नई दिल्ली,21 जनवरी (युआईटीवी)- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बेरेस के साथ एक अहम द्विपक्षीय बैठक की,जिसमें भारत–स्पेन संबंधों को और अधिक मजबूत करने के व्यापक एजेंडे पर गहन चर्चा हुई। बैठक का फोकस साझा लोकतांत्रिक मूल्यों,आतंकवाद के प्रति सख्त और स्पष्ट रुख,नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था तथा तेजी से बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी पर रहा। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और भविष्य-उन्मुख सहयोग का संकेत मानी जा रही है।
बैठक की शुरुआत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है,जहाँ भू-राजनीतिक अस्थिरता,सुरक्षा चुनौतियाँ और तकनीकी बदलाव नई वास्तविकताएँ गढ़ रहे हैं। ऐसे समय में साझा चुनौतियों पर मिलकर काम करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। उन्होंने विशेष रूप से आतंकवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक ऐसी वैश्विक समस्या है,जिसने भारत और स्पेन—दोनों को गहराई से प्रभावित किया है। जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस दिखानी होगी और किसी भी रूप में इसे सही ठहराने या दोहरे मानदंड अपनाने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
विदेश मंत्री ने भारत और स्पेन के बीच संबंधों को गर्मजोशी भरे और दोस्ताना बताते हुए कहा कि इनकी नींव साझा लोकतांत्रिक मूल्यों,बहुपक्षवाद के समर्थन और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति सम्मान पर टिकी है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझते हैं और कई वैश्विक मुद्दों पर समान सोच रखते हैं। यही वजह है कि द्विपक्षीय संबंध केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं,बल्कि विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित हैं।
जयशंकर ने इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया कि भारत और स्पेन वर्ष 2026 में अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। यह मील का पत्थर दोनों देशों के रिश्तों की निरंतरता और गहराई को दर्शाता है। इसी कड़ी में उन्होंने घोषणा की कि दोनों देश संस्कृति,पर्यटन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को समर्पित “दोहरे वर्ष” का आयोजन करेंगे। उनके मुताबिक,यह पहल एक ओर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव होगी,तो दूसरी ओर भविष्य की तकनीकों और नवाचारों में सहयोग को बढ़ावा देगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि भारत अगले महीने ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि भारत का एआई दृष्टिकोण इंसान-केंद्रित,समावेशी,जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर आधारित है। यह दृष्टिकोण यूरोप,खासकर स्पेन के नजरिए से काफी मेल खाता है,जहाँ तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानव मूल्यों और डेटा सुरक्षा पर जोर दिया जाता है। जयशंकर ने विश्वास जताया कि एआई के क्षेत्र में भारत और स्पेन का सहयोग वैश्विक मानकों और बेहतर नीतियों के निर्माण में योगदान दे सकता है।
आर्थिक सहयोग को भारत–स्पेन संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए जयशंकर ने कहा कि स्पेन,यूरोपीय संघ में भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर चुका है,जो लगातार बढ़ती आर्थिक साझेदारी का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह आँकड़ा केवल व्यापारिक लेन-देन तक सीमित नहीं है,बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते भरोसे और पूरकता को भी दर्शाता है।
विदेश मंत्री ने बताया कि स्पेन की कंपनियों ने भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर,रिन्यूएबल एनर्जी, अर्बन मोबिलिटी,इंजीनियरिंग,वॉटर मैनेजमेंट और स्मार्ट सिटीज जैसे अहम क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। भारत के तेज शहरीकरण और हरित ऊर्जा पर बढ़ते फोकस के बीच स्पेन की विशेषज्ञता और तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वहीं दूसरी ओर भारतीय कंपनियाँ स्पेन में आईटी,फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रही हैं।
रक्षा सहयोग पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत–स्पेन रक्षा औद्योगिक साझेदारी लगातार गहराती जा रही है। उन्होंने बताया कि पहला ‘मेड इन इंडिया’ सी295 एयरक्राफ्ट इस साल सितंबर से पहले सामने आने की उम्मीद है। यह परियोजना न केवल दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की मजबूती को दर्शाती है,बल्कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को विकसित करने और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएँ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की नींव मजबूत करती हैं।
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत–स्पेन संबंध केवल रणनीतिक और आर्थिक दायरे तक सीमित नहीं हैं,बल्कि इन्हें मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव भी समृद्ध बनाता है। उन्होंने स्पेन में योग,आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख किया। इसके साथ ही भारत में स्पेनिश भाषा,साहित्य,संगीत और संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि को दोनों देशों के बीच गहरे लोगों-से-लोगों के संबंधों का संकेत बताया।
पर्यटन को भारत–स्पेन साझेदारी का एक अहम और तेजी से बढ़ता स्तंभ बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों का आवागमन एक जीवंत पुल की तरह काम करता है। उन्होंने शिक्षा,छात्र आदान-प्रदान,संस्थागत साझेदारियों और लोगों की आवाजाही को और अधिक सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उनके मुताबिक,जब लोग एक-दूसरे के समाज,संस्कृति और जीवन शैली को करीब से समझते हैं,तो द्विपक्षीय रिश्ते और भी मजबूत होते हैं।
जयशंकर और अल्बेरेस के बीच हुई यह बैठक भारत–स्पेन संबंधों को एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख,एआई और नई तकनीकों में सहयोग,बढ़ता व्यापार,रक्षा औद्योगिक साझेदारी और गहरे सांस्कृतिक संबंध—ये सभी पहलू इस बात का संकेत हैं कि दोनों देश भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए मिलकर आगे बढ़ने को तैयार हैं। 70 साल की दोस्ती की ओर बढ़ते भारत और स्पेन के रिश्ते अब एक अधिक परिपक्व,व्यापक और रणनीतिक साझेदारी का रूप लेते नजर आ रहे हैं।
