सुप्रीम कोर्ट

पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँची हिंदू महासभा,केंद्रीय बलों की तैनाती की माँग

नई दिल्ली,9 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अखिलेश भारतीय हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर चुनाव के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करने की माँग की है,ताकि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष,स्वतंत्र और भयमुक्त माहौल में संपन्न हो सके। यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है,जिसमें शीर्ष अदालत से केंद्र सरकार को आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की गई है।

याचिका में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान अक्सर हिंसा,धमकी और राजनीतिक दबाव की घटनाएँ सामने आती रही हैं,जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। हिंदू महासभा का दावा है कि चुनाव ड्यूटी में लगे सरकारी कर्मचारियों,न्यायिक अधिकारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है,क्योंकि बिना सुरक्षित माहौल के स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना संभव नहीं है।

संगठन ने अपनी याचिका में कई पुराने और हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई है। विशेष रूप से 2013 के पंचायत चुनावों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि उस दौरान कथित तौर पर 39 लोगों की हत्या हुई थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने भारी संख्या में सीटें जीती थीं,लेकिन हिंसा के कारण चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे थे।

इसके अलावा,2018 के पंचायत चुनावों का भी उल्लेख किया गया है,जहाँ करीब 20 लोगों की हत्या और विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के आरोप सामने आए थे। याचिका में कहा गया है कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि राज्य में चुनावों के दौरान विपक्षी दलों और उनके समर्थकों को स्वतंत्र रूप से भाग लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

हिंदू महासभा ने केवल पुराने मामलों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी,बल्कि हाल के घटनाक्रमों को भी याचिका में शामिल किया है। नवंबर 2020 में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कोयला तस्करी और हवाला मामले में दर्ज जाँच का हवाला देते हुए संगठन ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए हैं। साथ ही जनवरी 2026 में कोलकाता और दिल्ली में हुई छापेमारी का भी जिक्र किया गया है,जिसमें कथित तौर पर राजनीतिक दबाव की बात सामने आई थी।

मार्च 2026 में नदिया और हुगली जिलों में चुनावी ड्यूटी कर रहे अधिकारियों को घेरने और धमकाने की घटनाओं का भी याचिका में उल्लेख किया गया है। इसके अलावा अप्रैल 2026 में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक भीड़ द्वारा रोके जाने की घटना को भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। संगठन का कहना है कि ये घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह केंद्र और राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दे कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा,धमकी या हस्तक्षेप को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएँ। हिंदू महासभा का मानना है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती से न केवल कानून-व्यवस्था बेहतर होगी,बल्कि मतदाताओं में भी विश्वास बढ़ेगा और वे बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार,चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती का मुद्दा पहले भी कई बार सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के सामने उठ चुका है। कई मामलों में अदालत ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना है। ऐसे में इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम हो सकता है।

पश्चिम बंगाल में चुनाव हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाते रहे हैं। यहाँ की चुनावी प्रक्रिया में हिंसा और टकराव की घटनाएँ अक्सर सुर्खियों में रहती हैं,जिससे चुनाव आयोग और प्रशासन पर निष्पक्षता बनाए रखने का दबाव बढ़ जाता है। इसी पृष्ठभूमि में हिंदू महासभा की यह याचिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं,जो यह तय करेगा कि क्या आने वाले चुनावों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर कोई विशेष निर्देश जारी किए जाएँगे। यदि अदालत इस याचिका पर सकारात्मक रुख अपनाती है,तो इसका असर न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि देश के अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।