अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

ईरान पर ट्रंप का तीखा हमला,होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चेतावनी से बढ़ा वैश्विक तनाव

नई दिल्ली,11 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा और विवादित बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि “ईरानी आज सिर्फ इसलिए जिंदा हैं,ताकि वे बातचीत कर सकें,” जिससे दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों में और तीखापन आ गया है। उनके इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है और कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

ट्रंप ने यह टिप्पणी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट के जरिए की। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के पास वैश्विक मंच पर दबाव बनाने के लिए सीमित विकल्प हैं और वह अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों,विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट,का इस्तेमाल करके दुनिया पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के अनुसार,ईरान की रणनीति अस्थायी दबाव बनाने तक सीमित है और वह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती।

अपने बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरानी लोग युद्ध के मुकाबले “फेक न्यूज मीडिया” और “पब्लिक रिलेशन्स” को सँभालने में ज्यादा माहिर हैं। इस तरह की टिप्पणी को कई विश्लेषक कूटनीतिक दृष्टि से आक्रामक और असामान्य मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार के बयान क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं और बातचीत के माहौल को और जटिल बना सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप ने विशेष रूप से चेतावनी दी। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा जरूरतें इसी रास्ते से पूरी होती हैं। ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह इस जलमार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर शुल्क वसूलने की कोशिश कर रहा है,जो न केवल अनुचित है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के भी खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी कार्रवाई तुरंत बंद की जानी चाहिए। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों के गुजरने की अनुमति देने में “बहुत खराब काम” कर रहा है और कुछ लोग इसे “बेईमानी” भी कह सकते हैं। उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है और किसी भी प्रकार की बाधा को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

यह बयान ऐसे समय में आया है,जब हालिया संघर्ष के बाद एक अस्थायी संघर्षविराम लागू हुआ है। हालाँकिरिपोर्ट्स के मुताबिक,इस संघर्षविराम के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कमी आई है,जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने इस स्थिति पर नजर बनाए रखी है,क्योंकि इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। उनके अनुसार,तेल शिपमेंट को सीमित करना और समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करना समझौते की भावना के खिलाफ है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि यदि स्थिति नहीं सुधरी,तो अमेरिका इस मामले में सख्त कदम उठा सकता है,हालाँकि उन्होंने किसी ठोस कार्रवाई की घोषणा नहीं की।

दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले ट्रंप खुद भी होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी टोल लगाने का विचार दे चुके हैं। हालाँकि,इस बार उन्होंने कहा कि उन्हें ईरान द्वारा कथित शुल्क वसूली की जानकारी हाल ही में मिली है। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दिया है कि क्या अमेरिका और ईरान दोनों ही इस रणनीतिक जलमार्ग को अपने-अपने हितों के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।

दूसरी ओर,ईरान की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन पहले के बयानों में उसने स्पष्ट किया है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। ईरान का मानना है कि वह अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार रखता है,जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के रूप में देखता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर यह विवाद केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ता है। यदि इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा आती है,तो इसका असर तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।

ट्रंप के हालिया बयान ने यह संकेत दिया है कि संघर्षविराम के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाते हैं या फिर यह विवाद और गहराता है। फिलहाल,दुनिया की नजरें इस संवेदनशील क्षेत्र पर टिकी हुई हैं, जहाँ किसी भी छोटे घटनाक्रम का बड़ा असर हो सकता है।