अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Arya909050)

ट्रंप ने चीनी-लिंक्ड कंपनी के सेमीकंडक्टर सौदे पर लगाई रोक,राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला

वाशिंगटन,3 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी वर्चस्व की जंग लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़ा एक बड़ा फैसला लेते हुए एक चीनी-लिंक्ड कंपनी के द्वारा किए गए अधिग्रहण पर रोक लगा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह सौदा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता था,इसलिए इसे जारी रहने देना देशहित में सही नहीं होता। उनके इस कदम को चीन पर तकनीकी निर्भरता कम करने और संवेदनशील तकनीकों पर नियंत्रण बनाए रखने की दिशा में एक कड़ा कदम माना जा रहा है।

शुक्रवार को जारी कार्यकारी आदेश के तहत,ट्रंप ने हाईफो कॉरपोरेशन को न्यू जर्सी स्थित एमकोर कॉरपोरेशन की कुछ चिप-संबंधी संपत्तियों के अधिग्रहण से रोक दिया। आदेश में यह उल्लेख किया गया कि इस सौदे के संबंध में ऐसे ठोस सबूत सामने आए हैं,जिनसे यह आशंका बनी कि यह डील अमेरिका की सुरक्षा,तकनीकी गोपनीयता और रणनीतिक हितों को कमजोर कर सकती है। ट्रंप के अनुसार,वर्तमान कानून और नियम इस प्रकार के जोखिमों से पूरी तरह निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं,इसलिए उन्हें अपने विशेष संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करना पड़ा।

हाईफो कॉरपोरेशन,भले ही कानूनी रूप से डेलावेयर में पंजीकृत कंपनी हो,लेकिन इसे नियंत्रित करने वाला व्यक्ति एक चीनी नागरिक है। कंपनी ने एमकोर से डिजिटल चिप,वेफर डिजाइन,फैब्रिकेशन और प्रोसेसिंग बिजनेस से जुड़ी संपत्तियाँ हासिल करने का सौदा किया था। यह अधिग्रहण 30 अप्रैल 2024 को पूरा भी हो चुका था। हालाँकि,सौदे के पूरा होने के कुछ ही समय बाद अमेरिकी एजेंसियों ने इसके संभावित खतरों की जाँच शुरू की और मामला राष्ट्रपति तक पहुँच गया।

कार्यकारी आदेश में यह साफ किया गया कि यह सौदा अब पूरी तरह रद्द माना जाएगा। हाईफो को एमकोर की इन संपत्तियों पर सीधे या परोक्ष रूप से किसी भी तरह का अधिकार रखने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही कंपनी को 180 दिनों के भीतर इन सभी संपत्तियों से अपना हित पूरी तरह समाप्त करने का निर्देश दिया गया है। जरूरत पड़ने पर यह समय सीमा अमेरिका की विदेशी निवेश समिति (सीएफआईयूएस) बढ़ा सकती है,लेकिन तब तक हाईफो को इन संपत्तियों,उनसे जुड़ी किसी भी तकनीकी जानकारी या रिकॉर्ड तक पहुँच नहीं मिलेगी।

आदेश में आगे कहा गया है कि प्रतिबंध केवल भौतिक संपत्तियों तक ही सीमित नहीं रहेगा,बल्कि गैर-सार्वजनिक तकनीकी जानकारी,आईटी सिस्टम,उत्पादों,पुर्जों, घटकों,दस्तावेजों और रिकॉर्ड पर भी लागू होगा। हाईफो या उसकी सहयोगी इकाइयों को किसी भी प्रकार की पहुँच के लिए समिति से लिखित अनुमति लेनी होगी। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी प्रशासन न केवल सौदे को रोक रहा है,बल्कि इस बात की भी पूरी कोशिश कर रहा है कि इस अवधि में कोई संवेदनशील जानकारी गलती से भी बाहर न जा सके।

कार्यकारी आदेश के जरिए विदेशी निवेश समिति को व्यापक अधिकार प्रदान किए गए हैं। समिति नियमों के पालन की जाँच कर सकेगी,प्रमाणपत्र माँग सकेगी और आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र ऑडिट भी करवा सकेगी। हाईफो को समय-समय पर लिखित रिपोर्ट जमा करवानी होगी,जिसमें यह बताना होगा कि वह आदेश का पालन कर रही है और विनिवेश की प्रक्रिया में कितनी प्रगति हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन इस मामले को केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं,बल्कि पूरी निगरानी के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।

सेमीकंडक्टर उद्योग को आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर,ऑटोमोबाइल,मेडिकल उपकरणों से लेकर रक्षा प्रणालियों तक—लगभग हर उन्नत मशीन में चिप का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि अमेरिका इस क्षेत्र को केवल आर्थिक नहीं,बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानता है। बीते कुछ वर्षों में चीन ने चिप निर्माण में तेजी से निवेश बढ़ाया है और अमेरिकी टेक कंपनियों के साथ साझेदारी के जरिए उन्नत तकनीकों तक पहुँच बनाने की कोशिश की है।

ट्रंप प्रशासन का यह कदम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है,जिसके तहत संवेदनशील प्रौद्योगिकियों पर विदेशी,खासकर चीनी,नियंत्रण को सीमित करने की नीति अपनाई गई है। इससे पहले भी कई अवसरों पर अमेरिका ने चीनी कंपनियों के साथ हुए अधिग्रहण सौदों को रोक दिया था या उनके नियम कड़े कर दिए थे। ऐसे फैसलों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विदेशी संस्था को उन तकनीकों तक सीधी पहुँच न मिले,जिनका उपयोग भविष्य में सैन्य या साइबर क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।

हालाँकि,आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के प्रतिबंध विदेशी निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकते हैं और अमेरिकी कंपनियों के लिए पूँजी जुटाना मुश्किल बना सकते हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा के नाम पर अत्यधिक हस्तक्षेप से वैश्विक व्यापार संबंधों पर भी असर पड़ सकता है,लेकिन ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी आर्थिक लाभ से बड़ी प्राथमिकता है।

इस निर्णय ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अमेरिका अपने सेमीकंडक्टर उद्योग को किसी भी तरह के बाहरी प्रभाव से सुरक्षित रखना चाहता है। आने वाले समय में ऐसे और भी कदम उठाए जा सकते हैं,खासकर तब जब चीन और अमेरिका के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज होती दिख रही है।

ट्रंप के आदेश से न केवल हाईफो कॉरपोरेशन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है,बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए भी यह संकेत है कि भविष्य में सेमीकंडक्टर और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सौदे पहले से कहीं ज्यादा सख्त जाँच से गुजरेंगे। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हाईफो 180 दिनों के भीतर संपत्तियों से कैसे और कब पूरी तरह बाहर निकलती है और क्या इस मामले से संबंधित आगे कोई कानूनी लड़ाई भी देखने को मिलती है।

स्पष्ट है कि एक चिप सौदे पर लगी यह रोक महज व्यापारिक फैसला नहीं,बल्कि तकनीकी शक्ति,राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति के जटिल समीकरणों का हिस्सा है—जहाँ हर कदम भविष्य के संतुलन को तय कर सकता है।