नई दिल्ली,6 फरवरी (युआईटीवी)- विमेंस प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) के इतिहास में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने एक बार फिर से अपना दबदबा साबित करते हुए दूसरी बार खिताब अपने नाम कर लिया है। गुरुवार को बीसीए स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में आरसीबी ने दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) को 6 विकेट से हराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। इस जीत के साथ ही आरसीबी विमेंस क्रिकेट की सबसे सफल टीमों में शामिल हो गई है,जबकि दिल्ली कैपिटल्स को लगातार चौथी बार फाइनल में पहुँचने के बावजूद खिताब से खाली हाथ लौटना पड़ा।
इससे पहले आरसीबी ने डब्ल्यूपीएल 2023/24 का खिताब जीता था,जबकि टूर्नामेंट के पहले और तीसरे सीजन में मुंबई इंडियंस ने ट्रॉफी अपने नाम की थी। दिल्ली कैपिटल्स की टीम हर बार खिताबी मुकाबले तक पहुँचने के बावजूद अंतिम बाधा पार नहीं कर पाई,जो उनके लिए इस सीजन की सबसे बड़ी निराशा रही।
फाइनल मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी। टीम की शुरुआत शानदार रही और सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा तथा लिजेल ली ने आक्रामक अंदाज में रन बटोरते हुए आरसीबी के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। दोनों ने मिलकर महज 5.5 ओवरों में 49 रन की साझेदारी कर टीम को तेज शुरुआत दिलाई। शेफाली वर्मा ने अपने चिरपरिचित अंदाज में बड़े शॉट लगाए,लेकिन वह 20 रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद लिजेल ली भी ज्यादा देर टिक नहीं सकीं और 37 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। शुरुआती जोड़ी के टूटने के बाद दिल्ली का स्कोर 72 रन पर दो विकेट हो गया था।
यहाँ से दिल्ली कैपिटल्स की पारी को मजबूती दी जेमिमा रोड्रिगेज ने,जिन्होंने लौरा वोल्वार्ड्ट के साथ मिलकर पारी को सँभाला। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 76 रन की अहम साझेदारी हुई,जिसने टीम को एक बार फिर मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। जेमिमा रोड्रिगेज ने बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 37 गेंदों में 8 चौकों की मदद से 57 रन बनाए। उनकी पारी में आक्रामकता और संयम का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला। हालाँकि,वह अपने अर्धशतक को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सकीं और आउट हो गईं।
जेमिमा के आउट होने के बाद भी दिल्ली की रनगति नहीं थमी। लौरा वोल्वार्ड्ट ने एक छोर सँभाले रखा और तेजी से रन बटोरते हुए 44 रन का योगदान दिया। अंतिम ओवरों में चिनले हेनरी ने आक्रामक अंदाज अपनाया और नाबाद 35 रन की पारी खेली। हेनरी और वोल्वार्ड्ट के बीच चौथे विकेट के लिए 54 रन की साझेदारी हुई,जिसकी बदौलत दिल्ली कैपिटल्स ने निर्धारित 20 ओवरों में 4 विकेट के नुकसान पर 203 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। आरसीबी की ओर से सयाली सतघरे,अरुंधति रेड्डी और नादिन डी क्लार्क ने एक-एक विकेट हासिल किया,लेकिन दिल्ली के बल्लेबाजों के सामने उनका प्रभाव सीमित ही रहा।
203 रन के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी आरसीबी की शुरुआत हालाँकि,उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टीम ने महज 9 रन के स्कोर पर ग्रेस हैरिस का विकेट गंवा दिया,जो 9 रन बनाकर आउट हुईं। शुरुआती झटके के बाद आरसीबी की पारी को सँभाला कप्तान स्मृति मंधाना ने। उन्होंने जॉर्जिया वोल के साथ मिलकर मैच की दिशा और दशा ही बदल दी। दोनों बल्लेबाजों ने शानदार तालमेल दिखाते हुए दूसरे विकेट के लिए 92 गेंदों में 165 रन की विशाल साझेदारी की,जिसने दिल्ली कैपिटल्स को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।
स्मृति मंधाना ने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मुकाबलों की खिलाड़ी क्यों मानी जाती हैं। उन्होंने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट्स लगाए और दिल्ली के गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर जॉर्जिया वोल ने भी कप्तान का बेहतरीन साथ निभाया और जिम्मेदारी के साथ रन बनाती रहीं। दोनों के बीच साझेदारी इतनी मजबूत रही कि मैच एक समय पूरी तरह आरसीबी की पकड़ में आ गया था।
हालाँकि,इस साझेदारी के टूटने के बाद मुकाबले में थोड़ी देर के लिए रोमांच जरूर लौटा। दिल्ली कैपिटल्स के गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में कुछ अहम विकेट निकालकर दबाव बनाने की कोशिश की। चिनले हेनरी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए आरसीबी के दो महत्वपूर्ण विकेट झटके और दिल्ली की उम्मीदों को जिंदा रखा। नंदिनी शर्मा और मिन्नु मणि को भी एक-एक सफलता मिली,जिससे अंतिम ओवरों में मुकाबला दिलचस्प हो गया।
जब आरसीबी को जीत के लिए कुछ ही रन चाहिए थे,तब दिल्ली ने पूरी ताकत झोंक दी। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की सांसें थम सी गई थीं। इसी दबाव भरे माहौल में राधा यादव ने संयम और आत्मविश्वास का परिचय दिया। उन्होंने सिर्फ 5 गेंदों में 2 चौकों की मदद से 12 रन बनाते हुए आरसीबी को 19.4 ओवरों में जीत दिला दी। राधा का यह छोटा,लेकिन निर्णायक योगदान आरसीबी की जीत में अहम साबित हुआ।
इस जीत के साथ ही आरसीबी ने न केवल दूसरी बार डब्ल्यूपीएल ट्रॉफी अपने नाम की,बल्कि यह भी दिखा दिया कि टीम बड़े मौकों पर किस तरह एकजुट होकर प्रदर्शन करती है। कप्तान स्मृति मंधाना की रणनीति,बल्लेबाजों की आक्रामकता और गेंदबाजों की समय-समय पर मिली सफलताओं ने आरसीबी को चैंपियन बना दिया।
दूसरी ओर,दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया,लेकिन फाइनल में एक बार फिर खिताब उनसे दूर रह गया। लगातार चौथी बार फाइनल हारना दिल्ली के लिए बड़ा झटका है और आने वाले समय में उन्हें इस मानसिक बाधा को पार करने पर खास ध्यान देना होगा।
डब्ल्यूपीएल का यह सीजन रोमांच,प्रतिस्पर्धा और महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत का शानदार उदाहरण रहा। आरसीबी की यह जीत विमेंस क्रिकेट के इतिहास में लंबे समय तक याद रखी जाएगी,जबकि दिल्ली कैपिटल्स को एक बार फिर अगले सीजन में नई उम्मीदों के साथ वापसी करनी होगी।
