वाशिंगटन,6 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। व्हाइट हाउस ने अमेरिका–क्यूबा बातचीत को लेकर क्यूबा की ओर से जताई गई आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीति के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसके साथ ही व्हाइट हाउस ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच बातचीत के चैनल पहले ही सक्रिय हो चुके हैं,भले ही क्यूबा की सरकार इस दावे से सार्वजनिक रूप से असहमत दिखाई दे रही हो।
व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह मुद्दा उस समय उठा,जब एक पत्रकार ने क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल की हालिया टिप्पणियों का हवाला दिया। डियाज-कैनेल ने कहा था कि क्यूबा अमेरिका के साथ केवल उसी स्थिति में बातचीत करेगा,जब वह “बिना किसी दबाव, बिना किसी शर्त,बराबरी के आधार पर और क्यूबा की संप्रभुता के पूर्ण सम्मान के साथ” हो। क्यूबा के नेता ने यह भी स्पष्ट किया था कि उनकी सरकार ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत पहले से चल रही है।
इस सवाल पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने क्यूबा सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि हवाना को अपने बयानों में अधिक सतर्कता और समझदारी दिखानी चाहिए। लेविट ने कहा, “मुझे लगता है कि क्यूबा सरकार अपने आखिरी पड़ाव पर है और उसका देश गिरने की कगार पर है,इसलिए उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति के बारे में बयान देते समय समझदारी दिखानी चाहिए।” उनके इस बयान को क्यूबा के आंतरिक हालात और वहाँ की आर्थिक-राजनीतिक स्थिति पर एक सीधा हमला माना जा रहा है।
हालाँकि,कड़े शब्दों के बावजूद लेविट ने राष्ट्रपति ट्रंप के कूटनीतिक रुख को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि ट्रंप हमेशा बातचीत और कूटनीति के लिए तैयार रहते हैं। लेविट के अनुसार, “जैसा कि मैंने अभी दोहराया,राष्ट्रपति हमेशा कूटनीति में शामिल होने को तैयार रहते हैं।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत वास्तव में हो रही है और यह क्यूबा सरकार के साथ चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है। हालाँकि,उन्होंने न तो बातचीत के किसी विशेष चैनल का खुलासा किया और न ही यह बताया कि एजेंडे में किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
लेविट ने क्यूबा के राष्ट्रपति की “कोई शर्त नहीं” वाली माँग पर भी कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने केवल इतना कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीति का समर्थन करते हैं और संवाद को एक संभावित रास्ता मानते हैं। इस अस्पष्टता ने अटकलों को और हवा दे दी है कि पर्दे के पीछे किस स्तर पर और किस विषय पर संपर्क हो रहा है।
यह पूरा संवाद एक व्यापक व्हाइट हाउस ब्रीफिंग के दौरान हुआ,जिसमें अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जा रही थी। इसी संदर्भ में अमेरिका–क्यूबा संबंधों का जिक्र सामने आया,जिसने एक बार फिर दोनों देशों के बीच रिश्तों की जटिलता को उजागर कर दिया।
अमेरिका और क्यूबा के संबंध दशकों से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। शीत युद्ध के दौर से ही दोनों देशों के बीच वैचारिक टकराव और राजनीतिक विरोध बना रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने क्यूबा की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावित किया है। हालाँकि,2010 के दशक के मध्य में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन के दौरान दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध बहाल किए थे। इसके तहत दूतावास फिर से खोले गए और सीमित स्तर पर सहयोग भी शुरू हुआ।
इसके बावजूद कई प्रतिबंध आज भी लागू हैं और अलग-अलग अमेरिकी प्रशासनों के साथ नीति में बदलाव आता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में क्यूबा नीति को फिर से सख्त किया गया था,जिससे द्विपक्षीय रिश्तों में ठंडापन आ गया। अब एक बार फिर बातचीत के संकेत सामने आना यह दर्शाता है कि दोनों देश पूरी तरह से संवाद के दरवाजे बंद नहीं करना चाहते।
क्यूबा इस समय गंभीर आर्थिक संकट,राजनीतिक दबाव और बड़े पैमाने पर प्रवासन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। इन परिस्थितियों ने अमेरिका और क्यूबा के बीच सीमित सहयोग और संवाद को बार-बार प्रभावित किया है,खासकर प्रवासन समन्वय और मानवीय मुद्दों को लेकर। विश्लेषकों का मानना है कि इन्हीं व्यावहारिक जरूरतों के चलते दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे संपर्क बना रह सकता है,भले ही सार्वजनिक मंच पर बयानबाजी सख्त हो।
व्हाइट हाउस के हालिया बयान यह संकेत देते हैं कि अमेरिका क्यूबा के साथ संवाद का विकल्प खुला रखना चाहता है,लेकिन अपनी शर्तों और राजनीतिक संदेशों के साथ। वहीं क्यूबा बराबरी और संप्रभुता के सम्मान की बात पर अड़ा हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कथित बातचीत किसी ठोस कूटनीतिक पहल का रूप लेती है या फिर यह भी अमेरिका–क्यूबा संबंधों के लंबे और जटिल इतिहास का एक और अध्याय बनकर रह जाती है।
