विदेश सचिव विक्रम मिसरी,सर्जियो गोर और मार्को रुबियो की मुलाकात (तस्वीर क्रेडिट@USAmbIndia)

अमेरिका दौरे पर विक्रम मिस्री की अहम कूटनीतिक पहल,ऊर्जा, तकनीक और रक्षा सहयोग को मिला नया आयाम

वाशिंगटन,11 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में इस सप्ताह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल देखने को मिली,जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अमेरिका का दौरा किया और वहाँ कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की। इस तीन दिवसीय दौरे के दौरान ऊर्जा,उभरती तकनीक,रक्षा सहयोग और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ,जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ते तालमेल का स्पष्ट संकेत मिला।

वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के अनुसार,इस दौरे का प्रमुख फोकस ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को नई दिशा देना रहा। इस क्रम में विक्रम मिस्री ने अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और सुरक्षित बनाने,स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और नई परियोजनाओं के जरिए ऊर्जा साझेदारी को विस्तार देने पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस बैठक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारत में पारित ‘शांति बिल’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बाद सिविल न्यूक्लियर सहयोग के साथ-साथ कोल गैसीफिकेशन और अमेरिकी एलपीजी निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी काम करने की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और अधिक गहरा हो सकता है।

ऊर्जा के अलावा,इस दौरे के दौरान उभरती तकनीकों और सप्लाई चेन सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार,इस दौरान अवर सचिव विलियम किमिट और विक्रम मिस्री के बीच एक अहम बैठक हुई। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), महत्वपूर्ण तकनीकों और सुरक्षित सप्लाई चेन को लेकर सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई। साथ ही,अमेरिकी एआई तकनीक के निर्यात के अवसरों पर भी विचार-विमर्श हुआ,जो भविष्य में दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को नई ऊँचाई दे सकता है।

विक्रम मिस्री ने इस दौरे के दौरान व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नेतृत्व के साथ भी बातचीत की। इन बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग,समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारतीय दूतावास ने बताया कि इन वार्ताओं में साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के उपायों पर जोर दिया गया।

रक्षा सहयोग भी इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा। सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी और भारतीय सेनाएँ दोनों देशों के रक्षा संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने रक्षा उपकरणों की बिक्री और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर भी जोर दिया। यह संकेत देता है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास,तकनीकी सहयोग और रक्षा खरीद में वृद्धि हो सकती है।

दौरे के दौरान विक्रम मिस्री ने वाशिंगटन स्थित ‘इंडिया हाउस’ में आयोजित एक विशेष स्वागत समारोह में भी भाग लिया। इस कार्यक्रम की मेजबानी अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने की। इस अवसर पर मिस्री ने अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों,नीति निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख स्टेकहोल्डर्स से मुलाकात की। भारतीय दूतावास के अनुसार,इस कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मजबूत और जीवंत द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करना था।

इन सभी बैठकों और संवादों से यह स्पष्ट होता है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध केवल पारंपरिक कूटनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रह गए हैं,बल्कि अब यह एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं। पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय संपर्क और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग ने इस रिश्ते को और मजबूत किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच यह बढ़ता सहयोग वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों का मिलकर काम करना क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है। इसके अलावा,मजबूत सप्लाई चेन,नई तकनीकों का विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित हो सकता है।

विक्रम मिस्री का यह अमेरिका दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और सहयोग का प्रतीक है। ऊर्जा,तकनीक और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुई यह बातचीत आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों को और गहराई देने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। यह दौरा इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली और वाशिंगटन वैश्विक मंच पर एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।