डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भड़का ईरान (तस्वीर क्रेडिट@OpIndia_in)

ईरान पर फिर गरजे ट्रंप,होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो ऊर्जा ठिकानों को तबाह करने की दी चेतावनी

वाशिंगटन,31 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर चेतावनी दी है। सोमवार को ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत नहीं खोला गया और कोई समझौता नहीं हुआ,तो अमेरिका ईरान के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें पूरी तरह तबाह कर सकता है। उनके इस बयान ने पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में प्रगति की बात स्वीकार की,लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि जल्द कोई ठोस समझौता नहीं होता है,तो अमेरिका सख्त सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने विशेष रूप से ईरान के पावर प्लांट, तेल के कुएं और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप को निशाना बनाने की चेतावनी दी।

अपने बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरान के डिसेलिनेशन प्लांट्स,यानी खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्रों को भी निशाना बनाया जा सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका ईरान के बुनियादी ढाँचे को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुँचाने की रणनीति पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अब तक इन ठिकानों को जानबूझकर नहीं छुआ गया है,लेकिन परिस्थितियाँ बदलने पर यह रुख बदल सकता है।

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि संभावित कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों और अन्य लोगों की मौत का बदला लेना होगा,जिसके लिए उन्होंने ईरान को जिम्मेदार ठहराया। हालाँकि,उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस विवरण साझा नहीं किया,लेकिन उनके इस आरोप ने दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति को और तीखा कर दिया है।

इससे पहले ट्रंप का फाइनेंशियल टाइम्स को दिया गया इंटरव्यू भी चर्चा में रहा था। इस इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर कहा कि उन्हें ईरान के तेल में दिलचस्पी है। ट्रंप ने कहा कि उनकी “पसंदीदा चीज” ईरान का तेल लेना है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना वेनेजुएला से की,जहाँ अमेरिका कथित तौर पर वहाँ के तेल उद्योग पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के तेल पर नियंत्रण का मतलब सीधे तौर पर खार्ग द्वीप पर कब्जा करना होगा,क्योंकि यही वह प्रमुख केंद्र है,जहाँ से ईरान का 90 प्रतिशत से अधिक तेल निर्यात होता है। ऐसे में इस क्षेत्र को निशाना बनाना न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका दे सकता है,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज,जिसके खुलने की माँग ट्रंप कर रहे हैं,वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहाँ से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल की आपूर्ति होती है। यदि इस मार्ग में बाधा आती है,तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।

ट्रंप के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि अमेरिका इस मुद्दे पर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। हालाँकि,उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की संभावना को भी खारिज नहीं किया और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही कोई समझौता हो सकता है,लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि ऐसा नहीं होता है,तो सैन्य विकल्प पूरी तरह खुला रहेगा।

ट्रंप के इस बयान ने पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समाधान निकलता है या फिर हालात और अधिक बिगड़ते हैं।