नई दिल्ली,20 अगस्त (युआईटीवी)- नई दिल्ली में बुधवार को उपराष्ट्रपति चुनाव का माहौल उस समय और गर्म हो गया,जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने औपचारिक रूप से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन दाखिल करने के इस अहम मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके साथ मौजूद थे और उन्होंने खुद पहले सेट के प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर करके अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी निभाई। प्रधानमंत्री के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्र सरकार के अन्य शीर्ष मंत्री और एनडीए के सहयोगी दलों के नेता भी एकजुट होकर उपस्थित हुए। इस दौरान दिखाई गई राजनीतिक एकता ने स्पष्ट संदेश दिया कि एनडीए आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर न सिर्फ गंभीर है बल्कि पूरी तरह आत्मविश्वास से भरा हुआ भी है।
नामांकन की प्रक्रिया में सी.पी. राधाकृष्णन ने कुल चार सेट नामांकन दाखिल किए,जिनमें प्रत्येक सेट पर 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों के हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले सेट पर हस्ताक्षर कर इसे जमा किया,जबकि अन्य सेटों पर गृह मंत्री अमित शाह,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सहयोगी दलों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए। यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता नहीं थी,बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक बनी कि एनडीए का शीर्ष नेतृत्व राधाकृष्णन के नाम पर पूरी तरह सहमत और प्रतिबद्ध है।
नामांकन दाखिल करने के दौरान एनडीए की एकजुटता का प्रदर्शन भी खास रहा। लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान,जनता दल (यूनाइटेड) के ललन सिंह,हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी और अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल जैसे सहयोगी दलों के नेता भी इस मौके पर मौजूद थे। इन नेताओं की मौजूदगी ने न सिर्फ राधाकृष्णन की उम्मीदवारी को मजबूती दी,बल्कि यह भी संकेत दिया कि गठबंधन के भीतर विभिन्न दलों में तालमेल और भरोसा बना हुआ है।
उपराष्ट्रपति चुनाव की पृष्ठभूमि में बात करें,तो यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद हो रहा है। धनखड़ ने 21 जुलाई को अचानक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सत्तापक्ष ने तत्काल राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सी.पी. राधाकृष्णन का नाम आगे बढ़ाया। राधाकृष्णन भारतीय जनता पार्टी के अनुभवी नेता हैं और उन्हें संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर मजबूत माना जाता है।
वहीं दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन “इंडिया” ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। रेड्डी न्यायपालिका से जुड़े हुए प्रतिष्ठित नाम रहे हैं और उन्हें विपक्ष ने अपने साझा उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाकर चुनाव को दिलचस्प बनाने की कोशिश की है। हालाँकि,संख्या बल की दृष्टि से स्थिति एनडीए के पक्ष में कहीं ज्यादा मजबूत दिखाई देती है।
संसदीय अंकगणित पर गौर करें,तो लोकसभा में कुल 543 सांसद हैं और राज्यसभा में 233 सदस्य वर्तमान में मौजूद हैं। भाजपा के पास अकेले लोकसभा में 240 सांसद और राज्यसभा में 102 सांसद हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों के समर्थन से एनडीए की ताकत लोकसभा में 298 और राज्यसभा में 128 तक पहुँचती है। इस तरह एनडीए के पास कुल मिलाकर 421 सांसदों का ठोस समर्थन है।
यही नहीं,आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। वाईएसआरसीपी के 11 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद राधाकृष्णन के समर्थन में कुल संख्या 433 हो जाती है। यह आँकड़ा स्पष्ट तौर पर विपक्ष की तुलना में कहीं अधिक है और चुनाव परिणाम की दिशा पहले से तय करता नजर आता है।
विपक्ष की ओर देखें तो “इंडिया” ब्लॉक के पास लोकसभा में 235 सांसद और राज्यसभा में 77 सांसद हैं। इनकी संयुक्त संख्या 312 बनती है। अगर आम आदमी पार्टी के 11 सांसद भी विपक्ष के साथ खड़े होते हैं,तो विपक्षी उम्मीदवार के समर्थन में कुल संख्या 325 तक पहुँच सकती है। इसके बावजूद एनडीए के मुकाबले यह आँकड़ा काफी कमजोर साबित होता है।
चुनावी समीकरणों को देखते हुए यह साफ है कि सी.पी. राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालाँकि,राजनीतिक पंडित यह भी मानते हैं कि इस चुनाव का महत्व केवल उपराष्ट्रपति पद तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके जरिए भविष्य के राजनीतिक संदेश भी दिए जाएँगे। भाजपा और एनडीए यह दिखाना चाहते हैं कि गठबंधन अब भी मजबूत है और विपक्ष के साझा उम्मीदवार का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है।
उधर,विपक्षी दलों का मानना है कि भले ही यह चुनाव संख्याबल की दृष्टि से उनके लिए कठिन हो,लेकिन यह लोकतंत्र में वैचारिक संघर्ष का प्रतीक है। विपक्ष ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे न केवल राजनीतिक बल्कि बौद्धिक और न्यायिक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सक्षम हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि उपराष्ट्रपति चुनाव एक औपचारिक प्रक्रिया भर नहीं है,बल्कि यह भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की रणनीतियों और ताकत के प्रदर्शन का भी मंच है। सी.पी. राधाकृष्णन का नामांकन दाखिल करना और एनडीए की एकजुटता दिखाना इस चुनाव को पहले ही दिलचस्प बना चुका है। अब 2025 का यह उपराष्ट्रपति चुनाव केवल परिणाम का इंतजार भर रह गया है,जिसका रुख एनडीए के पक्ष में भारी बहुमत के साथ झुकता नजर आ रहा है।
