हेलसिंकी,30 जनवरी (युआईटीवी)- स्वीडन में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर सरकार ने अब इसे सबसे गंभीर सामाजिक संकटों में से एक मानते हुए ठोस कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक नई और अहम पहल की घोषणा की है,जिसके तहत ‘क्विन्नोफ्रिड’ यानी महिलाओं की शांति पर केंद्रित एक नई मिनिस्टीरियल काउंसिल बनाई जा रही है। इस परिषद की अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री करेंगे। सरकार का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ पुरुषों की हिंसा पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाना और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।
स्थानीय समयानुसार बुधवार को स्टॉकहोम में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा स्वीडन की सबसे बड़ी और सबसे डरावनी सामाजिक समस्याओं में से एक बन चुकी है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है,बल्कि मानसिक स्वास्थ्य,सामाजिक संरचनाओं और पारिवारिक संबंधों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। नई मिनिस्टीरियल काउंसिल का फोकस गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हिंसा,घरेलू हिंसा और तथाकथित सम्मान के नाम पर की जाने वाली हिंसा पर होगा,जहाँ कई मामलों में महिलाओं को उनके ही परिवार के सदस्य निशाना बनाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परिषद के जरिए सरकार विभिन्न मंत्रालयों,पुलिस,सामाजिक सेवाओं और न्यायिक संस्थाओं के बीच समन्वय को मजबूत करना चाहती है,ताकि हिंसा की आशंका वाले मामलों की पहचान समय रहते की जा सके और उन्हें रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें। क्रिस्टर्सन ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय रोकथाम पर ज्यादा जोर दिया जाएगा,ताकि हिंसा होने से पहले ही संभावित खतरों को कम किया जा सके।
इस पहल के साथ-साथ स्वीडिश कैबिनेट पहले ही कई सख्त फैसले ले चुकी है। सरकार ने पैरोल के नियमों को कड़ा करने और बार-बार अपराध करने वालों के जोखिम आकलन की प्रक्रिया को मजबूत करने का निर्णय लिया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हिंसक प्रवृत्ति वाले अपराधियों को समय से पहले रिहा न किया जाए और वे समाज,खासकर महिलाओं के लिए खतरा न बनें। सरकार का मानना है कि कई मामलों में जोखिम का सही आकलन न होने के कारण हिंसक अपराध दोहराए जाते हैं,जिसे अब गंभीरता से सुधारने की जरूरत है।
सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार,महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा दिसंबर 2025 के अंत में एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया था। स्टॉकहोम के दक्षिणी इलाके रॉनिंगे और उत्तरी स्वीडन के शहर बोडेन में सामने आई दो बेहद चौंकाने वाली घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इन मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि अधिकारी खतरनाक व्यक्तियों के बारे में जोखिम का आकलन कैसे करते हैं और पहले से सामने आए हिंसक व्यवहार के संकेतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
रॉनिंगे की घटना में 26 दिसंबर की रात एक 25 वर्षीय महिला के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया था। अगले दिन महिला का शव मिलने के बाद मामले को हत्या में बदल दिया गया। इस घटना ने स्थानीय समुदाय के साथ-साथ पूरे देश में गहरा आक्रोश और डर पैदा किया। इसी तरह,बोडेन में 25 दिसंबर 2025 को पुलिस को एक घर से आपात कॉल मिली थी, जहाँ बाद में पुष्टि हुई कि एक महिला की अत्यधिक हिंसा के चलते मौत हो गई। इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा सिस्टम कई बार खतरे के संकेतों को समय रहते पकड़ने में नाकाम रहा है।
इन घटनाओं के बाद न्याय मंत्री गुन्नार स्ट्रोमर ने भी बेहद कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “स्वीडन में एक महिला होना जानलेवा नहीं होना चाहिए। खतरनाक आदमियों को बंद कर देना चाहिए,ताकि महिलाएँ सार्वजनिक तौर पर सुरक्षित महसूस कर सकें।” उनका यह बयान सरकार की बदली हुई सोच को दर्शाता है,जिसमें अब महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है।
‘क्विन्नोफ्रिड’ शब्द का स्वीडिश कानूनी और सांस्कृतिक परंपरा में गहरा महत्व है। ऐतिहासिक रूप से इसे 13वीं सदी के शांति कानूनों से जोड़ा जाता है,जिनका उद्देश्य महिलाओं पर हमलों और अपहरण जैसी घटनाओं को रोकना था। सरकार ने जानबूझकर इसी शब्द को चुना है,ताकि यह संदेश दिया जा सके कि महिलाओं की सुरक्षा कोई नई अवधारणा नहीं,बल्कि स्वीडन की ऐतिहासिक जिम्मेदारी का हिस्सा रही है। आधुनिक संदर्भ में इस शब्द का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया जा रहा है कि समाज में महिलाओं को बिना डर और हिंसा के जीवन जीने का अधिकार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री के स्तर पर इस परिषद की अध्यक्षता करना एक मजबूत राजनीतिक संकेत है। इससे यह साफ होता है कि सरकार इस मुद्दे को केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं मान रही,बल्कि इसे एक व्यापक सामाजिक चुनौती के रूप में देख रही है। हालाँकि,आलोचकों का कहना है कि घोषणाओं के साथ-साथ जमीनी स्तर पर ठोस और तेज कार्रवाई जरूरी होगी,ताकि इस पहल का असर वास्तव में महिलाओं की जिंदगी में महसूस किया जा सके।
स्वीडन सरकार की यह नई पहल महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि ‘क्विन्नोफ्रिड’ मिनिस्टीरियल काउंसिल कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या यह देश में महिलाओं के लिए ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल बनाने में सफल हो पाती है या नहीं।
