ट्रंप की हत्या की साजिश में पाकिस्तानी नागरिक दोषी करार (तस्वीर क्रेडिट@RealBababanaras)

ट्रंप की हत्या की साजिश में पाकिस्तानी नागरिक दोषी करार,अमेरिकी अदालत ने सुनाया फैसला

न्यूयॉर्क,7 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका की एक संघीय अदालत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कथित साजिश से जुड़े मामले में पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को दोषी ठहराया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा,जासूसी गतिविधियों और राजनीतिक साजिशों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की सुनवाई के बाद एक संघीय जूरी ने शुक्रवार को 47 वर्षीय आसिफ मर्चेंट को दोषी पाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार मर्चेंट ने अमेरिका में ट्रंप की हत्या के लिए सुपारी किलर नियुक्त करने की कोशिश की थी। जाँच एजेंसियों का कहना है कि वह इस साजिश को अंजाम देने के लिए काम कर रहा था और उसके पीछे ईरान से जुड़े तत्वों का हाथ था। अभियोजन के अनुसार मर्चेंट कथित तौर पर इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कोर के निर्देश पर काम कर रहा था।

अमेरिकी कानून के अनुसार इस तरह के गंभीर अपराध में दोषी पाए जाने पर उसे आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। अदालत जल्द ही सजा पर अंतिम फैसला सुनाएगी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह साजिश अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा थी और इसे समय रहते विफल करना बेहद जरूरी था।

अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार यह साजिश 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान अंजाम दी जानी थी। हालाँकि,जाँच एजेंसियों की सतर्कता और एक अहम मुखबिर की वजह से इस योजना को समय रहते नाकाम कर दिया गया। जिस व्यक्ति से मर्चेंट ने हत्या के लिए मदद माँगी थी,वह वास्तव में फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन का मुखबिर निकला। इसी कारण पूरी साजिश का खुलासा हो गया और जाँच एजेंसियों को समय रहते कार्रवाई करने का मौका मिल गया।

फैसले के बाद एफबीआई के निदेशक काश पटेल ने कहा कि एजेंसी और उसके साझेदारों ने एक बेहद खतरनाक योजना को विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है,जब ईरान से जुड़े तत्वों ने अमेरिकी धरती पर नागरिकों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की हो। उन्होंने कहा कि ऐसी कई अन्य कोशिशें भी पहले की जा चुकी हैं,लेकिन वे भी सफल नहीं हो पाईं।

जाँच के अनुसार आसिफ मर्चेंट को जुलाई 2024 में उस समय गिरफ्तार किया गया था,जब वह अमेरिका से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की गई और अगले ही महीने उसके खिलाफ औपचारिक आरोप तय कर दिए गए। इसके बाद मामला अदालत में चला और विस्तृत सुनवाई के बाद अब जूरी ने उसे दोषी ठहराया है।

इस मामले को और गंभीर बना देने वाली बात यह है कि अभियोजन के अनुसार साजिश के पीछे एक व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था। अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया कि इस साजिश के पीछे मौजूद ईरानी मास्टरमाइंड को अमेरिकी बलों ने मार गिराया है। हालाँकि,उन्होंने उस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की।

मामले की सुनवाई न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन संघीय न्यायालय में हुई। यह मुकदमा पिछले सप्ताह शुरू हुआ था,हालाँकि,इसकी सुनवाई की तारीखें काफी पहले तय की जा चुकी थीं। दिलचस्प बात यह है कि मुकदमे की सुनवाई ऐसे समय हुई,जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

मुकदमे की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश एरिक कोमिटी ने इस संयोग पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मुकदमा बेहद दिलचस्प समय में चल रहा है। उन्होंने कहा कि अदालत का काम तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देना है,चाहे बाहरी परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

सुनवाई के दौरान आसिफ मर्चेंट ने अदालत में यह स्वीकार किया कि वह साजिश में शामिल था,लेकिन उसने यह भी दावा किया कि उसने ऐसा दबाव में आकर किया। उसके अनुसार ईरान में रहने वाले उसके परिवार को धमकियाँ दी जा रही थीं और इसी वजह से वह इस काम के लिए तैयार हुआ।

मर्चेंट ने अदालत को बताया कि उसे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड काप्स से जासूसी से जुड़ा प्रशिक्षण मिला था। उसने यह भी कहा कि संभावित हमले के लिए उसे तीन प्रमुख नेताओं के नाम दिए गए थे। इनमें डोनाल्ड ट्रंप के अलावा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और पूर्व अमेरिकी राजनयिक निक्की हेली का नाम भी शामिल था।

