ट्रैन हाईजैक (तस्वीर क्रेडिट@VipulMi21345964)

ट्रेन हाईजैक : पीएम शहबाज शरीफ क्वेटा पहुँचे,सेना के दावे को बीएलए ने किया खारिज

क्वेटा,(पाकिस्तान),14 मार्च (युआईटीवी)- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को बलूचिस्तान प्रांत का दौरा किया, जहाँ हाल ही में अलगाववादी चरमपंथियों ने एक ट्रेन पर हमला कर 400 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया था। प्रधानमंत्री शरीफ का यह दौरा ऐसे समय में हुआ,जब बलूचिस्तान में सुरक्षा की स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी। सरकार ने बताया कि शरीफ क्वेटा के एक दिवसीय दौरे पर हैं, जहाँ उन्हें क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी दी जाएगी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,चरमपंथियों द्वारा बंधक बनाए गए कई लोग अब सुरक्षित रूप से क्वेटा पहुँच चुके हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए बुधवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की,जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसी कायरतापूर्ण हरकतें पाकिस्तान की शांति की प्रतिबद्धता को हिला नहीं पाएँगी।

प्रधानमंत्री का यह दौरा बलूचिस्तान के उस हिस्से में हुआ है, जहाँ हाल ही में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के अलगाववादी समूह ने एक बड़ा हमला किया। बीएलए ने पाकिस्तान सेना के उस दावे को खारिज कर दिया है,जिसमें कहा गया था कि संघर्ष समाप्त हो गया है। बीएलए ने स्पष्ट रूप से कहा कि लड़ाई अभी भी जारी है और उन्होंने अभी भी कई लोगों को बंधक बना रखा है।

पाकिस्तानी सेना ने 300 यात्रियों को सुरक्षित रूप से बचाने का दावा किया है। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि यात्रियों को बचाने के लिए जो अभियान चलाए गए हैं,उस दौरान 33 चरमपंथियों को मार गिराया गया। हालाँकि,सेना के अनुसार,इस संघर्ष में कुल 21 बंधकों और चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। दूसरी ओर,बीएलए ने दावा किया कि उसने 50 बंधकों को मार डाला।

मंगलवार दोपहर को चरमपंथियों ने बलूचिस्तान प्रांत में स्थित क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस पर हमला किया था। इस ट्रेन में कुल 400 यात्री सवार थे। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली और यह धमकी दी कि यदि सरकार ने 48 घंटों के भीतर बलूच राजनीतिक कैदियों को रिहा नहीं किया तो वे सभी बंधकों को मार देंगे।

बीएलए ने यह भी कहा कि पाकिस्तान द्वारा बचाए गए जो लोग बताए जा रहे हैं, वास्तव में उन बंधकों को समूह ने स्वयं छोड़ा था। बलूच लिबरेशन आर्मी का उद्देश्य बलूचिस्तान को पाकिस्तान से स्वतंत्र कराना है। यह संगठन पाकिस्तान सरकार से दशकों से संघर्ष कर रहा है और इसका कहना है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान के समृद्ध गैस और खनिज संसाधनों का अनुचित तरीके से दोहन कर रहा है।

बीएलए को पाकिस्तान,ईरान,चीन,यूनाइटेड किंगडम,संयुक्त राज्य अमेरिका,यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी संगठन के रूप में घोषित किया गया है। यह संगठन बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की माँग करता है और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखे हुए है।

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है,जिसे भू-आर्थिक और भू-रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है, जिसमें गैस,खनिज और अन्य खनिज संपत्तियाँ शामिल हैं। हालाँकि,बलूचिस्तान अपने समृद्ध संसाधनों के बावजूद विकास के मामले में काफी पीछे रह गया है। यहाँ के लोग लंबे समय से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं,लेकिन सरकार ने हमेशा इस समस्या की अनदेखी की है। बलूचिस्तान में अशांति की यह स्थिति कई वर्षों से बनी हुई है और यहाँ के लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बलूचिस्तान दौरा इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा और अशांति के मामले में गंभीर है। हालाँकि, बीएलए और अन्य अलगाववादी समूहों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर विवाद और तनाव बना हुआ है। बलूचिस्तान में आतंकवाद और उग्रवाद की समस्या अब पाकिस्तान के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है और इस मुद्दे का समाधान ढूँढना सरकार के लिए कठिन साबित हो रहा है।

पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान की रणनीतिक और भू-आर्थिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है,लेकिन इसके बावजूद इस क्षेत्र में गरीबी,असुरक्षा और आतंकवाद की समस्या लगातार बनी हुई है। यह समस्याएँ केवल बलूचिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे पाकिस्तान में अशांति और राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन रही हैं।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का यह दौरा महत्वपूर्ण है,क्योंकि इससे यह साबित होता है कि सरकार बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने का इरादा रखती है। हालाँकि,बीएलए और अन्य विद्रोही समूहों से निपटना एक कठिन कार्य है और इसके लिए पाकिस्तान को अपने अंदरूनी मुद्दों और अंतर्राष्ट्रीय दबाव का भी सामना करना पड़ सकता है।