जिनेवा,27 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी परमाणु वार्ता पर गुरुवार को अस्थायी विराम लग गया। इस ब्रेक की जानकारी ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि जिनेवा में सुबह शुरू हुई यूएस-ईरान न्यूक्लियर वार्ता को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है और दोनों पक्षों के वार्ताकार ब्रेक पर चले गए हैं। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत दोबारा शुरू की जाएगी और प्रगति की उम्मीद बरकरार है।
ओमान की मध्यस्थता में हो रही यह अप्रत्यक्ष बातचीत स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में आयोजित की गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और दशकों में सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य तैयारियों के बीच इस वार्ता को संभावित टकराव टालने की अहम कूटनीतिक कोशिश माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी तरह की चूक बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।
ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की कड़ी के रूप में भूमिका निभाता रहा है। विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने अपने संदेश में कहा कि जिनेवा में रचनात्मक और सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान हुआ है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने नए और व्यावहारिक समाधानों में रुचि दिखाई है। यह संकेत देता है कि प्रारंभिक चरण में ही वार्ता पूरी तरह गतिरोध में नहीं फँसी है,बल्कि आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया हुआ है। ट्रंप प्रशासन की ओर से तेहरान को परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए 15 दिन का समय दिए जाने की खबर सामने आई थी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। अमेरिकी नेतृत्व ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ईरान की ओर से भी बातचीत से पहले अपना पक्ष स्पष्ट किया गया। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक का परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। पेजेशकियान के इस बयान को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए भरोसा दिलाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इसी बीच यह भी खबर है कि संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख राफेल ग्रॉसी जिनेवा में हो रही बातचीत में शामिल हो सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की भूमिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी में महत्वपूर्ण रही है। यदि ग्रॉसी वार्ता में शामिल होते हैं तो इससे तकनीकी और सत्यापन संबंधी मुद्दों पर ठोस चर्चा की संभावना बढ़ सकती है।
हालाँकि,बातचीत के एजेंडे को लेकर मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं। ईरान का कहना है कि वार्ता केवल उसके परमाणु कार्यक्रम तक सीमित है,जबकि अमेरिका चाहता है कि तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्र में सक्रिय समूहों,विशेषकर हूती विद्रोहियों, को मिलने वाले समर्थन पर भी चर्चा हो। यही मुद्दे पिछले दौर की वार्ताओं में भी प्रमुख बाधा बने थे।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान को “रेड लाइन” पार नहीं करने देगा। उन्होंने दोहराया कि ईरान जैसे देश को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वेंस के इस बयान से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन वार्ता के साथ-साथ दबाव की नीति भी जारी रखे हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिनेवा में जारी यह कूटनीतिक प्रयास क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद अहम है। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो यह मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है। वहीं,यदि वार्ता विफल रहती है तो सैन्य टकराव का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल,वार्ता पर लगा यह अस्थायी विराम एक रणनीतिक ब्रेक माना जा रहा है,जिससे दोनों पक्ष अपने-अपने रुख की समीक्षा कर सकें। ओमान की मध्यस्थता और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि जब बातचीत फिर शुरू होगी तो क्या कोई ठोस प्रगति सामने आएगी या फिर मतभेद और गहरे होंगे। दुनिया की निगाहें जिनेवा पर टिकी हैं,जहाँ कूटनीति और शक्ति संतुलन के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश जारी है।
