अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (तस्वीर क्रेडिट@KantipurTVHD)

यूक्रेन शांति वार्ता के लिए वाशिंगटन और मॉस्को ने टीम बनाने पर जताई सहमति : अमेरिकी विदेश मंत्री

रियाद,19 फरवरी (युआईटीवी)- यूक्रेन में शांति स्थापित करने और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी-रूस वार्ता में शामिल पक्षों ने एक उच्च स्तरीय टीम बनाने पर सहमति जताई है। यह जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दी है। यह वार्ता रियाद में हुई,जिसमें रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,रुबियो ने बताया कि वार्ता के दौरान दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या बहाल करने पर भी सहमति बनी है,क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में की गई कार्रवाइयों के कारण दोनों देशों के राजनयिक मिशनों की संचालन क्षमता में काफी कमी आई थी।

रूबियो ने कहा कि अमेरिकी-रूसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों को ऐसे मजबूत और जीवंत राजनयिक मिशनों की आवश्यकता होगी,जो इस प्रक्रिया को जारी रखने में सक्षम हो। उनका यह बयान अमेरिकी-रूसी राजनयिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत था,जिसमें वे मानते हैं कि दोनों देशों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय की आवश्यकता है। यह पहल इस तथ्य को रेखांकित करती है कि दोनों देशों के राजनयिक मिशन की स्थिरता और प्रभावशीलता,शांति प्रक्रिया और आर्थिक सहयोग में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इसके अलावा,रुबियो ने यह भी कहा कि केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में सक्षम हैं। उनका मानना था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बहुत कम समय में वैश्विक चर्चाओं को नया मोड़ दिया है और सिर्फ वह ही ऐसा कर सकते हैं। उनका यह बयान ट्रंप के नेतृत्व की सराहना करने के रूप में देखा गया,जिसमें वे मानते हैं कि ट्रंप का राजनीतिक कौशल और निर्णय क्षमता अंतर्राष्ट्रीय मामलों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

वहीं, क्रेमलिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने भी इस बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि रियाद में हुई बातचीत में दोनों पक्षों ने गंभीरता से सभी मुद्दों पर चर्चा की और एक-दूसरे के हितों का सम्मान करते हुए समझौतों पर सहमति जताई। उशाकोव ने इसे दोनों देशों के बीच एक अच्छे और उद्देश्यपूर्ण संवाद के रूप में प्रस्तुत किया। इस बैठक में अमेरिका और रूस के प्रतिनिधियों ने चार घंटे से अधिक समय तक बातचीत की,हालाँकि इसमें यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी शामिल नहीं थे।

यह वार्ता यूरोपीय नेताओं के लिए एक चिंता का विषय बन गई है,क्योंकि वे यूक्रेन संकट के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहते थे। यूरोपीय नेताओं, विशेषकर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की,को यह डर है कि ट्रंप मास्को के साथ जल्दबाजी में कोई समझौता कर सकते हैं,जो उनके सुरक्षा हितों की अनदेखी करेगा और पुतिन को भविष्य में यूक्रेन या अन्य देशों को धमकाने का स्वतंत्र अवसर देगा।

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस वार्ता के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि वह किसी भी समझौते को मान्यता नहीं देंगे,जिसमें वह खुद शामिल नहीं हैं। उनका यह बयान इस बात को दर्शाता है कि यूक्रेनी सरकार अपनी भागीदारी के बिना किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेगी,क्योंकि यह उनके देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है। जेलेंस्की का यह भी मानना है कि अगर इस प्रकार के निर्णय बिना उनकी सहमति के लिए गए तो इससे उनके देश की स्थिति कमजोर हो सकती है और रूस को और अधिक शक्ति मिल सकती है,जिससे भविष्य में यूक्रेन के लिए खतरे बढ़ सकते हैं।

यूक्रेन संकट को लेकर यूरोपीय नेता और विशेष रूप से यूक्रेनी सरकार की चिंताएँ इसलिए भी बढ़ गई हैं,क्योंकि वे चाहते थे कि इस मुद्दे पर किसी भी बड़े फैसले में उनका भी सक्रिय योगदान हो। रूस और अमेरिका के बीच बिना उनके शामिल होने के की गई इस वार्ता से उन्हें यह चिंता हुई कि कहीं उनकी उपेक्षा नहीं की जा रही है।

इस वार्ता का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह अमेरिका और रूस के बीच संबंधों में एक नई दिशा की ओर इशारा कर सकता है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और आरोप-प्रत्यारोप के बावजूद,यह बैठक इस बात का संकेत हो सकती है कि दोनों पक्ष शांति की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाने के लिए तैयार हैं। हालाँकि,इस वार्ता को लेकर कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय पक्षों की भी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं,जो इस क्षेत्र में अमेरिकी और रूसी भूमिका के बारे में अपनी चिंताएँ व्यक्त कर रहे हैं।

रियाद में हुई अमेरिका-रूस वार्ता यूक्रेन संकट के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है,लेकिन इसमें यूरोपीय नेताओं और यूक्रेन को शामिल करने के सवालों को लेकर आगे और अधिक बातचीत की आवश्यकता होगी। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का यह बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि यूक्रेन के लिए यह संकट केवल रूस और अमेरिका के बीच की बातचीत तक सीमित नहीं हो सकता,बल्कि इसमें उनके खुद के हितों और सुरक्षा की भी प्रमुख भूमिका होगी।