अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Arya909050)

अमेरिकी अदालतों पर ट्रंप का बड़ा आरोप,न्यायपालिका को बताया ‘अत्यधिक राजनीतिक’,फेडरल रिजर्व प्रमुख जेरोम पॉवेल पर भी साधा निशाना

वाशिंगटन,16 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव का मुद्दा चर्चा में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अदालतों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश की न्यायिक व्यवस्था जरूरत से ज्यादा राजनीतिक हो चुकी है और कई मामलों में फैसले कानून के आधार पर नहीं,बल्कि जजों की सोच और राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रभावित दिखाई देते हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि अदालतें अक्सर उनके और उनकी पार्टी के नेताओं के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार करती हैं,जिससे न्यायिक प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका की न्यायपालिका को निष्पक्ष और स्वतंत्र होना चाहिए,लेकिन हाल के वर्षों में कई मामलों में ऐसा प्रतीत होता है कि अदालतें राजनीतिक प्रभाव से मुक्त नहीं रह पाई हैं। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन नेताओं और उनके समर्थकों से जुड़े मामलों में कई बार अदालतों का रवैया अनुचित और असंतुलित रहा है। ट्रंप के अनुसार कुछ फैसलों से ऐसा लगता है कि न्यायिक प्रक्रिया में कानून की व्याख्या से अधिक जजों की व्यक्तिगत सोच प्रभाव डाल रही है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि कई बार अदालतें ऐसे लोगों को भी संरक्षण देती दिखाई देती हैं,जिन्हें कानून के तहत संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह की स्थिति न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता को कमजोर करती है और आम नागरिकों का न्यायपालिका पर विश्वास प्रभावित हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालतों को किसी भी प्रकार के राजनीतिक एजेंडे से दूर रहकर केवल कानून और संविधान के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

अपने बयान में ट्रंप ने विशेष रूप से अमेरिकी न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बोसबर्ग उनके और रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े मामलों में लंबे समय से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायपालिका की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं और न्याय प्रणाली की साख बनाए रखने के लिए जरूरी है कि इस प्रकार के आरोपों की जाँच की जाए।

ट्रंप ने जज बोसबर्ग पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे “ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम” यानी टीडीएस के सबसे ऊँचे स्तर से प्रभावित हैं। इस शब्द का इस्तेमाल ट्रंप समर्थकों द्वारा उन लोगों के लिए किया जाता है,जो उनके प्रति अत्यधिक आलोचनात्मक रवैया रखते हैं। ट्रंप का आरोप है कि जज बोसबर्ग वर्षों से उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करने की कोशिश करते रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, “उन्होंने मुझे बुरी तरह और गलत तरीके से दोषी ठहराया। डी.सी. सर्किट ने बिना किसी जुर्म के बेगुनाह रिपब्लिकन की गिरफ्तारी और मुझे सजा देने का जोरदार समर्थन किया।” ट्रंप के अनुसार इस तरह की कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है और इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि वही न्यायाधीश अब एक महत्वपूर्ण आर्थिक मामले की जाँच को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व से जुड़े वित्तीय मामलों की सामान्य जाँच को भी रोका जा रहा है,जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। ट्रंप ने इस मामले में व्यापक जाँच की माँग की है और कहा है कि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

इस पूरे विवाद के दौरान ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पॉवेल के नेतृत्व में वॉशिंगटन डीसी स्थित फेडरल रिजर्व कॉम्प्लेक्स के नवीनीकरण परियोजना में बजट से कहीं अधिक खर्च किया गया है और परियोजना तय समय से काफी पीछे चल रही है।

ट्रंप के अनुसार यह परियोजना अपेक्षाकृत छोटी थी,लेकिन इसे पूरा करने में कई साल लग गए हैं और लागत भी अपेक्षा से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी परियोजना में इस तरह का बजट बढ़ना स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस मामले में पारदर्शी जाँच जरूरी है,ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अतिरिक्त खर्च क्यों हुआ और परियोजना में देरी के पीछे कौन जिम्मेदार है।

राष्ट्रपति ने माँग की कि इस मामले में परियोजना से जुड़े ठेकेदारों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आती है,तो उसके लिए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने पहले भी जेरोम पॉवेल के कार्यकाल के दौरान कई मुद्दों पर उनकी नीतियों और कामकाज की आलोचना की है।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि सरकारी संस्थाओं को पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। उनके अनुसार जब सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किया जाता है,तो यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि परियोजनाएँ समय पर और निर्धारित बजट के भीतर पूरी हों।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने न्यायपालिका को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अदालतों को केवल कानून और न्याय के सिद्धांतों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का सबसे बड़ा दायित्व निष्पक्षता बनाए रखना है। यदि अदालतें राजनीतिक प्रभाव में काम करती हुई दिखाई देती हैं,तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर हो सकती है।

ट्रंप ने आगे कहा कि जज जेम्स बोसबर्ग को अमेरिकी राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेताओं से जुड़े सभी मामलों से हटाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है। उन्होंने यह भी माँग की कि बोसबर्ग के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी न्यायिक प्रणाली को मजबूत और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि किसी भी प्रकार के पक्षपात या भ्रष्टाचार के आरोपों की गंभीरता से जाँच की जाए। उन्होंने कहा कि अतीत में भी कई जजों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है और यदि किसी न्यायाधीश पर गंभीर आरोप साबित होते हैं,तो उनके खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए।

ट्रंप के इन बयानों के बाद अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है,जबकि अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक आलोचना से संस्थागत संतुलन पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप द्वारा लगाए गए आरोपों पर न्यायपालिका या अन्य सरकारी संस्थाओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या इन मामलों में किसी प्रकार की औपचारिक जाँच शुरू होती है।