संयुक्त राष्ट्र,16 जनवरी (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाकर पाकिस्तान ने पुराना राग अलापा,जिस पर भारत ने कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर को लेकर लगातार झूठ फैला रहा है और आत्मनिर्णय की अवधारणा का गलत इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक और बहुलवादी देशों पर हमला करने की कोशिश कर रहा है। भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों का दुरुपयोग अपने विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आज सहयोग,शांति और साझा जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए।
गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर एल्डोस पुनूस ने पाकिस्तान की टिप्पणी का तीखा जवाब देते हुए कहा कि ऐसे समय में,जब दुनिया को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशना चाहिए,पाकिस्तान हर मंच और हर प्रक्रिया का दुरुपयोग कर अपने पुराने और विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की यह आदत बन चुकी है कि वह किसी भी विषय पर चर्चा हो,कश्मीर का मुद्दा बीच में ले आए,भले ही उसका उस चर्चा से कोई लेना-देना न हो।
एल्डोस पुनूस ने आत्मनिर्णय के अधिकार की अवधारणा पर भी पाकिस्तान को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्णय का अधिकार संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित एक बुनियादी सिद्धांत है,लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इसे लोकतांत्रिक और बहुलवादी देशों में अलगाव को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जाए। पुनूस ने दो टूक कहा कि जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश भारत का एक अहम और अविभाज्य हिस्सा है और इस सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करना न केवल भ्रामक है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों की गरिमा के भी खिलाफ है।
दरअसल,महासभा में यह चर्चा संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की वार्षिक रिपोर्ट को लेकर हो रही थी। इस चर्चा के दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की बात करते हुए अचानक कश्मीर का जिक्र कर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के सम्मान की बात कही और इसी बहाने भारत पर आरोप लगाने की कोशिश की। भारत ने इसे पूरी तरह बेवजह और असंगत करार दिया।
पुनूस ने कहा कि यह फोरम भी कोई अपवाद नहीं है,जहाँ पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर का निराधार उल्लेख किया हो। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भले ही झूठे आरोप लगाने और वास्तविकता से कोसों दूर तस्वीर पेश करने की आदत हो गई हो,लेकिन अब समय आ गया है कि वह इस तरह की बयानबाजी से बचे। भारत ने साफ किया कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का प्रचार न तो तथ्यों पर आधारित है और न ही अंतर्राष्ट्रीय कानून की सही समझ पर।
भारत ने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान अक्सर संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों की बात करता है,लेकिन वह उन प्रस्तावों के उस हिस्से को नजरअंदाज कर देता है,जो उस पर जिम्मेदारी डालते हैं। 21 अप्रैल 1948 को अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 में साफ तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान को जम्मू और कश्मीर से अपनी सेना और घुसपैठियों को वापस बुलाना होगा। भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने कभी भी इस शर्त का पालन नहीं किया और इसके उलट वह लगातार सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ को बढ़ावा देता रहा है।
भारत ने यह भी दोहराया कि कश्मीर में जनमत संग्रह का सवाल अब पूरी तरह बेमतलब हो चुका है। भारत का तर्क है कि जम्मू और कश्मीर के लोगों ने समय-समय पर लोकतांत्रिक चुनावों में बड़े पैमाने पर भाग लेकर और अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी है। पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक,कश्मीर के लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं और अपने भविष्य को भारत के संविधान के तहत सुरक्षित मानते हैं।
पाकिस्तान के प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने न केवल कश्मीर का मुद्दा उठाया,बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के विस्तार का भी विरोध दोहराया। यह कोई नई बात नहीं है,क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से इस मुद्दे पर भारत का विरोध करता रहा है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान का यह विरोध किसी सिद्धांत या वैश्विक संतुलन की चिंता से नहीं,बल्कि केवल भारत के प्रति उसकी दुश्मनी से प्रेरित है।
भारत ने यह भी रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य,खासकर अफ्रीकी देश,पाकिस्तान के इस रुख से सहमत नहीं हैं। कई देश यह मानते हैं कि सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता का विस्तार आज के वैश्विक यथार्थ को दर्शाने के लिए जरूरी है। दुनिया की जनसंख्या,आर्थिक शक्ति और वैश्विक शांति में योगदान को देखते हुए भारत की दावेदारी को व्यापक समर्थन मिल रहा है,जबकि पाकिस्तान का विरोध उसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करता जा रहा है।
भारत के जवाब में यह संदेश भी साफ झलकता है कि नई दिल्ली अब पाकिस्तान के आरोपों को नजरअंदाज करने के बजाय हर मंच पर तथ्यों और तर्कों के साथ जवाब देने की रणनीति अपना रही है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे झूठ और दुष्प्रचार को चुनौती देना जरूरी है,ताकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने सच्चाई स्पष्ट रूप से रखी जा सके।
कश्मीर को लेकर भारत का रुख लगातार यही रहा है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है,जिसे भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के तहत सुलझाया जाना चाहिए। भारत ने कई बार यह भी कहा है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद और हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ता,तब तक किसी सार्थक बातचीत की संभावना नहीं बन सकती। इसके बावजूद पाकिस्तान हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठाकर इसे वैश्विक बनाने की कोशिश करता रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की इस सख्त प्रतिक्रिया को कूटनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह न केवल पाकिस्तान के दावों का जवाब है,बल्कि उन देशों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है,जो तथ्यों से परे जाकर किसी एकतरफा नैरेटिव से प्रभावित हो सकते हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जहाँ पाकिस्तान ने पुराने आरोपों को दोहराने की कोशिश की,वहीं भारत ने तथ्यों,अंतर्राष्ट्रीय कानून और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के आधार पर उसका करारा जवाब दिया। आने वाले समय में भी यह स्पष्ट है कि भारत संयुक्त राष्ट्र समेत हर वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के झूठे प्रचार का मजबूती से मुकाबला करता रहेगा।
