अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

वेनेज़ुएला के तेल से अमेरिका में सस्ती ऊर्जा का दावा,ट्रंप बोले—ईंधन के दाम गिरे,अर्थव्यवस्था को मिला सहारा

वाशिंगटन,14 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऊर्जा,अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अपनी नीतियों का बचाव करते हुए वेनेज़ुएला को लेकर किए गए हालिया कदमों को पूरी तरह सफल बताया है। डेट्रॉइट इकनॉमिक क्लब में दिए गए अपने भाषण में ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला से जुड़े फैसलों की वजह से अमेरिका में ईंधन की कीमतों में गिरावट आ रही है और इससे आर्थिक विकास को सीधा सहारा मिल रहा है। ट्रंप के मुताबिक,बढ़ती ऊर्जा आपूर्ति ने न सिर्फ पेट्रोल और गैसोलीन के दाम घटाए हैं,बल्कि महँगाई के दबाव को भी कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

अपने भाषण में ट्रंप ने वेनेज़ुएला को लेकर अमेरिका की कार्रवाई को निर्णायक और असरदार करार दिया। उन्होंने कहा कि हाल में जो कदम उठाए गए हैं,उनसे ऊर्जा बाजार में सप्लाई बढ़ी है और इसके सकारात्मक नतीजे अब आम अमेरिकी उपभोक्ता तक पहुँच रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि वेनेज़ुएला के पास मौजूद विशाल तेल भंडारों का इस्तेमाल कर अमेरिका ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को मजबूत किया है। उन्होंने कहा, “उनके पास 50 मिलियन बैरल तेल है। इसे ले लो,यह करीब 5 बिलियन डॉलर का है और हमने ले लिया।” ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर अमेरिका की आक्रामक ऊर्जा नीति और वैश्विक तेल राजनीति पर बहस तेज कर दी है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने विस्तार से बताया कि वेनेज़ुएला से आने वाले तेल को रिफाइनिंग के लिए यूनाइटेड स्टेट्स लाया जा रहा है। उनके मुताबिक,इस प्रक्रिया से घरेलू स्तर पर गैसोलीन की कीमतें कम करने में सीधी मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि तेल को अमेरिका तक लाने के लिए दर्जनों बड़े जहाजों की जरूरत होती है और दुनिया के सबसे बड़े टैंकर एक बार में करीब एक मिलियन बैरल तेल ले जा सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि 50 मिलियन बैरल तेल को बाहर निकालने के लिए दुनिया के करीब 50 सबसे बड़े जहाजों की जरूरत पड़ेगी,जो इस ऑपरेशन के पैमाने को दिखाता है।

ट्रंप ने सीधे तौर पर कहा कि वेनेज़ुएला से आए तेल की वजह से अमेरिका में ईंधन के दाम गिर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस महीने की शुरुआत में हुई “सफल कार्रवाई” के बाद पेट्रोल की कीमतें और नीचे जाएँगी। ट्रंप के अनुसार,कई अमेरिकी राज्यों में पेट्रोल की कीमतें ढाई डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ चुकी हैं और कुछ जगहों पर यह दो डॉलर प्रति गैलन से भी कम हो गई हैं। उन्होंने इसे आम लोगों के लिए बड़ी राहत बताते हुए कहा कि सस्ती ऊर्जा का असर पूरे आर्थिक तंत्र पर पड़ता है।

अपने चुटीले अंदाज में ट्रंप ने समझाया कि कम गैसोलीन कीमतें किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी को सस्ता बनाती हैं। उन्होंने कहा, “जब गैसोलीन 1.99 डॉलर प्रति गैलन हो जाता है,तो सब कुछ नीचे आ जाता है। डोनट्स की कीमतें कम हो जाती हैं। डोनट्स पहुँचाने वाले ट्रक की लागत भी कम हो जाती है।” ट्रंप का तर्क था कि परिवहन लागत घटने से सामान सस्ता होता है और अंततः इसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलता है। उन्होंने इसे महँगाई से लड़ने का सबसे असरदार तरीका बताया।

