किरेन रिजिजू

स्पीकर के चैंबर में हंगामे का आरोप: किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर गाली-गलौज और धमकी देने का लगाया आरोप

नई दिल्ली,नई दिल्ली,12 फरवरी (युआईटीवी)- संसद के भीतर सियासी टकराव एक बार फिर तीखा हो गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि पार्टी के 20 से 25 सांसद जबरन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में घुस गए,जहाँ उन्होंने गाली-गलौज की और प्रधानमंत्री को लेकर धमकी भरे शब्द कहे। रिजिजू के इन आरोपों के बाद संसद की कार्यवाही और राजनीतिक माहौल दोनों में गर्मी बढ़ गई है।

केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के कई सांसद बिना अनुमति स्पीकर के चैंबर में दाखिल हुए और वहाँ अनुशासनहीन व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी में यह घटना हुई। रिजिजू के अनुसार,कांग्रेस सांसदों ने न केवल स्पीकर के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया,बल्कि यह भी कहा कि जब प्रधानमंत्री सदन में बोलने आएँगे,तो वे देख लेंगे कि वे क्या करते हैं। उन्होंने इसे संसद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस तरह का आचरण लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

रिजिजू ने दावा किया कि यह पूरी घटना संसद परिसर के भीतर हुई और इसकी रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए कहा कि यह वीडियो कांग्रेस के ही एक सांसद द्वारा गैर-कानूनी तरीके से रिकॉर्ड किया गया था। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह क्लिप उस समय बनाई गई,जब कांग्रेस के सदस्य स्पीकर के चैंबर में घुसे और वहाँ गाली-गलौज तथा धमकी दी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बहस और चर्चा में विश्वास करती है और कभी भी सांसदों को हिंसक या आक्रामक व्यवहार के लिए प्रोत्साहित नहीं करती।

केंद्रीय मंत्री ने अपने वीडियो संदेश में राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें राहुल गांधी से किसी सुधार की उम्मीद नहीं है,लेकिन चूँकि वे नेता प्रतिपक्ष हैं,इसलिए यह अपेक्षा की जाती है कि वे सदन की मर्यादा बनाए रखने में भूमिका निभाएँ। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस की सोच बिखर चुकी है और विपक्ष का दायित्व निभाने के बजाय वह व्यवधान पैदा करने की राजनीति कर रही है।

रिजिजू ने संसद के अंदर हुई एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया,जिसमें कांग्रेस की महिला सांसदों द्वारा प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी तक पहुँचने का दावा किया गया। उन्होंने कहा कि एनडीए सांसदों ने संयम बरता,अन्यथा स्थिति और बिगड़ सकती थी। उनके मुताबिक,यदि एनडीए सांसदों को खुली छूट दी जाती,तो संसद में हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते थे। उन्होंने इसे एनडीए की सहनशीलता और अनुशासन का उदाहरण बताया।

इन आरोपों के बाद कांग्रेस की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है,हालाँकि पार्टी पहले भी सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाती रही है। हाल के सत्रों में कई मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली है। विपक्ष का आरोप है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए सरकार विपक्ष को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं देती,जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर हंगामा कर संसद की कार्यवाही बाधित करता है।

संसद में बढ़ते टकराव के बीच स्पीकर की भूमिका भी चर्चा में है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला कई बार सभी दलों से संयम और शालीनता बनाए रखने की अपील कर चुके हैं। संसदीय परंपराओं के तहत स्पीकर का चैंबर अत्यंत मर्यादित और औपचारिक स्थान माना जाता है,जहाँ बिना अनुमति प्रवेश को गंभीरता से देखा जाता है। ऐसे में यदि रिजिजू के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह संसदीय आचरण के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल और विभिन्न नीतिगत मुद्दों पर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण संसद के भीतर टकराव और तेज हो सकता है। ऐसे समय में सभी दलों से अपेक्षा की जाती है कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और संसदीय मर्यादा को प्राथमिकता दें।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर में प्रवेश कर चुका है। यदि वीडियो और अन्य साक्ष्य सार्वजनिक होते हैं,तो विवाद और गहराने की संभावना है। संसद सत्र के दौरान हुई इस कथित घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लोकतांत्रिक विमर्श की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों को किस तरह का आचरण अपनाना चाहिए।