नई दिल्ली,8 अक्टूबर (युआईटीवी)– भारतीय कुश्ती महासंघ ने मंगलवार को पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले युवा पहलवान अमन सहरावत को अनुशासनहीनता के आरोप में एक साल के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया। 22 वर्षीय सहरावत को सितंबर में क्रोएशिया के जाग्रेब में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में 57 किलोग्राम भार सीमा पार करने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इस निलंबन का प्रभाव 23 सितंबर से लागू किया गया है,जिसके अनुसार सहरावत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी कुश्ती गतिविधि में हिस्सा नहीं ले पाएँगे।
भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने इस निलंबन की पुष्टि करते हुए कहा कि अमन सहरावत को अनुशासनात्मक नोटिस भेजा गया था,जिसका उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि महासंघ ने वजन संबंधी नियमों के उल्लंघन के चलते यह सख्त कार्रवाई की है। संजय सिंह ने बताया कि, “भारतीय कुश्ती महासंघ ने वजन नियमों का उल्लंघन करने के लिए अमन सहरावत को निलंबित करने का फैसला किया है। यह निलंबन उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी कुश्ती गतिविधि में भाग लेने से रोकता है।”
जानकारी के अनुसार,सहरावत 14 सितंबर को अपने निर्धारित मुकाबले से लगभग 18 दिन पहले क्रोएशिया के पोरेक में तैयारी शिविर में शामिल हुए थे। इस समय अवधि को देखते हुए उन्हें अपने वजन और फिटनेस स्तर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त समय मिला था। इसके बावजूद उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया,जिसके कारण उन्हें अयोग्य घोषित किया गया और अब एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया।
अमन सहरावत के निलंबन ने भारतीय कुश्ती समुदाय में चर्चा का विषय बना दिया है। यह मामला युवा पहलवानों के लिए अनुशासन और नियमों के पालन का उदाहरण भी बन गया है। यह निलंबन इस साल के भीतर किसी भारतीय पहलवान से जुड़ी तीसरी अनुशासनात्मक घटना है। इससे पहले,पेरिस 2024 ओलंपिक से विनेश फोगट को हटाने और 2025 विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में नेहा सांगवान को वजन अनुपालन और फिटनेस मानकों से संबंधित मुद्दों के कारण अयोग्य घोषित करने के विवाद सामने आए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस निलंबन का अमन सहरावत के करियर पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उनके लिए 2026 एशियाई खेलों की तैयारियों में यह बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। कुश्ती प्रतियोगिताएँ 30 सितंबर से 3 अक्टूबर तक आयोजित की जाएँगी और इस निलंबन के कारण सहरावत न केवल प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से दूर रहेंगे,बल्कि उनके प्रदर्शन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सहरावत की सफलता और संभावनाओं को देखते हुए यह निलंबन उनके करियर के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने भारतीय कुश्ती को एक नई पहचान दी थी और युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने थे,लेकिन अनुशासनहीनता के चलते यह सख्त कार्रवाई उनके करियर की राह में एक बड़ी बाधा बन गई है।
भारतीय कुश्ती महासंघ ने हमेशा पहलवानों को प्रशिक्षण और तैयारी में अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी है। पहलवानों को वजन श्रेणियों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होता है,ताकि अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में किसी प्रकार की अयोग्यता न हो। अमन सहरावत के मामले ने यह दिखा दिया कि चाहे किसी खिलाड़ी की प्रतिभा कितनी भी उच्च क्यों न हो,नियमों का उल्लंघन गंभीर परिणाम ला सकता है।
सहरावत के निलंबन के बाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके लिए प्रतिस्पर्धात्मक अवसरों में कमी आने की संभावना है। इसके अलावा,इस अवधि के दौरान उनके कोचिंग और प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भी असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वह इस एक साल के निलंबन का प्रभावी ढंग से सामना करते हैं और फिटनेस तथा वजन को नियमित बनाए रखते हैं,तो भविष्य में वे पुनः प्रतिस्पर्धा के मैदान में लौट सकते हैं।
इस फैसले से कुश्ती संघ यह संदेश देना चाहता है कि अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा। भारतीय कुश्ती की विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा और खिलाड़ियों की सुरक्षा तथा योग्यता सुनिश्चित करने के लिए महासंघ ने यह कदम उठाया है।
अमन सहरावत के लिए अब यह चुनौती है कि वह इस समय का उपयोग अपने फिटनेस स्तर को बनाए रखने और नियमों के पालन में सुधार करने के लिए करें। उनके प्रशंसक और भारतीय कुश्ती समुदाय उम्मीद कर रहे हैं कि वह इस कठिन समय से उबरकर पुनः अपने प्रदर्शन और सफलता की ओर लौटेंगे।
