वाशिंगटन,31 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर अमेरिका के नेतृत्व में चल रही एक नई पहल की खुलकर तारीफ करते हुए इसे बड़ी सफलता बताया है। ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से तेल निर्यात को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया बहुत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है और जल्द ही इसके ठोस नतीजे सामने आने की उम्मीद है। उनके मुताबिक,यह पूरी व्यवस्था वाशिंगटन के समर्थन से तैयार की गई है और इसमें अमेरिका एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। ट्रंप के इस बयान ने न सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा की है,बल्कि अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी एक नई बहस छेड़ दी है।
मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वेनेजुएला की स्थिति में नेतृत्व बहुत अच्छा काम कर रहा है। हम इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों के साथ बहुत अच्छे से तालमेल बना रहे हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में दुनिया के कई देश वेनेजुएला का तेल खरीदना शुरू करेंगे और इस पहल की अगुवाई अमेरिका करेगा। ट्रंप ने कहा, “हम दुनिया के देशों को आमंत्रित कर रहे हैं। वे तेल लेना शुरू करने जा रहे हैं। हम इस पूरी योजना का नेतृत्व करेंगे और अब तक यह बहुत अच्छी तरह काम कर रही है।” हालाँकि,उन्होंने इस बात का कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया कि कौन-कौन से देश इस व्यवस्था का हिस्सा होंगे,तेल की कीमतें क्या होंगी या निर्यात की शुरुआत कब से होगी।
ट्रंप की ये टिप्पणियाँ एक व्यापक बैठक का हिस्सा थीं,जिसमें ईरान,यूक्रेन और अमेरिका की घरेलू नीतियों जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई,लेकिन वेनेजुएला को लेकर उनकी बातें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं,क्योंकि यह देश लंबे समय से आर्थिक संकट,राजनीतिक अस्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहा है। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में से एक है,इसके बावजूद बीते एक दशक में उसकी तेल उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट आई है। विशेषज्ञों के अनुसार,इसकी प्रमुख वजहें जर्जर होता बुनियादी ढाँचा,निवेश की कमी,तकनीकी समस्याएँ और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंध रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन की ओर से वेनेजुएला तेल निर्यात को लेकर दिखाई जा रही सक्रियता को कई लोग वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। अमेरिका लंबे समय तक वेनेजुएला की सरकार,खासकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए था। अब अगर अमेरिका की अगुवाई में वेनेजुएला के तेल को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दोबारा जगह मिलती है,तो इसका असर तेल की वैश्विक आपूर्ति,कीमतों और भू-राजनीतिक संतुलन पर भी पड़ सकता है।
हालाँकि,ट्रंप के इन दावों के बीच अमेरिका की घरेलू राजनीति में विवाद भी तेज हो गया है। हाउस ओवरसाइट और गवर्नमेंट रिफॉर्म कमेटी के डेमोक्रेट सदस्यों ने शुक्रवार को तेल व्यापार से जुड़ी बड़ी कंपनियों विटोल और ट्रैफिगुरा से जवाब माँगा है। कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसद और कैलिफोर्निया से प्रतिनिधि रॉबर्ट गार्सिया ने इन कंपनियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गार्सिया ने एक पत्र के जरिए कहा है कि वेनेजुएला के एक शुरुआती तेल सौदे से,जिसकी कीमत करीब 500 मिलियन डॉलर बताई जा रही है,इन कंपनियों को भारी मुनाफा हो सकता है।
गार्सिया का कहना है कि इस पूरे मामले में संभावित हितों के टकराव की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि वित्तीय रिकॉर्ड के अनुसार,विटोल के वरिष्ठ ट्रेडर जॉन एडिसन ने पहले ट्रंप के चुनावी अभियान को लगभग 6 मिलियन डॉलर का चंदा दिया था। इस जानकारी के सामने आने के बाद डेमोक्रेट्स ने सवाल उठाया है कि क्या वेनेजुएला तेल से जुड़े फैसलों में निजी कारोबारी हितों को तरजीह दी जा रही है। गार्सिया ने अपने पत्र में लिखा, “ट्रंप प्रशासन के वेनेजुएला तेल से जुड़े संदिग्ध कारोबारी सौदे अब सामने आ रहे हैं और ओवरसाइट डेमोक्रेट्स के पास कई सवाल हैं।”
डेमोक्रेट सांसदों का आरोप है कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने पद का इस्तेमाल खुद को या अपने करीबी कारोबारी सहयोगियों को लाभ पहुँचाने के लिए कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक तरफ ट्रंप अमेरिकी जनता को यह संदेश दे रहे हैं कि वे वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए काम कर रहे हैं,वहीं दूसरी तरफ वेनेजुएला जैसे संकटग्रस्त देश के संसाधनों का शोषण किया जा रहा है। गार्सिया ने यहाँ तक कहा कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला के तेल उद्योग और उसकी आय पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
अपने पत्र में गार्सिया ने यह भी जिक्र किया कि जब ट्रंप ने एकतरफा फैसला लेते हुए अमेरिकी सेना को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए भेजने की बात कही थी,उसके बाद प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया था कि उसका लक्ष्य वेनेजुएला के तेल उद्योग पर पकड़ बनाना है। डेमोक्रेट्स का आरोप है कि इसके बाद व्हाइट हाउस ने तेल ड्रिलिंग और ट्रेडिंग से जुड़ी कंपनियों को बुलाकर वेनेजुएला तेल से जुड़े संभावित लाभदायक अवसरों की जानकारी दी।
हाउस ओवरसाइट कमेटी अब यह जानना चाहती है कि क्या इन कंपनियों को किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या कूटनीतिक कदमों की पहले से जानकारी दी गई थी। इसके अलावा कमेटी इस बात की भी जाँच करना चाहती है कि वेनेजुएला तेल से होने वाली कमाई को कैसे मैनेज किया जा रहा है और इसमें अमेरिकी प्रशासन की भूमिका क्या है। डेमोक्रेट सांसदों के अनुसार,अगर यह साबित होता है कि निजी कंपनियों को गोपनीय सरकारी जानकारी के आधार पर लाभ पहुँचाया गया,तो यह गंभीर नैतिक और कानूनी सवाल खड़े करेगा।
वहीं,ट्रंप प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ट्रंप ने अपने बयान में वेनेजुएला को लेकर अपनी पहल को एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता के तौर पर पेश किया और भरोसा जताया कि इससे हालात बेहतर होंगे। उनके समर्थकों का कहना है कि अगर वेनेजुएला का तेल दोबारा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आता है,तो इससे वैश्विक आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा,जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा।
दूसरी ओर,आलोचकों का तर्क है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता से दूर है और इसमें राजनीतिक,कारोबारी और रणनीतिक हित आपस में गड्डमड्ड होते नजर आ रहे हैं। वेनेजुएला के लिए भी यह स्थिति दोधारी तलवार जैसी है। एक तरफ तेल निर्यात बहाल होने से उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है,वहीं दूसरी तरफ यह आशंका भी है कि देश के संसाधनों पर बाहरी नियंत्रण बढ़ सकता है।
ट्रंप की वेनेजुएला नीति इस वक्त अंतर्राष्ट्रीय मंच और अमेरिकी संसद—दोनों जगहों पर कड़ी निगरानी में है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह पहल वास्तव में वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक सकारात्मक कदम साबित होती है या फिर यह अमेरिका की राजनीति में एक और बड़े विवाद का कारण बनती है।
