वाशिंगटन,20 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को वैश्विक कूटनीति और संघर्षोत्तर पुनर्निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक नए अंतर्राष्ट्रीय मंच की शुरुआत की। यह उच्चस्तरीय बैठक संयुक्त राज्य अमेरिका शांति संस्थान में आयोजित की गई,जहाँ ट्रंप ने गाजा में युद्ध के बाद स्थिरीकरण और मानवीय राहत प्रयासों के लिए अमेरिका की ओर से 10 अरब डॉलर के योगदान की घोषणा की। इस पहल को ट्रंप प्रशासन की ओर से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक निर्णायक प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस,विदेश मंत्री मार्को रुबियो,विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और बोर्ड सदस्य जारेड कुशनर मौजूद रहे। अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा, “हम जो कर रहे हैं,वह एक सरल शब्द है—शांति। इसे कहना आसान है,लेकिन हासिल करना कठिन। लेकिन हम इसे हासिल करेंगे।” उन्होंने इसे एक दीर्घकालिक शांति संरचना की नींव बताते हुए कहा कि युद्ध के बाद की अराजकता को रोकना और स्थिर शासन व्यवस्था स्थापित करना ही इस मंच का मुख्य उद्देश्य है।
ट्रंप ने जानकारी दी कि उद्घाटन बैठक में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें कई राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ स्वयं उपस्थित रहे,जबकि भारत का प्रतिनिधित्व अमेरिका में भारतीय उप राजदूत नामग्या खम्पा ने किया। यह उपस्थिति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि दक्षिण एशिया के दोनों प्रमुख देश इस पहल पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
गाजा की स्थिति पर बोलते हुए ट्रंप ने दावा किया कि “गाजा का युद्ध खत्म हो चुका है,” हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब पूरी दुनिया की निगाहें हमास के अगले कदम पर टिकी हैं। उन्होंने कहा कि हमास से हथियार डालने की अपेक्षा की जा रही है और यदि ऐसा नहीं हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप के अनुसार,पिछले अक्टूबर से लागू संघर्षविराम कायम है और सभी शेष बंधकों—चाहे वे जीवित हों या मृत को वापस लाया जा चुका है।
गौरतलब है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इजराइल पर हुए हमले के बाद हुई थी,जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए और 200 से अधिक लोगों को बंधक बनाया गया। इसके बाद इजरायल की व्यापक सैन्य कार्रवाई में हजारों फिलिस्तीनियों की मौत हुई और गाजा पट्टी में गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हो गया। अस्पताल,स्कूल और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा,जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ी।
राहत और पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए ट्रंप ने बताया कि कजाकिस्तान,अजरबैजान,संयुक्त अरब अमीरात,बहरीन,मोरक्को, सऊदी अरब,कतर,उज्बेकिस्तान और कुवैत समेत कई देशों ने मिलकर 7 अरब डॉलर से अधिक की राशि देने का वादा किया है। इसके अतिरिक्त,मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय 2 अरब डॉलर जुटाने में लगा है,जबकि फीफा ने 7.5 करोड़ डॉलर की परियोजनाएँ शुरू करने की घोषणा की है,जिनका उद्देश्य खेल और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देना है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का 10 अरब डॉलर का योगदान इस पूरे पैकेज में सबसे बड़ा होगा। उन्होंने इसे युद्ध की लागत की तुलना में “बहुत छोटी राशि” बताते हुए तर्क दिया कि यदि इस निवेश से स्थायी शांति सुनिश्चित होती है,तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत लाभकारी साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा न केवल मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है,बल्कि इससे अमेरिका की पश्चिम एशिया में रणनीतिक भूमिका भी मजबूत होगी।
सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में ट्रंप ने खुलासा किया कि अल्बानिया,कोसोवो और कजाखस्तान गाजा में स्थिरता बनाए रखने के लिए सैनिक और पुलिस बल भेजने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भागीदारी से शांति प्रयासों को विश्वसनीयता मिलेगी। साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि मिस्र और जॉर्डन विश्वसनीय फिलिस्तीनी पुलिस बल के प्रशिक्षण और समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह संकेत देता है कि बोर्ड ऑफ पीस केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि संस्थागत ढाँचे के निर्माण पर भी ध्यान देगा।
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने दक्षिण एशिया की ओर भी संकेत किया। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों देशों से संयम बरतने और तनाव कम करने का आग्रह किया था। ट्रंप ने दावा किया कि यदि दोनों देश संघर्ष की दिशा में आगे बढ़ते,तो वे उन पर 200 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने पर विचार करते। उन्होंने दोनों को परमाणु संपन्न राष्ट्र बताते हुए कहा कि ऐसे किसी भी टकराव के वैश्विक परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं। हालाँकि,इस बयान पर भारत और पाकिस्तान की ओर से तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल ट्रंप प्रशासन की व्यापक विदेश नीति रणनीति का हिस्सा है,जिसमें संघर्षों को समाप्त करने के साथ-साथ पुनर्निर्माण में बहुपक्षीय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। गाजा में स्थिरता स्थापित करना आसान नहीं होगा,क्योंकि राजनीतिक विभाजन,सुरक्षा चिंताएँ और मानवीय जरूरतें बेहद जटिल हैं। फिर भी,10 अरब डॉलर की अमेरिकी प्रतिबद्धता और अन्य देशों के सहयोग से यह स्पष्ट संकेत गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय युद्धोत्तर गाजा को अस्थिरता के गर्त में नहीं छोड़ना चाहता।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हमास और अन्य क्षेत्रीय पक्ष इस नई पहल पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह मंच वास्तव में जमीन पर स्थायी शांति स्थापित कर पाता है। यदि बोर्ड ऑफ पीस अपने घोषित उद्देश्यों में सफल होता है,तो यह न केवल गाजा बल्कि वैश्विक संघर्ष समाधान के मॉडल के रूप में भी उभर सकता है। फिलहाल,ट्रंप की इस घोषणा ने पश्चिम एशिया की राजनीति में एक नई बहस और संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
