नई दिल्ली,11 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश में रसोई गैस की संभावित कमी को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच भारत सरकार और ऊर्जा कंपनियों ने राहत भरी खबर दी है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार,भारत ने वैकल्पिक मार्गों और नए स्रोतों से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है,जो जल्द ही देश में पहुँचने वाली है। इससे घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के बावजूद भारत ने समय रहते कई रणनीतिक कदम उठाए हैं,ताकि आम उपभोक्ताओं और उद्योगों को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।
सरकार की ओर से तेल कंपनियों को कुकिंग गैस का उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए जाने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने भी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार देश की रिफाइनरियों ने एलपीजी के घरेलू उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है,जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा हुआ है और कई देशों में ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता देखी जा रही है।
देश की प्रमुख ऊर्जा कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आश्वासन दिया है। कंपनी का जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स इस समय एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है। यह कॉम्प्लेक्स दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत रिफाइनिंग हब के रूप में जाना जाता है और इसकी उत्पादन क्षमता वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के इस दौर में भारतीय घरों के लिए आवश्यक ईंधनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
कंपनी के अनुसार जामनगर स्थित रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स से एलपीजी उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं। रिफाइनरी संचालन को बेहतर ढंग से संचालित करने और उत्पादन क्षमता को अधिकतम करने के लिए विशेषज्ञों की टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य घरेलू बाजार में एलपीजी की आपूर्ति को स्थिर और भरोसेमंद बनाए रखना है,ताकि आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए प्राकृतिक गैस के स्रोतों का भी रणनीतिक उपयोग किया जा रहा है। कंपनी ने बताया कि राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुरूप केजी-डी6 बेसिन से उत्पादित प्राकृतिक गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की आपूर्ति के लिए डायवर्ट किया जाएगा। इस कदम से घरेलू उपभोक्ताओं और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
इस बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि घरेलू गैस आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है और किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों और मार्गों में विविधता लाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। मंत्री के अनुसार सरकार लगातार विभिन्न देशों और क्षेत्रों से ऊर्जा आयात प्राप्त कर रही है,जिससे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद देश में ईंधन की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।
पुरी ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आपूर्ति के क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति अपनाई है। इसी रणनीति के तहत विभिन्न देशों के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाया गया और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग विकसित किए गए। इसका परिणाम यह है कि वर्तमान वैश्विक संकट के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के घरों और प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों को बिना किसी रुकावट के ईंधन मिलता रहे।
मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को संपीड़ित प्राकृतिक गैस यानी सीएनजी और पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की पूरी आपूर्ति मिलती रहे। इन ईंधनों का उपयोग बड़ी संख्या में घरों,वाहनों और छोटे उद्योगों में किया जाता है,इसलिए इनकी उपलब्धता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद उद्योगों को उनकी गैस आवश्यकताओं का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक उपलब्ध कराया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा रणनीति में पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। पहले देश का बड़ा हिस्सा ऊर्जा आयात के लिए सीमित क्षेत्रों पर निर्भर था,लेकिन अब सरकार ने आयात के स्रोतों का दायरा बढ़ा दिया है। इससे किसी एक क्षेत्र में संकट आने की स्थिति में भी आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना कम हो जाती है। यही कारण है कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित तरीके से पूरा कर पा रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने का फैसला भी एक महत्वपूर्ण कदम है। जब वैश्विक बाजारों में कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है,तब घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करना देश के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसी वजह से रिफाइनरियों और ऊर्जा कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के बावजूद भारत ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाकर संभावित संकट को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है। वैकल्पिक आयात स्रोतों,घरेलू उत्पादन में वृद्धि और ऊर्जा आपूर्ति के बेहतर प्रबंधन के कारण देश में एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है। सरकार और ऊर्जा कंपनियों का कहना है कि उनका प्रयास है कि देश के हर घर तक सस्ती और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
