी ऊपर के सेगमेंट में पहुँच जाती हैं,जहाँ खरीदारों की संख्या सीमित होती है।
टेस्ला फिलहाल गुरुग्राम,मुंबई और दिल्ली में अपने एक्सपीरियंस सेंटर संचालित कर रही है। कंपनी का दावा है कि इन शहरों में उसने करीब 12 सुपरचार्जर और 10 डेस्टिनेशन चार्जर स्थापित किए हैं,ताकि ग्राहकों को चार्जिंग को लेकर ज्यादा परेशानी न हो। इसके बावजूद,भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमित पहुँच और लंबी दूरी की यात्रा को लेकर ग्राहकों की चिंता भी बिक्री को प्रभावित करने वाला एक कारण मानी जा रही है।
तकनीकी खूबियों की बात करें तो टेस्ला मॉडल वाई किसी भी तरह से कमजोर नहीं है। कंपनी का दावा है कि स्टैंडर्ड मॉडल की रेंज 500 किलोमीटर तक है,जबकि लॉन्ग रेंज वेरिएंट एक बार चार्ज करने पर 622 किलोमीटर तक चल सकता है। स्टैंडर्ड वेरिएंट 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार महज 5.9 सेकंड में पकड़ लेता है,जबकि लॉन्ग रेंज वेरिएंट 5.6 सेकंड में यह रफ्तार हासिल कर लेता है। दोनों वेरिएंट की अधिकतम गति 201 किलोमीटर प्रति घंटे बताई जाती है। फास्ट चार्जिंग के जरिए सिर्फ 15 मिनट में स्टैंडर्ड मॉडल में करीब 238 किलोमीटर और लॉन्ग रेंज में लगभग 267 किलोमीटर तक की रेंज हासिल की जा सकती है। इन आँकड़ों के बावजूद,कीमत और उपलब्धता जैसे कारक ग्राहकों के फैसले पर भारी पड़ते दिख रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जिस समय टेस्ला की बिक्री सीमित रही,उसी दौरान भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ा है। वाहन पोर्टल के आँकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत के कुल वाहन पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 8 प्रतिशत तक पहुँच गई है। कुल इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री 23 लाख यूनिट्स तक पहुँच चुकी है,जो इस बात का संकेत है कि भारतीय उपभोक्ता अब ईवी को तेजी से अपना रहे हैं।
इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस यानी आईईएसए की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों की बिक्री करीब 1,75,000 यूनिट रही। खास तौर पर छोटे और हल्के वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों की बिक्री में मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। इसका मतलब यह है कि जहाँ मास मार्केट और कम कीमत वाले ईवी सेगमेंट में माँग बढ़ रही है,वहीं अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट में टेस्ला जैसी कंपनियों को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टेस्ला भारत में स्थानीय विनिर्माण या असेंबली की दिशा में कदम उठाती है,तो कीमतों में कमी आ सकती है और बिक्री को गति मिल सकती है। फिलहाल,ऊँची कीमतें, सीमित मॉडल लाइन-अप और आयात शुल्क टेस्ला के लिए बड़ी बाधा बने हुए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में टेस्ला भारतीय बाजार के लिए अपनी रणनीति में कोई बड़ा बदलाव करती है या नहीं।
