तिरुनेलवेली,8 अप्रैल (युआईटीवी)- तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बीच अभिनेता से राजनेता बने विजय का चुनावी अभियान तेजी पकड़ता जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को विजय तिरुनेलवेली में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने जा रहे हैं,जो तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित की जा रही है। यह रैली केटीसी नगर में होगी,जहाँ तिरुनेलवेली और तेनकासी जिलों से चुनाव लड़ रहे पार्टी प्रत्याशियों के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी।
इस जनसभा को लेकर प्रशासन ने अनुमति तो दे दी है,लेकिन इसके साथ कई कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं। पुलिस द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों में मुख्य रूप से भीड़ नियंत्रण,सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है। आयोजकों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। टीवीके के समन्वयक सेंगोटियन ने कहा कि पार्टी सभी नियमों का पूरी तरह पालन करेगी और प्रशासन के साथ सहयोग करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाएगी।
हालाँकि,सेंगोटियन ने यह सवाल भी उठाया कि इतनी सख्त शर्तें केवल टीवीके के कार्यक्रमों पर ही क्यों लागू की जा रही हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है,क्योंकि विपक्षी दलों पर इस तरह की पाबंदियों के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चुनावी बहस का हिस्सा बन सकता है और इससे सहानुभूति हासिल करने की कोशिश भी की जा सकती है।
रैली के बाद विजय का एक रोड शो भी प्रस्तावित है,जो थालयुथु,थाचनल्लूर, वॉशरमैनपेट, समधानापुरम और कोर्ट कॉम्प्लेक्स जैसे इलाकों से होकर गुजरेगा। इसके बाद वे दोबारा केटीसी नगर लौटेंगे। इस रोड शो के जरिए पार्टी आम जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने और सीधे संवाद स्थापित करने की रणनीति अपना रही है।
टीवीके ने केवल तिरुनेलवेली तक ही अपने अभियान को सीमित नहीं रखा है,बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी प्रचार के लिए अनुमति माँगी है। पुदुकोट्टई,तेनकासी,मायलादुथुरै और रानीपेट जैसे क्षेत्रों में रैलियों और जनसभाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन पहले ही जमा किए जा चुके हैं। इससे साफ है कि पार्टी राज्यभर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है।
इस चुनावी अभियान के बीच विजय और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर भी कई घटनाक्रम सामने आए हैं,जिन्होंने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। विजय खुद चेन्नई के पेरम्बूर और तिरुचि ईस्ट सीटों से चुनाव मैदान में हैं। तिरुचि ईस्ट में उनका नामांकन बिना किसी विवाद के स्वीकार कर लिया गया,लेकिन पेरम्बूर में स्थिति थोड़ी जटिल रही।
पेरम्बूर सीट पर पीएमके उम्मीदवार थैलागबामा ने विजय के खिलाफ आपत्ति जताई,जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके नाम पर संपत्ति कर का भुगतान नहीं किया गया है। इस आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने अस्थायी रूप से उनके नामांकन को रोक दिया,जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। हालाँकि,बाद में टीवीके के प्रतिनिधियों द्वारा आवश्यक स्पष्टीकरण देने के बाद नामांकन को मंजूरी दे दी गई।
इसी तरह,विल्लिवक्कम में पार्टी के पदाधिकारी अधव अर्जुन के नामांकन को भी उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज कंपनियों की अधूरी जानकारी के कारण अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। बाद में अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के बाद उनका नामांकन भी स्वीकार कर लिया गया। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि इस बार चुनावी प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच काफी सख्ती से की जा रही है।
सबसे बड़ा विवाद एडप्पडी में सामने आया,जहाँ एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता के. पलानीस्वामी चुनाव मैदान में हैं। यहाँ टीवीके उम्मीदवार अरुण कुमार का नामांकन खारिज कर दिया गया,जिसके बाद उनके अचानक लापता होने की खबर ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए और विपक्ष ने इसे लेकर प्रशासन पर भी निशाना साधा।
अरुण कुमार की जगह उनकी पत्नी निथ्या को उम्मीदवार बनाया गया,लेकिन उनका नामांकन भी खारिज कर दिया गया। इससे टीवीके को इस सीट पर बड़ा झटका लगा है और पार्टी अब इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठा सकती है।
इसके विपरीत,चिदंबरम में पार्टी के उम्मीदवार परी और उनके विकल्प के रूप में उनके पिता नेदुचेजियना के नामांकन बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिए गए। यह स्थिति अन्य क्षेत्रों में हुई परेशानियों के विपरीत रही,जिससे यह साफ होता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परिस्थितियाँ बन रही हैं।
इन सभी घटनाओं के बीच विजय का तिरुनेलवेली दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी लोकप्रियता और फिल्मी छवि को देखते हुए यह रैली बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित कर सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विजय अपने समर्थकों को प्रभावी ढंग से संगठित करने में सफल रहते हैं,तो यह चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके का अभियान अब तेज रफ्तार पकड़ चुका है। विजय की सक्रियता और लगातार हो रही रैलियाँ इस बात का संकेत हैं कि पार्टी इस चुनाव में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति उन्हें कितना फायदा पहुँचाती है और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है।
