अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप का दावा—अमेरिका में 18 ट्रिलियन डॉलर का निवेश, महँगाई में गिरावट और टैक्स सुधारों से अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार

वॉशिंगटन,3 दिसंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राजनीति एक बार फिर आर्थिक बहस के केंद्र में लौट आई है और यह बहस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने छेड़ी है। एक लंबी कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका की अर्थव्यवस्था में अब तक का “सबसे बड़ा सुधार” देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि पिछले मात्र 10 महीनों में अमेरिका ने 18 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की नई प्रतिबद्धताएँ हासिल की हैं,जो अमेरिकी इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। ट्रंप ने अपनी सरकार के आर्थिक प्रदर्शन की तुलना बाइडेन प्रशासन से करते हुए कहा कि उनकी नीतियों ने उद्योगों,निवेशकों और आम नागरिकों के बीच नया भरोसा पैदा किया है।

ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अमेरिका आज उस आर्थिक ऊँचाई पर है,जहाँ पिछले कई दशकों में पहुँचना संभव नहीं था।” उन्होंने यह भी दावा किया कि महँगाई घट रही है और टैक्स सुधारों ने कंपनियों और परिवारों दोनों को सीधी राहत दी है। उन्होंने कहा कि ये बदलाव विशेष रूप से भारतीय मूल के पेशेवरों,कारोबारियों और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं,क्योंकि वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाते हैं।

कैबिनेट बैठक में भाग लेते हुए ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी उद्योगों में तेज़ी से निवेश आ रहा है और कंपनियों ने पूँजीगत खर्च में लगभग 15 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। बेसेंट ने सरकार के प्रमुख टैक्स सुधारों को इस आर्थिक रेडियंस का मुख्य कारण बताया। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन ने टैक्स को लेकर बड़े बदलाव किए हैं—खासतौर पर “वन बिग, ब्यूटिफुल बिल”—जो कंपनियों को 100 प्रतिशत खर्च घटाने की सुविधा देता है। साथ ही टिप,ओवरटाइम और सोशल सिक्योरिटी पर टैक्स हटाने से कामगारों की जेब में अधिक धन जाएगा और उनकी वास्तविक आय बढ़ेगी। बेसेंट ने कहा कि यह सुधार महँगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि साल 2026 में अमेरिकी नागरिकों को बड़े पैमाने पर टैक्स रिफंड मिल सकते हैं। उनके अनुसार,तीन बड़े कारक—इमिग्रेशन,ब्याज दरें और महँगाई अब सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ब्याज दरों में गिरावट का लाभ जल्द ही घर खरीदने वालों,स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों को मिलेगा। ऊर्जा की कीमतें भी अगले साल और कम होने की उम्मीद है,जिससे उपभोक्ताओं का खर्च घटेगा और महँगाई नियंत्रित रहेगी।

उप राष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने बैठक के दौरान कहा कि अमेरिकी परिवार पिछले कुछ वर्षों के आर्थिक झटकों से उबर रहे हैं। उन्होंने बाइडेन प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि बाइडेन सरकार के दौरान एक औसत अमेरिकी परिवार की आमदनी 3000 डॉलर तक कम हुई थी,जबकि ट्रंप प्रशासन के केवल 10 महीनों में ही परिवारों की आय 1000 डॉलर बढ़ी है। वेंस ने कहा कि बाइडेन प्रशासन की नीतियों के कारण महँगाई में तेज़ी आई और जीवन यापन का खर्च बढ़ गया, जिसका सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ा। वहीं ट्रंप की नीतियों ने उन समस्याओं को दूर करते हुए अमेरिकी परिवारों में फिर से आर्थिक संतुलन स्थापित किया है।

अमेरिका में भारतीय मूल के पेशेवरों की संख्या लाखों में है,जो इंजीनियरिंग,हेल्थकेयर,टेक्नोलॉजी,फार्मास्यूटिकल्स और छोटे व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसी वजह से टैक्स सुधार,निवेश बढ़ोतरी और नियमों में ढील इन समुदायों के लिए विशेष महत्व रखती है। कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने बताया कि अमेरिकी प्रशासन के हालिया फैसलों का सीधा असर उन इंडस्ट्रीज़ पर पड़ रहा है,जिनमें इंडियन-अमेरिकन की बड़ी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि ऑटो सेक्टर,टेक्नॉलॉजी,सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल उद्योगों में भारी निवेश का दौर शुरू हो गया है।

लुटनिक ने कहा कि अमेरिका ने वैश्विक व्यापार के नक्शे को बदलते हुए सेमीकंडक्टर उद्योग में पहले ही 300 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा कर दी है और यह आँकड़ा अगले 60 दिनों में बढ़कर 750 बिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। उन्होंने बताया कि दवा उद्योग के लिए भी लगभग 250 बिलियन डॉलर का निवेश अमेरिका में आ रहा है,जो रोजगार और तकनीकी विकास दोनों को बढ़ावा देगा। इसके अलावा जापान और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त रूप से 750 बिलियन डॉलर निवेश करने का प्रस्ताव रखा है,ताकि वे अमेरिका में उत्पादन केंद्र स्थापित कर सकें। घरेलू उद्योग को मजबूती देने के लिए स्टील और इंटेल जैसी कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि इंटेल के साथ हुए समझौते से अकेले 40 बिलियन डॉलर की सौगात मिली है,लेकिन “मुख्यधारा मीडिया इस बारे में बताना नहीं चाहता।”

स्मॉल बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की प्रमुख केली लोफ़लर ने कहा कि छोटे व्यवसायों का कॉन्फिडेंस अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है। उन्होंने बताया कि छोटे व्यापारों ने न केवल अपने कामकाज का विस्तार किया है,बल्कि नई भर्तियों में भी बढ़ोतरी की है। लेबर सेक्रेटरी लोरी शावेज़-डेरेमर ने कहा कि देश को अभी 7 लाख नए कुशल कर्मचारियों की तत्काल आवश्यकता है। इनमें मशीनिस्ट,इलेक्ट्रिशियन,एआई तकनीक जानने वाले विशेषज्ञ और अन्य तकनीकी कुशल कामगारों की भारी माँग है।

ट्रंप प्रशासन के दावों ने न केवल अमेरिकी राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है,बल्कि वैश्विक बाजारों में भी हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप के दावे वास्तविक निवेश और स्थायी सुधार में तब्दील होते हैं,तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है,लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग यह भी कहता है कि आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए इन दावों की गहन समीक्षा की आवश्यकता है।

हालाँकि,ट्रंप ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि उनका प्रशासन पारदर्शिता,टैक्स सुधार और निवेश आकर्षित करने पर केंद्रित रहा है,फिर भी उनके दावों को लेकर अमेरिकी राजनीति दो खेमों में बँट गई है। एक पक्ष इसे ऐतिहासिक आर्थिक सुधार बता रहा है,जबकि दूसरा इसे चुनावी वादा और राजनीतिक प्रचार करार देता है। लेकिन इतना तय है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था,महँगाई,टैक्स सुधार और नए निवेश आने वाले महीनों में अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करेंगे।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय भी इस बदलाव पर बारीकी से नजर रखे हुए है,क्योंकि आने वाले वर्षों में इन नीतियों का सीधा प्रभाव उनके करियर, रोजगार और व्यापार पर पड़ेगा।