नई दिल्ली,26 नवंबर (युआईटीवी)- रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए त्रिकोणीय टी20 सीरीज 2025 के पाँचवें मुकाबले में श्रीलंका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे को 9 विकेट से करारी शिकस्त दी। यह जीत श्रीलंका के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही,क्योंकि इससे पहले टीम को जिम्बाब्वे और मेजबान पाकिस्तान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इस जीत के साथ ही श्रीलंका ने टूर्नामेंट में अपनी वापसी का मजबूत संकेत दिया,जबकि जिम्बाब्वे के लिए यह हार अगले मुकाबलों को और चुनौतीपूर्ण बना गई।
मुकाबले में जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया,लेकिन उनकी शुरुआत निराशाजनक रही। टीम ने मात्र 17 रन पर दो विकेट गंवा दिए,जिससे श्रीलंकाई गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबदबा साफ नजर आया। ब्रायन बेनेट और अनुभवी बल्लेबाज ब्रेंडन टेलर ने मिलकर टीम की पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 36 रन जोड़े,लेकिन यह साझेदारी टीम को अपेक्षित मजबूती नहीं दे सकी। टेलर 16 गेंदों में 14 रन बनाकर आउट हो गए,जिससे जिम्बाब्वे एक बार फिर दबाव में आ गया।
इसके बाद ब्रायन बेनेट और कप्तान सिकंदर रजा के बीच 29 गेंदों में 36 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई,जिसने टीम को 89 रन तक पहुँचाया। बेनेट ने 26 गेंदों में 34 रन की उपयोगी पारी खेली,जिसमें 4 चौके और एक छक्का शामिल था। वहीं कप्तान रजा ने भी 29 गेंदों में 37 रन जोड़कर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुँचाने की कोशिश की। अंत में रयान बर्ल ने भी उतने ही रन जोड़ते हुए पारी को 146 तक पहुँचाया। जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट खोकर कुल 146 रन बनाए,जो कि उपयुक्त स्कोर था,लेकिन पिच की प्रकृति को देखते हुए यह स्कोर श्रीलंका को रोकने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
श्रीलंका की गेंदबाजी की बात करें,तो वानिंदु हसरंगा और महेश दीक्षाना ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। दोनों ने 2-2 विकेट लेकर जिम्बाब्वे की पारी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके अलावा कप्तान दासुन शनाका ने भी एक विकेट चटकाया। श्रीलंकाई गेंदबाजों का अनुशासित प्रदर्शन ही वह कारण रहा,जिसके चलते जिम्बाब्वे बड़े स्कोर तक नहीं पहुँच सका।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक और संतुलित बल्लेबाजी की। सलामी बल्लेबाज पथुम निसांका और कामिल मिसारा ने बेहतरीन साझेदारी कर टीम को मजबूत नींव प्रदान की। दोनों ने मिलकर मात्र 5.4 ओवरों में 59 रन जोड़ दिए। मिसारा 12 रन बनाकर आउट हो गए,लेकिन निसांका ने अपनी पारी को न केवल संभाला,बल्कि उसे मैच जिताऊ प्रदर्शन में भी बदल दिया। उनकी बल्लेबाजी देखने लायक थी—तकनीक,टाइमिंग और आत्मविश्वास का बेहतरीन मेल उनकी पारी में दिखाई दिया।
कामिल मिसारा के आउट होने के बाद निसांका को कुसल मेंडिस का साथ मिला। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 64 गेंदों में 89 रन जोड़े और टीम को लक्ष्य तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। निसांका ने अपनी नाबाद 98 रनों की पारी में 58 गेंदों का सामना किया और 11 चौकों के अलावा 4 शानदार छक्के भी जड़े। उनका शतक भले ही सिर्फ दो रनों से रह गया,लेकिन उनकी पारी ने श्रीलंका को बड़ी जीत दिलाने में केंद्रीय भूमिका निभाई। कुसल मेंडिस ने भी 25 रन का महत्वपूर्ण योगदान दिया और निसांका को दूसरे छोर से समर्थन देते रहे।
जिम्बाब्वे की गेंदबाजी उस धार के साथ मैदान पर नहीं दिखी,जिसके लिए वे जाने जाते हैं। केवल ब्रैड इवांस ही एकमात्र गेंदबाज रहे,जिन्होंने एक विकेट झटका। बाकी गेंदबाजों ने न तो लाइन-लेंथ में निरंतरता दिखाई और न ही श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश सफल साबित हुई।
अंततः श्रीलंका ने मात्र 16.2 ओवरों में लक्ष्य हासिल कर लिया और मुकाबले को 9 विकेट से अपने नाम किया। यह जीत टीम के मनोबल को बढ़ाने वाली रही और टूर्नामेंट के आगे के मुकाबलों के लिए एक सकारात्मक संकेत भी। पथुम निसांका की शानदार बल्लेबाजी,हसरंगा और दीक्षाना की सटीक गेंदबाजी तथा टीम के समग्र प्रदर्शन ने इस मैच को श्रीलंका के लिए यादगार बना दिया।

