अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@mdzishan0786)

व्हाइट हाउस में ट्रंप-नेतन्याहू की अहम मुलाकात,ऊर्जा और डीरेगुलेशन एजेंडा भी केंद्र में

वाशिंगटन,12 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा करते हुए बताया कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है,जब अमेरिका-इजरायल संबंध वाशिंगटन की मिडिल ईस्ट नीति के केंद्र में बने हुए हैं। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में क्षेत्रीय सुरक्षा,रक्षा सहयोग,गाजा से जुड़े हालात और ईरान के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।

कैरोलिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस में नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। हालाँकि,बैठक के विस्तृत एजेंडे का खुलासा नहीं किया गया,लेकिन व्हाइट हाउस की परंपरा के अनुसार इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकों में सामरिक सहयोग,रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल रहते हैं। नेतन्याहू का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है,जब मध्य पूर्व में तनावपूर्ण परिस्थितियाँ बनी हुई हैं और अमेरिका की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

प्रेस सचिव ने बताया कि सप्ताह के बाकी दिनों में ट्रंप प्रशासन का फोकस ऊर्जा और अविनियमन यानी डीरेगुलेशन पर रहेगा। लेविट के अनुसार,बुधवार को ही राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में कोयला उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में कोयले को “साफ,सुंदर और अमेरिका का सबसे भरोसेमंद तथा सस्ता ऊर्जा स्रोत” बताया जाएगा,खासकर उस समय जब बिजली की माँग चरम पर होती है। ट्रंप का तर्क है कि कोयले के अधिक उपयोग से देश में बिजली की कीमतों को कम किया जा सकता है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सकता है।

लेविट ने आगे बताया कि गुरुवार को राष्ट्रपति ट्रंप पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) के प्रशासक ली जेल्डिन के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहाँ 2009 में ओबामा प्रशासन के दौरान की गई तथाकथित ‘खतरे की खोज’ को औपचारिक रूप से रद्द किया जाएगा। यह ‘एंडेंजमेंट फाइंडिंग’ कई संघीय जलवायु नियमों का कानूनी आधार रही है। इसे वापस लेना अमेरिकी पर्यावरण नीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। लेविट ने इसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी डीरेगुलेटरी कार्रवाई बताया और दावा किया कि इससे अमेरिकी लोगों को लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर की बचत होगी।

प्रेस सचिव के अनुसार,इस बचत का बड़ा हिस्सा नई गाड़ियों की कम लागत से आएगा। उन्होंने कहा कि लोकप्रिय लाइट-ड्यूटी कारों,एसयूवी और ट्रकों की कीमत में औसतन 2,400 डॉलर से अधिक की कमी आ सकती है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम आम अमेरिकियों के लिए जीवन-यापन की लागत कम करने की दिशा में उठाया गया है। हालाँकि,पर्यावरण समूहों और जलवायु कार्यकर्ताओं ने पहले ही संकेत दिया है कि इस तरह के कदमों से कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि हो सकती है और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को झटका लग सकता है।

शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग का दौरा करेंगे। लेविट के मुताबिक,वहाँ वे सैन्य परिवारों और स्पेशल फोर्स के उन सदस्यों से मिलेंगे जिन्होंने वेनेजुएला में ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ को अंजाम दिया। प्रशासन का दावा है कि इस ऑपरेशन ने नार्कोटेररिज्म से जुड़े तत्वों के खिलाफ सख्त संदेश दिया है। इस दौरे को सैन्य बलों के प्रति समर्थन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रशासन की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

प्रेस ब्रीफिंग की शुरुआत एक अलग मुद्दे से हुई। लेविट ने सवाना गुथरी की माँ से जुड़ी एक “दिल तोड़ने वाली स्थिति” का जिक्र किया और कहा कि राष्ट्रपति ने हाल ही में जारी हुई सर्विलांस फुटेज की समीक्षा की है। उन्होंने देशभर के नागरिकों से अपील की कि यदि किसी के पास संदिग्ध के बारे में कोई भी जानकारी हो तो वह एफबीआई से संपर्क करे। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन घरेलू सुरक्षा मुद्दों पर भी सक्रिय रुख अपनाए हुए है।

इस बीच,नेतन्याहू का व्हाइट हाउस दौरा वैश्विक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। अमेरिका और इजरायल के बीच दशकों पुराना रणनीतिक गठबंधन है,जो रक्षा सहयोग,खुफिया साझेदारी और तकनीकी आदान-प्रदान पर आधारित है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में यह मुलाकात और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम,गाजा की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर भी चर्चा हो सकती है।

यह सप्ताह ट्रंप प्रशासन के लिए कूटनीतिक और घरेलू नीतिगत दोनों मोर्चों पर अहम साबित होने वाला है। जहाँ एक ओर व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री के साथ उच्चस्तरीय वार्ता होगी,वहीं दूसरी ओर ऊर्जा नीति,पर्यावरण नियमों में ढील और सैन्य समर्थन जैसे मुद्दों पर प्रशासन अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट करेगा। इन कदमों के दीर्घकालिक प्रभावों पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।