तेल अवीव,27 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और इजरायल ने गुरुवार को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के सीमा पार उपयोग को लेकर एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दूसरे और अंतिम दिन हुआ,जिसे दोनों देशों के बीच वित्तीय और तकनीकी सहयोग के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल के तहत यूपीआई को इजरायल के घरेलू पेमेंट फ्रेमवर्क से जोड़ा जाएगा,जिससे दोनों देशों के बीच डिजिटल लेनदेन अधिक तेज,सुरक्षित और किफायती बन सकेंगे।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने खुशी जताते हुए कहा कि इजरायल में यूपीआई के उपयोग के लिए सहमति बनना दोनों देशों के लिए एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस साझेदारी से कारोबारियों,स्टार्ट-अप्स और आम नागरिकों को सरल सीमा पार भुगतान की सुविधा मिलेगी। इससे न केवल लेनदेन की लागत घटेगी बल्कि भुगतान निपटान का समय भी कम होगा,जो वैश्विक व्यापार और निवेश को गति देने में सहायक सिद्ध होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की वैश्विक स्वीकार्यता को और मजबूत करेगा। यूपीआई पहले ही दुनिया के कई देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। वर्तमान में इसका उपयोग संयुक्त अरब अमीरात,सिंगापुर,भूटान,नेपाल,श्रीलंका,फ्रांस,मॉरीशस और कतर जैसे देशों में हो रहा है। इजरायल के साथ यह नई पहल पश्चिम एशिया क्षेत्र में भारत की डिजिटल कूटनीति को और सुदृढ़ करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर यह भी कहा कि भारत और इजरायल ने ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पार्टनरशिप’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस साझेदारी के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता,क्वांटम टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल भुगतान से आगे बढ़कर दोनों देश नागरिक परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाएँगे। साथ ही भविष्य के लिए तैयार कृषि समाधान विकसित करने और उत्कृष्ट गाँवों के निर्माण पर भी मिलकर काम किया जाएगा।
यूपीआई की सफलता का आधार इसकी सरलता और त्वरित भुगतान क्षमता है। भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार,यूपीआई देश में भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बनकर उभरा है। कुल डिजिटल और नकद भुगतान लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी 57 प्रतिशत तक पहुँच गई है,जो नकद लेनदेन के 38 प्रतिशत से आगे है। यह बदलाव दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ता तेजी से डिजिटल माध्यमों को अपना रहे हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि 65 प्रतिशत से अधिक यूपीआई उपयोगकर्ता प्रतिदिन कई बार इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े कारोबारी समूहों तक,यूपीआई ने भुगतान प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। इसकी ‘सार्वजनिक और अंतरसंचालनीय’ प्रकृति ने इसे निजी नेटवर्क आधारित प्रणालियों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित किया है। यही कारण है कि इसे वैश्विक स्तर पर एक सफल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
इजरायल के साथ यह समझौता ऐसे समय में हुआ है,जब दोनों देश तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। इजरायल अपनी उन्नत तकनीकी क्षमताओं और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के लिए जाना जाता है,जबकि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ऐसे में यूपीआई को इजरायली भुगतान प्रणाली से जोड़ना दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुँचा सकता है।
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि सीमा पार भुगतान को आसान बनाना वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पारंपरिक अंतर्राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों में अक्सर अधिक शुल्क और लंबा निपटान समय लगता है। यूपीआई आधारित व्यवस्था इन चुनौतियों को कम कर सकती है और छोटे एवं मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर खोल सकती है। इससे पर्यटन,शिक्षा,स्टार्ट-अप निवेश और सेवा क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
भारत और इजरायल के बीच हुआ यह समझौता डिजिटल सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। यह न केवल द्विपक्षीय व्यापार को सशक्त करेगा,बल्कि वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं को वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है और यूपीआई इस दिशा में एक प्रभावी सेतु बनकर उभर रहा है।
