मुंबई,2 जनवरी (युआईटीवी)- बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ आखिरकार सिनेमाघरों में पहुँच गई है और रिलीज के साथ ही फिल्म ने चर्चा का केंद्र बना लिया है। फिल्म में अगस्त्य नंदा,सिमर भाटिया,जयदीप अहलावत और धर्मेंद्र जैसे कलाकारों की मौजूदगी ने दर्शकों की उत्सुकता पहले ही बढ़ा दी थी। अब जब फिल्म पर्दे पर आ चुकी है,तो इसका रिस्पांस मिला-जुला नजर आ रहा है,जहाँ कई लोग इसे भावनात्मक और देशभक्ति से भरपूर मान रहे हैं,वहीं कुछ दर्शकों का कहना है कि फिल्म का पहला हिस्सा अपेक्षा से ज्यादा लंबा और धीमा है।
फिल्म देखकर निकले दर्शकों की प्रतिक्रियाओं में सबसे ज्यादा चर्चा अगस्त्य नंदा के प्रदर्शन की हो रही है। अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने इस फिल्म के जरिए सेना के एक युवा अफसर का किरदार निभाया है,जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। कई लोगों का मानना है कि अगस्त्य के भीतर मसाला फिल्मों के साथ-साथ कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा सँभालने की भी क्षमता दिखाई देती है। एक दर्शक ने कहा कि वह रोमांस और एक्शन—दोनों तरह के दृश्यों में सहज नजर आए और उनमें “हीरो मटीरियल” होने के सभी गुण मौजूद हैं।
हालाँकि,दर्शकों ने फिल्म के पहले हाफ को लेकर कुछ शिकायतें भी जताईं। उनका कहना है कि कहानी का सेट-अप थोड़ा ज्यादा खिंच जाता है,जिससे फिल्म शुरू के हिस्से में सुस्त महसूस होती है। पात्रों की पृष्ठभूमि,भावनात्मक टकराव और पारिवारिक रिश्तों को विस्तार से दिखाने के दौरान गति कमजोर पड़ जाती है,लेकिन जैसे ही फिल्म सेकेंड हाफ में प्रवेश करती है,कहानी युद्ध और रणनीति के मैदान में पहुँच जाती है, जहाँ फिल्म अपनी रफ्तार पकड़ लेती है।
सेकेंड हाफ में फिल्म का फोकस युद्ध के दृश्यों,सैनिकों की कुर्बानियों और टकराव के मानवीय पक्ष पर आ जाता है। कई दर्शकों ने बताया कि इन दृश्यों ने उनकी आँखें नम कर दीं। विशेष रूप से,मोर्चे पर तैनात सैनिकों के बीच की दोस्ती और उनके परिवारों की चिंताओं को निर्देशक ने बड़े संवेदनशील तरीके से पेश किया है। एक दर्शक ने कहा कि फिल्म एक तरफ देशभक्ति का जज्बा जगाती है,तो दूसरी ओर युद्ध की पीड़ा को भी बेहद सच्चाई से दिखाती है।
धर्मेंद्र की उपस्थिति ने फिल्म में एक अलग ही भावनात्मक गहराई जोड़ दी है। चूँकि,यह उनके करियर की आखिरी फिल्म बताई जा रही है,इसलिए दर्शकों के लिए उन्हें पर्दे पर देखना एक भावुक अनुभव बन गया। एक महिला दर्शक ने कहा कि वह केवल धर्मेंद्र को आखिरी बार बड़े पर्दे पर देखने के लिए थिएटर पहुँची थीं। उन्होंने बताया कि अभिनेता की आवाज,संवाद अदायगी और सहज अभिनय ने उन्हें कई बार भावुक कर दिया। कई प्रशंसकों को ऐसा लगा मानो धर्मेंद्र अपने लंबे और शानदार करियर को इस फिल्म के जरिए विदाई दे रहे हों।
जयदीप अहलावत ने भी अपने मजबूत अभिनय से ध्यान खींचा। अपने गंभीर और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस के लिए मशहूर जयदीप ने एक महत्वपूर्ण किरदार निभाया है,जो कहानी को मजबूती देता है। दर्शकों के अनुसार,उनके और अगस्त्य नंदा के बीच के कुछ दृश्यों में खास ऊर्जा दिखती है और वही फिल्म को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
फिल्म के निर्देशन की भी काफी सराहना हो रही है। दर्शकों का कहना है कि निर्देशक श्रीराम ने युद्ध के दृश्यों को यथार्थ के करीब रखकर फिल्माया है। एक्शन दृश्यों में भव्यता तो है ही,साथ में भावनाओं का संतुलन भी बना हुआ है। कैमरा वर्क,बैकग्राउंड म्यूजिक और लोकेशन्स के चयन ने माहौल को और प्रभावशाली बना दिया है। हालाँकि,कुछ समीक्षक यह भी कह रहे हैं कि अगर संपादन थोड़ा कसा हुआ होता,तो फिल्म और अधिक प्रभावशाली हो सकती थी।
‘इक्कीस’ की रिलीज़ खुद भी कम दिलचस्प कहानी नहीं रही। फिल्म पहले दिसंबर में रिलीज होने वाली थी,लेकिन बड़े बजट वाली फिल्म ‘धुरंधर’ के साथ क्लैश से बचने के लिए निर्माताओं ने तारीख आगे बढ़ा दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक,फिल्म लगभग 200 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में तैयार की गई है। बॉक्स ऑफिस विश्लेषकों का अनुमान है कि रिलीज़ के पहले दिन फिल्म लगभग 5 करोड़ रुपये की ओपनिंग कर सकती है। वहीं,यह आशंका भी जताई जा रही है कि ‘धुरंधर’ अभी भी सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन कर रही है,जिसका असर ‘इक्कीस’ की कमाई पर पड़ सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि मीडिया रिपोर्ट्स में फिल्म की वैश्विक कमाई का आँकड़ा भी चर्चा में है। कहा जा रहा है कि ‘इक्कीस’ ने विश्व स्तर पर 1000 करोड़ रुपये का आँकड़ा पार कर लिया है। हालाँकि,ट्रेड सर्किल में इस दावे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। फिर भी, यह स्पष्ट है कि फिल्म ने देखने वालों के बीच जिज्ञासा और भावनात्मक जुड़ाव दोनों पैदा कर दिए हैं।
‘इक्कीस’ एक ऐसी फिल्म साबित हो रही है,जो भावनाओं,देशभक्ति और स्टार-पावर के मेल से दर्शकों को थिएटर तक खींचने में सफल है। धीमे पहले हाफ के बावजूद, फिल्म का मजबूत दूसरा हिस्सा,प्रभावशाली युद्ध दृश्य और धर्मेंद्र की आखिरी झलक इसे खास बना देते हैं। युवा कलाकारों के दमदार प्रयास और अनुभवी कलाकारों का अनुभव—दोनों का संतुलन फिल्म को देखने लायक बनाता है। आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर इसके प्रदर्शन से यह तय होगा कि दर्शकों का शुरुआती उत्साह कितने समय तक बना रहता है,लेकिन इतना तय है कि ‘इक्कीस’ ने सिनेमाघरों में भावनाओं की एक ऐसी लहर पैदा कर दी है, जिसे दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे।