ट्रंप ने इस दौरान पिछली सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर पिछली सरकार चुनाव जीत जाती,तो अमेरिका की हालत और ज्यादा खराब हो जाती। ट्रंप के मुताबिक,पहले की नीतियों ने ऊर्जा क्षेत्र को कमजोर किया,जिससे ईंधन के दाम बढ़े और आम लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हालात को पलट दिया है और अब अमेरिका ऊर्जा के मोर्चे पर कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अब उनकी सरकार वेनेज़ुएला के साथ मिलकर काम कर रही है और वह खुद वेनेज़ुएला के समर्थक हैं।

अपने बयान में ट्रंप ने वेनेज़ुएला को लेकर एक और विवादास्पद टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वेनेज़ुएला से अमेरिका के नाराज़ होने का एक कारण यह भी था कि वहाँ की जेलों को लगभग पूरी तरह खाली करके कैदियों को अमेरिका भेज दिया गया। हालाँकि,उन्होंने इस मुद्दे पर ज्यादा विस्तार से बात नहीं की,लेकिन यह बयान दोनों देशों के बीच जटिल रिश्तों की ओर इशारा करता है। ट्रंप के अनुसार,इन तमाम पहलुओं के बावजूद अब अमेरिका वेनेज़ुएला के साथ काम करेगा और उस देश को फिर से मजबूत बनाने में मदद करेगा।

वेनेज़ुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े साबित तेल भंडारों में से एक है,लेकिन पिछले कई वर्षों से वहाँ का तेल उत्पादन लगातार गिरता रहा है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध,खराब बुनियादी ढाँचा,निवेश की कमी और राजनीतिक अस्थिरता ने देश की ऊर्जा क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन कारणों से वेनेज़ुएला अपनी पूरी तेल क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाया,जबकि वैश्विक बाजार में उसकी भूमिका कभी बेहद अहम हुआ करती थी। अमेरिका की नीति में किसी भी तरह का बदलाव हमेशा से वैश्विक तेल बाजार पर असर डालता रहा है और वेनेज़ुएला के मामले में यह प्रभाव और भी ज्यादा संवेदनशील माना जाता है।

अमेरिका में ऊर्जा की कीमतें लंबे समय से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही हैं। महामारी के बाद जब वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई और माँग बढ़ी,तब पेट्रोल और गैस के दाम तेजी से ऊपर गए थे। इससे आम लोगों की जेब पर भारी असर पड़ा और राजनीतिक बहस तेज हो गई। ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि चाहे देश के भीतर उत्पादन बढ़ाना हो या विदेश से आपूर्ति लानी हो,तेल और गैस की सप्लाई बढ़ाए बिना महँगाई को काबू में करना और आर्थिक विकास बनाए रखना संभव नहीं है।

ट्रंप का यह भी मानना है कि सस्ती ऊर्जा सिर्फ उपभोक्ताओं के लिए ही नहीं,बल्कि उद्योगों और व्यापार के लिए भी जरूरी है। कम ऊर्जा लागत से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत मिलती है,नौकरियाँ पैदा होती हैं और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। उन्होंने कहा कि उनकी ऊर्जा नीति का मकसद अमेरिका को आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति दिलाना है। वेनेज़ुएला से तेल आपूर्ति को उन्होंने इसी रणनीति का हिस्सा बताया।

हालाँकि,ट्रंप के दावों और बयानों पर सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि वेनेज़ुएला जैसे देश के साथ तेल को लेकर सहयोग राजनीतिक और नैतिक दृष्टि से जटिल है। इसके अलावा,तेल बाजार में कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारक होते हैं,जिनमें माँग,आपूर्ति,भू-राजनीतिक तनाव और निवेशक भावना शामिल हैं। फिर भी ट्रंप इसे अपनी नीतियों की सीधी सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं।

डेट्रॉइट इकनॉमिक क्लब में दिया गया ट्रंप का भाषण यह साफ करता है कि ऊर्जा नीति उनके राजनीतिक एजेंडे का केंद्र बनी हुई है। वेनेज़ुएला से तेल आपूर्ति को लेकर किए गए दावों के जरिए ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार ने ईंधन की कीमतों पर काबू पा लिया है और इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वैश्विक तेल बाजार और घरेलू अर्थव्यवस्था पर इन नीतियों का असर कितना स्थायी साबित होता है।