वाशिंगटन,22 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए घोषणा की है कि मार्टिन लूथर किंग जूनियर (एमएलके) की हत्या से संबंधित 2.30 लाख से अधिक पृष्ठों के दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए गए हैं। इन दस्तावेजों का सार्वजनिक होना अमेरिकी इतिहास के एक महत्वपूर्ण रहस्य से पर्दा उठाने जैसा माना जा रहा है। गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इन दस्तावेजों में उन सवालों के जवाब छिपे हैं,जिन्हें लोग पिछले छह दशकों से पूछते आ रहे थे।
तुलसी गबार्ड के अनुसार,जारी किए गए दस्तावेजों में एफबीआई की जाँच रिपोर्ट, मामले में जुटाए गए संभावित सुरागों पर चर्चाएँ,आंतरिक एफबीआई मेमो और जाँच की प्रगति से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल है। इनमें जेम्स अर्ल रे के पूर्व सेल मेट के बयान भी शामिल हैं,जिसने दावा किया था कि उसने रे के साथ हत्या की साजिश पर चर्चा की थी। जेम्स अर्ल रे को एमएलके की हत्या का दोषी ठहराया गया था, लेकिन वर्षों से यह मामला साजिश और षड्यंत्र की आशंकाओं से घिरा रहा।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक,ट्रंप प्रशासन ने सत्ता में आने के तुरंत बाद ही इस दिशा में कदम उठाया। पदभार ग्रहण करने के केवल तीन दिन बाद, 23 जनवरी को,ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए,जिसके तहत पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ.कैनेडी,उनके भाई रॉबर्ट एफ.कैनेडी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्याओं से संबंधित शेष फाइलों को सार्वजनिक किया जाना था। अमेरिकी प्रशासन ने इसे पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
1977 में एक अदालती आदेश के बाद,एफबीआई द्वारा एकत्रित इन रिकॉर्डों को सार्वजनिक देखने से रोक दिया गया था। इन दस्तावेजों की कुल संख्या 2.40 लाख से अधिक बताई जाती है। इन्हें राष्ट्रीय अभिलेखागार और अभिलेख प्रशासन में सुरक्षित रखा गया था। अदालत के आदेश के बाद से ही इन दस्तावेजों के सार्वजनिक किए जाने की माँग की जा रही थी,ताकि दशकों पुरानी इन हत्याओं के पीछे के रहस्यों को उजागर किया जा सके।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर के परिवार को भी इस फैसले की जानकारी दे दी गई थी। उनके जीवित बच्चों मार्टिन लूथर किंग तृतीय और बर्निस किंग ने इन रिकॉर्डों की समीक्षा करने के लिए अपनी टीमें गठित की हैं। हालाँकि,किंग परिवार के कुछ सदस्यों ने दस्तावेजों के सार्वजनिक किए जाने पर असहमति जताई है। उनका मानना है कि इन दस्तावेजों के सामने आने से परिवार की निजता और उनकी प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर,जिन्हें एमएलके नाम से भी जाना जाता है,अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन के सबसे प्रमुख नेता थे। उन्होंने नस्लीय भेदभाव और असमानता के खिलाफ अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके प्रसिद्ध भाषण “आई हैव अ ड्रीम” ने अमेरिकी समाज में नागरिक अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। 4 अप्रैल 1968 को मेम्फिस,टेनेसी में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी मौत के बाद से ही यह सवाल उठते रहे कि क्या यह हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी।
ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी किए गए दस्तावेज इस दिशा में नए खुलासे कर सकते हैं। इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का मानना है कि इन दस्तावेजों से एफबीआई की भूमिका,जेम्स अर्ल रे की कथित साजिश और सरकार की जाँच में संभावित लापरवाही जैसे मुद्दों पर नई जानकारी सामने आ सकती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इन दस्तावेजों के सामने आने से दशकों से चल रहे संदेहों और षड्यंत्र की थ्योरियों को या तो बल मिलेगा या वे खत्म हो जाएँगी।
इन दस्तावेजों के सार्वजनिक किए जाने से अमेरिकी समाज में एक बार फिर नस्लीय भेदभाव और नागरिक अधिकारों के लिए हुए संघर्ष की यादें ताजा हो गई हैं। मार्टिन लूथर किंग जूनियर का नाम आज भी दुनिया भर में समानता,न्याय और अहिंसा की प्रतीक के रूप में लिया जाता है। ट्रंप प्रशासन के इस कदम को कई लोग ऐतिहासिक पारदर्शिता का उदाहरण मान रहे हैं,जबकि कुछ आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिकी समाज में पुरानी बहसें फिर से जीवित हो जाएँगी।
