डोनाल्ड ट्रम्प और एलन मस्क

युद्ध जैसे संवेदनशील समय में फर्जी एआई वीडियो पर सख्त हुआ एक्स,रेवेन्यू शेयरिंग नियमों में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली,5 मार्च (युआईटीवी)- एलॉन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने अपने क्रिएटर रेवेन्यू शेयरिंग प्रोग्राम में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि वह विशेष रूप से युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय तनाव जैसे संवेदनशील हालात में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बनाए गए भ्रामक वीडियो और सामग्री पर सख्त कार्रवाई करेगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है,जब अमेरिका,इजरायल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी तेजी से फैलने की चिंताएँ बढ़ रही हैं।

एक्स के प्रोडक्ट हेड निकिता बियर ने इस नीति परिवर्तन की जानकारी देते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि संकट और युद्ध जैसी स्थितियों में लोगों तक सही और भरोसेमंद जानकारी पहुँचे। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक के तेजी से विकास के कारण अब ऐसे वीडियो बनाना बेहद आसान हो गया है,जो देखने में बिल्कुल असली लगते हैं, लेकिन वास्तव में पूरी तरह फर्जी होते हैं। इस तरह की सामग्री लोगों को भ्रमित कर सकती है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव को और बढ़ा सकती है।

निकिता बियर के अनुसार,कंपनी ने हाल ही में एक ऐसे नेटवर्क का पता लगाया,जिसमें पाकिस्तान में एक व्यक्ति 31 अलग-अलग अकाउंट संचालित कर रहा था। इन अकाउंट्स के जरिए एआई से तैयार किए गए युद्ध से जुड़े वीडियो लगातार पोस्ट किए जा रहे थे। जाँच में पता चला कि इनमें से कई अकाउंट पहले किसी और के थे,जिन्हें हैक कर लिया गया था और बाद में उनके नाम व पहचान बदलकर भ्रामक सामग्री फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया। यह मामला सामने आने के बाद कंपनी ने अपनी नीतियों को और सख्त बनाने का फैसला किया।

नई नीति के तहत यदि कोई यूजर एआई से बनाए गए युद्ध या संघर्ष से जुड़े वीडियो पोस्ट करता है और यह स्पष्ट नहीं करता कि सामग्री एआई से तैयार की गई है,तो उसे एक्स के क्रिएटर रेवेन्यू शेयरिंग प्रोग्राम से 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि उस अवधि के दौरान वह यूजर अपने पोस्ट से होने वाली आय प्राप्त नहीं कर सकेगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई यूजर बार-बार इस नियम का उल्लंघन करता है,तो उसे स्थायी रूप से इस प्रोग्राम से बाहर किया जा सकता है।

कंपनी ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नया फीचर भी शुरू किया है। इसके तहत ऐसे पोस्ट जिनमें एआई से बनाई गई सामग्री शामिल होगी,उन पर “मेड विथ एआई” नाम का एक विशेष लेबल दिखाई देगा। इस लेबल का उद्देश्य यह बताना है कि पोस्ट में दिखाई जा रही सामग्री वास्तविक नहीं है,बल्कि कृत्रिम रूप से तैयार की गई है। एक्स का मानना है कि इस तरह के स्पष्ट संकेत से यूजर्स को सही संदर्भ मिलेगा और वे भ्रामक जानकारी का शिकार होने से बच सकेंगे।

सोशल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक के प्रसार के साथ ही डीपफेक और फर्जी वीडियो का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। खासतौर पर युद्ध,राजनीतिक संकट या अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष के दौरान इस तरह की सामग्री बेहद खतरनाक साबित हो सकती है,क्योंकि इससे जनमत प्रभावित हो सकता है और गलत सूचनाओं के आधार पर अफवाहें फैल सकती हैं। इसी वजह से दुनिया भर की तकनीकी कंपनियाँ एआई कंटेंट की पहचान और नियंत्रण के लिए नए नियम लागू कर रही हैं।

हाल के दिनों में मध्य पूर्व से जुड़ी घटनाओं के कारण वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा हुआ है। विशेष रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की कथित मौत से जुड़ी अफवाहों ने सोशल मीडिया पर हलचल पैदा कर दी थी। हालाँकि,इन खबरों की पुष्टि नहीं हुई,लेकिन इस तरह की अफवाहों ने यह दिखा दिया कि संकट के समय गलत जानकारी कितनी तेजी से फैल सकती है और इसका अंतर्राष्ट्रीय माहौल पर क्या असर पड़ सकता है।

इसी पृष्ठभूमि में एक्स ने यह कदम उठाया है,ताकि प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली सामग्री की विश्वसनीयता को बनाए रखा जा सके। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि एक्स को एक ऐसे मंच के रूप में देखा जाता है,जहाँ दुनिया भर के लोग ताजा खबरों और घटनाओं की जानकारी के लिए आते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद जानकारी अधिकतम हद तक सटीक और पारदर्शी हो।

एलॉन मस्क और निकिता बियर ने हाल ही में यह भी बताया कि वैश्विक तनाव और बड़ी अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं के दौरान एक्स पर ट्रैफिक अपने अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि लोग ताजा जानकारी और प्रत्यक्ष प्रतिक्रियाओं के लिए प्लेटफॉर्म का पहले से ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि कंपनी अब गलत जानकारी और एआई से बनाए गए भ्रामक कंटेंट के खिलाफ और अधिक सख्त कदम उठा रही है।

विश्लेषकों के अनुसार,एक्स की यह नई नीति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है। जैसे-जैसे एआई तकनीक अधिक उन्नत होती जा रही है, वैसे-वैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के सामने यह चुनौती भी बढ़ती जा रही है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना की विश्वसनीयता के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें। एक्स का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की रचनात्मक सामग्री को रोकना नहीं है,बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यूजर्स को यह पता रहे कि वे जो देख रहे हैं वह वास्तविक है या कृत्रिम रूप से तैयार किया गया है।

एक्स की नई नीति यह दर्शाती है कि सोशल मीडिया कंपनियाँ अब एआई के दुरुपयोग को लेकर पहले से अधिक सतर्क हो रही हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तरह के नियम ऑनलाइन सूचना पारिस्थितिकी को कितना सुरक्षित और विश्वसनीय बना पाते हैं।