अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

होर्मुज को लेकर ट्रंप की सख्त चेतावनी,ईरान पर हमले की धमकी से बढ़ा वैश्विक तनाव

वाशिंगटन,6 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य पूर्व में तनाव को नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है। ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे की मोहलत दी थी,लेकिन समय सीमा पूरी होने से पहले ही उन्होंने अपने तेवर और सख्त कर लिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर किए गए पोस्ट में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला,तो उसे मंगलवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनाव चरम पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है और यहाँ किसी भी प्रकार की रुकावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “मंगलवार को ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे एक साथ होंगे,” जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिकी सेना ईरान के बिजलीघरों और पुलों को निशाना बना सकती है।

ट्रंप ने अपने संदेश में ईरान को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा, “होर्मुज खोलो,वरना नरक में रहोगे।” उनके इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि इससे किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंका और गहरा गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में इस तरह का हमला करता है,तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैल सकती है।

इस बीच ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी के रेस्क्यू ऑपरेशन का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि एक घायल कर्नल,जो एफ-15 के क्रू सदस्य थे,को बेहद जोखिम भरे मिशन के जरिए बचाया गया। ट्रंप के अनुसार,यह ऑपरेशन अत्यंत खतरनाक परिस्थितियों में अंजाम दिया गया,क्योंकि ईरानी सेना उस अधिकारी की तलाश में थी और काफी करीब पहुँच चुकी थी। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू टीम ने लगभग सात घंटे तक दुश्मन इलाके में रहकर इस मिशन को सफल बनाया।

ट्रंप ने इस ऑपरेशन को “बहादुरी और कौशल का अभूतपूर्व प्रदर्शन” बताया और अमेरिकी सेना की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मिशन आमतौर पर बहुत कम किए जाते हैं,क्योंकि इनमें जोखिम का स्तर अत्यधिक होता है। ट्रंप ने जानकारी दी कि एक दूसरा रेस्क्यू मिशन भी चलाया गया,जिसमें पायलट को दिन के उजाले में सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उन्होंने सोमवार को ओवल ऑफिस में सेना के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा की है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस तनाव पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है,ताकि स्थिति और न बिगड़े। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के इस कड़े रुख का समर्थन किया है। नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान जारी कर ट्रंप के साहस और निर्णय क्षमता की सराहना की और उन्हें सैल्यूट किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल का यह समर्थन अमेरिका-ईरान विवाद को और जटिल बना सकता है,क्योंकि इससे क्षेत्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। मध्य पूर्व पहले से ही कई संघर्षों का केंद्र रहा है और ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

तेल बाजारों पर भी इस तनाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित होती है,तो इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।

ट्रंप की यह सख्त चेतावनी और आक्रामक बयानबाजी आने वाले दिनों में किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत दे रही है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या यह विवाद कूटनीतिक स्तर पर सुलझता है या फिर सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।