वाशिंगटन,25 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है। अपने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में ट्रंप ने कहा कि यदि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष में दखल नहीं दिया होता,तो शहबाज शरीफ की जान जा सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके हस्तक्षेप से दोनों देशों के बीच संभावित परमाणु टकराव टल गया।
ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि अपने पहले दस महीनों में उन्होंने आठ युद्ध समाप्त कराए और दक्षिण एशिया में भी एक बड़ा संकट टालने में भूमिका निभाई। उन्होंने बिना विस्तृत संदर्भ दिए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने तनावपूर्ण थे कि स्थिति परमाणु युद्ध तक पहुँच सकती थी। उनके अनुसार, “अगर मैं भारत-पाक संघर्ष में दखल नहीं देता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मर जाते।” ट्रंप ने यह संकेत दिया कि यह स्थिति कथित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बनी थी,हालाँकि उन्होंने इस अभियान का औपचारिक रूप से विस्तार से उल्लेख नहीं किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का श्रेय भी लिया। उन्होंने सांसदों से कहा कि उनके प्रशासन ने कूटनीतिक और आर्थिक उपायों के जरिए दोनों देशों को तनाव बढ़ाने से रोका। ट्रंप का दावा है कि ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ उपायों का उपयोग दबाव बनाने के लिए किया गया,जिससे दोनों पक्षों ने संयम बरता। हाल के महीनों में भी ट्रंप कई बार सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि उन्होंने ही दक्षिण एशिया में बड़े संघर्ष को रोका।
हालाँकि,ट्रंप के इन दावों पर भारत की ओर से पहले भी असहमति जताई गई है। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह के संघर्षविराम या तनाव कम करने के फैसले द्विपक्षीय स्तर पर लिए जाते हैं और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं होती। भारतीय अधिकारियों का कहना रहा है कि भारत अपनी सुरक्षा और कूटनीतिक नीतियों को स्वतंत्र रूप से तय करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान घरेलू राजनीतिक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ जैसे बड़े मंच से दिया गया यह दावा उनके समर्थकों के बीच उनकी वैश्विक नेतृत्व छवि को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप लंबे समय से यह संदेश देने का प्रयास करते रहे हैं कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने विश्व के विभिन्न हिस्सों में शांति स्थापित करने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं,खासकर सुरक्षा और सीमा से जुड़े मुद्दों पर। दोनों देश परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र हैं, इसलिए किसी भी सैन्य टकराव को वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में यदि वाकई किसी समय हालात अत्यधिक तनावपूर्ण रहे हों,तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर स्वाभाविक रूप से उस पर रही होगी। हालाँकि,ट्रंप द्वारा बताए गए विशिष्ट घटनाक्रम और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
ट्रंप का यह भी कहना है कि उनके प्रशासन ने सक्रिय कूटनीति के जरिए स्थिति को सँभाला और दोनों देशों को संयम बरतने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसे अपनी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक, “न्यूक्लियर टकराव टल गया” और लाखों लोगों की जान बची। हालाँकि,इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि या दोनों देशों की ओर से औपचारिक समर्थन सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के दावे अक्सर बड़े अंतर्राष्ट्रीय संकटों के संदर्भ में किए जाते हैं,लेकिन उनकी वास्तविकता का आकलन तथ्यों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है। फिलहाल,ट्रंप के बयान ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा जरूर तेज कर दी है। पाकिस्तान की ओर से भी इस दावे पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान दक्षिण एशिया की राजनीति और अमेरिका की भूमिका को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है। जहाँ ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं,वहीं भारत पहले ही ऐसे दावों को खारिज कर चुका है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस मुद्दे पर अन्य संबंधित पक्ष किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इस बयान का किसी प्रकार का कूटनीतिक असर पड़ता है।