अदालत में यह भी बताया गया कि मर्चेंट का निजी जीवन कई देशों से जुड़ा हुआ था। उसकी दो पत्नियाँ थीं,जिनमें से एक पाकिस्तान में रहती थी और दूसरी ईरान में। वह अक्सर ईरान की यात्रा करता था और वहीं उसकी मुलाकात उन लोगों से हुई जिन्होंने उसे इस नेटवर्क में शामिल किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार मर्चेंट ने वर्ष 2022 या 2023 के आसपास पाकिस्तान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड काप्स के लिए काम करना शुरू किया था। इसके बाद 2023 के अंत में उसे अमेरिका भेजा गया,जहाँ उसका काम नए लोगों की भर्ती करना और संभावित ऑपरेशन के लिए नेटवर्क तैयार करना था।

इस मामले की प्रमुख अभियोजक नीना गुप्ता ने अदालत को बताया कि मर्चेंट ने अपने वास्तविक उद्देश्य को छिपाने के लिए कपड़ों के व्यापार को आड़ के रूप में इस्तेमाल किया। वह खुद को एक व्यापारी के रूप में प्रस्तुत करता था,जबकि वास्तव में वह अलग-अलग लोगों से संपर्क कर अपने मिशन के लिए सहयोग तलाश रहा था।

अभियोजन के अनुसार उसका लक्ष्य ऐसे लोगों पर हमला करना था,जिन्हें वह पाकिस्तान और मुस्लिम दुनिया के खिलाफ मानता था। बाद में उसके मिशन को बदल दिया गया और उसे एक नए उद्देश्य के साथ फिर से अमेरिका भेजा गया।

नए मिशन के तहत उसे “माफिया” से जुड़े लोगों से संपर्क करने और उन्हें पैसे देकर अलग-अलग काम करवाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें गोपनीय दस्तावेजों की चोरी,विरोध प्रदर्शन आयोजित करना और तीन संभावित नेताओं में से किसी एक की हत्या की व्यवस्था करना शामिल था।

जाँच में सामने आया कि मर्चेंट ने न्यूयॉर्क में रहने वाले अपने एक परिचित नदीम अली से संपर्क किया था। हालाँकि,अली वास्तव में एफबीआई का मुखबिर था और उसने तुरंत एजेंसी को इस योजना के बारे में जानकारी दे दी। इसके बाद एफबीआई ने एक गुप्त ऑपरेशन शुरू किया और अपने अंडरकवर एजेंटों को सुपारी किलर के रूप में मर्चेंट के संपर्क में भेजा।

जाँच के दौरान यह भी सामने आया कि मर्चेंट ने हत्या की साजिश को आगे बढ़ाने के लिए अंडरकवर एजेंटों को 5,000 डॉलर की अग्रिम राशि भी दी थी। इसके अलावा न्यूयॉर्क के एक होटल के कमरे में उसने नैपकिन पर पूरी साजिश का खाका भी बनाया था। इस दौरान एजेंटों ने गुप्त रूप से उसकी बातचीत रिकॉर्ड की।

अदालत में पेश की गई एक रिकॉर्डिंग में मर्चेंट एजेंटों से कहते हुए सुनाई देता है, “शायद आप किसी को मार सकते हैं… शायद वह कोई राजनीतिक व्यक्ति हो।” अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह रिकॉर्डिंग इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वह हत्या की योजना को गंभीरता से अंजाम देने की कोशिश कर रहा था।

जाँच में यह भी पता चला कि उसने इंटरनेट पर उन स्थानों की तलाश की थी,जहाँ डोनाल्ड ट्रंप चुनावी रैलियाँ कर रहे थे। इससे स्पष्ट होता है कि वह संभावित हमले के लिए स्थान और अवसर तलाश रहा था।

मामले में एक और दिलचस्प संयोग सामने आया। मर्चेंट की गिरफ्तारी के एक दिन बाद पेंसिल्वेनिया में ट्रंप की एक रैली के दौरान एक अन्य व्यक्ति ने उन पर गोली चलाने की कोशिश की थी। हालाँकि,यह घटना मर्चेंट की साजिश से पूरी तरह अलग थी। उस हमले में गोली ट्रंप के कान को छूते हुए निकल गई थी और वह सुरक्षित बच गए थे।

इस पूरे मामले ने अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और खुफिया नेटवर्क की भूमिका को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते यह साजिश उजागर न होती,तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे।

कुल मिलाकर यह मामला अंतर्राष्ट्रीय राजनीति,खुफिया गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों का एक जटिल उदाहरण बन गया है। अदालत के फैसले के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आसिफ मर्चेंट को अंतिम रूप से कितनी सजा सुनाई जाती है और इस मामले के बाद अमेरिका अपनी सुरक्षा रणनीतियों में किस तरह के बदलाव करता है।