अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज(तस्वीर क्रेडिट@EricS2075)

संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप की गाजा योजना को ‘सर्वसम्मति’ का दावा,ईरान पर सख्त रुख के संकेत

वाशिंगटन,18 फरवरी (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सर्वसम्मति से समर्थन मिला है। उन्होंने इसे इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया और संकेत दिया कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ और अधिक कठोर रुख अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वाल्ट्ज ने यह बयान सलेम न्यूज चैनल पर ह्यूग हेविट को दिए एक इंटरव्यू में दिया।

वाल्ट्ज के अनुसार प्रस्ताव 13-0 के मत से पारित हुआ और इसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इजरायल-फिलिस्तीन का मुद्दा दशकों से सबसे विवादित विषयों में से एक रहा है,ऐसे में इस प्रकार का समर्थन एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मतदान में किन देशों ने भाग लिया और किन्होंने अनुपस्थिति या परहेज का रास्ता चुना,लेकिन उनके बयान ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

गाजा शांति योजना के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा बल की स्थापना का प्रस्ताव है,जो क्षेत्र में स्थिरता और युद्धविराम की निगरानी करेगा। इसके अलावा एक फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेटिक अथॉरिटी गठित करने का खाका तैयार किया गया है,जिसका उद्देश्य प्रशासनिक ढाँचे को राजनीतिक ध्रुवीकरण से अलग रखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से शासन चलाना है। योजना में विश्व बैंक के अंतर्गत एक विशेष कोष स्थापित करने का भी प्रावधान है,जिससे पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता कार्यों को वित्तीय सहयोग मिल सके।

वाल्ट्ज ने कहा कि इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से 8,000 सैनिक देने का वादा किया है और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक से पहले 5 अरब डॉलर की राशि की घोषणा की है। यह कदम इस पहल के लिए वैश्विक समर्थन का संकेत माना जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस ढाँचे के तहत बंधकों को रिहा किया जा चुका है,युद्धविराम लागू है और मानवीय सहायता प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँच रही है। अब वार्ता का दूसरा चरण हमास पर केंद्रित है। उन्होंने चेतावनी दी कि हमास को या तो स्वेच्छा से हथियार छोड़ने होंगे या फिर कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

वाल्ट्ज ने यह भी कहा कि पहले हमास के प्रति सहानुभूति रखने वाले देश जैसे कतर,तुर्की और मिस्र अब अमेरिका के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल भी इस पहल का हिस्सा है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। हालाँकि,इन देशों की ओर से इस दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन अमेरिकी राजदूत के बयान ने इस शांति प्रक्रिया की दिशा पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।

ईरान को लेकर वाल्ट्ज ने सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के ‘स्नैपबैक प्रतिबंध’ अभी भी प्रभावी हैं,भले ही रूस और चीन ने कुछ आपत्तियाँ जताई हों। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश ईरानी शासन के साथ व्यापार करेंगे,वे इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करेंगे और परिणाम भुगतेंगे। वाल्ट्ज के अनुसार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ईरान की अर्थव्यवस्था के 40 से 50 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है और प्रतिबंधों का असर शासन की आर्थिक स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

उन्होंने तथाकथित ‘घोस्ट फ्लीट’ पर भी टिप्पणी की,जिसके माध्यम से ईरान कथित रूप से प्रतिबंधों से बचते हुए तेल निर्यात करता है। वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के तहत ऐसे जहाजों को जब्त करने का अधिकार है,हालाँकि यह मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय कानून के संदर्भ में विवादित माना जाता है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठनों के माध्यम से सख्त कार्रवाई की वकालत की,ताकि प्रतिबंधों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

ईरान में हालिया अशांति पर बोलते हुए वाल्ट्ज ने संयुक्त राष्ट्र सत्र में प्रस्तुत आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 18 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने इसे शासन द्वारा अपने ही नागरिकों के खिलाफ व्यापक स्तर का दमन बताया। इस सत्र में प्रमुख ईरानी असंतुष्ट मसीह अलीनेजाद भी मौजूद थीं। वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका ईरानी जनता के मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के समर्थन में खड़ा है।

जब उनसे समयसीमा के बारे में पूछा गया,तो वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को स्पष्ट विकल्प दिया है। उनके अनुसार ईरान को यूरेनियम संवर्धन,लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और कथित आतंकी नेटवर्क के समर्थन को समाप्त करना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ईरान इन माँगों को नहीं मानता,तो अमेरिका और उसके सहयोगी आगे की कड़ी कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं।

माइक वाल्ट्ज के इन बयानों ने मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक कूटनीति में नई बहस को जन्म दिया है। जहाँ एक ओर गाजा शांति योजना को लेकर उनके दावे को ऐतिहासिक बताया जा रहा है,वहीं दूसरी ओर ईरान के खिलाफ सख्त रुख क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र और संबंधित देशों की प्रतिक्रियाएँ इस पहल की दिशा और प्रभाव को स्पष्ट करेंगी।