अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी (तस्वीर क्रेडिट@agreeCarey)

व्हाइट हाउस में जोहरान ममदानी और डोनाल्ड ट्रंप की अहम मुलाकात,आवास और अप्रवासन मुद्दों पर हुई चर्चा

वाशिंगटन,27 फरवरी (युआईटीवी)- न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। हाल के महीनों में दोनों नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद और राजनीतिक टकराव सुर्खियों में रहे हैं,ऐसे में यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खास बात यह रही कि यह मुलाकात किसी पूर्व-निर्धारित सार्वजनिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी,बल्कि अपेक्षाकृत शांत और सीमित दायरे में हुई। व्हाइट हाउस की ओर से इस बैठक पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई,लेकिन मेयर ममदानी ने इसे एक सार्थक और सकारात्मक बातचीत बताया।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ममदानी ने कहा कि वे न्यूयॉर्क शहर में अधिक आवास निर्माण को लेकर उत्सुक हैं और इस दिशा में संघीय सहयोग चाहते हैं। न्यूयॉर्क में किफायती आवास की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। शहर की बढ़ती आबादी और आसमान छूती रियल एस्टेट कीमतों के बीच मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए घर उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए एक जटिल मुद्दा बना हुआ है। सिटी हॉल की प्रवक्ता अन्ना बहर ने बताया कि मेयर ने राष्ट्रपति के सामने ऐसे प्रस्ताव रखे हैं,जिनके माध्यम से कुछ ही परियोजनाओं में पिछले 50 वर्षों में बने आवासों से कहीं अधिक घरों का निर्माण किया जा सकता है। हालाँकि,प्रस्तावित परियोजनाओं के दायरे,संभावित स्थानों या वित्तपोषण व्यवस्था को लेकर तत्काल कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।

इस बैठक का एक अप्रत्याशित पहलू अप्रवासन से जुड़ा रहा। व्हाइट हाउस से बाहर आने के बाद ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि उन्होंने अपनी पिछली मुलाकात में कोलंबिया विश्वविद्यालय की छात्रा इलाइना अघायेवा को लेकर चिंता जताई थी,जिन्हें उसी सुबह अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (आईसीई) ने हिरासत में लिया था। ममदानी ने लिखा कि उन्हें सूचित किया गया है कि अघायेवा को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। बाद में उनकी रिहाई की पुष्टि भी हुई।

अघायेवा को गुरुवार तड़के संघीय एजेंटों ने मैनहट्टन स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय के परिसर में एक आवासीय भवन से हिरासत में लिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई। कार्यवाहक अध्यक्ष क्लेयर शिपमैन ने बयान जारी कर कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संघीय एजेंटों ने ‘लापता व्यक्ति’ की तलाश के नाम पर भवन में प्रवेश करने के लिए गलत जानकारी दी। विश्वविद्यालय ने कहा कि वह पूरे मामले की विस्तृत जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहा है।

शिपमैन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ विश्वविद्यालय के गैर-सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रवेश करना चाहती हैं,तो उन्हें पहले सार्वजनिक सुरक्षा विभाग से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की नीति के अनुसार किसी भी एजेंसी को बिना उचित प्रक्रिया और समन्वय के गैर-सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। विश्वविद्यालय ने कर्मचारियों और छात्रों से अपील की कि वे किसी भी वारंट या समन को स्वीकार करने से पहले संस्थान के महाधिवक्ता कार्यालय से संपर्क करें।

इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने भी प्रतिक्रिया दी। विभाग के अनुसार,अघायेवा का वीजा 2016 में कक्षा में अनुपस्थित रहने के कारण रद्द कर दिया गया था। विभाग ने यह भी कहा कि भवन प्रबंधक और उनके रूममेट ने अधिकारियों को अपार्टमेंट में प्रवेश करने की अनुमति दी थी। विभाग के अनुसार उनके पास अघायेवा की ओर से कोई लंबित अपील या आवेदन नहीं था। हालाँकि,विश्वविद्यालय और संघीय एजेंसियों के बयानों में अंतर ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब अप्रवासन नीति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है। राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से सख्त आव्रजन नीतियों के समर्थक रहे हैं और उन्होंने डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले शहरों की आलोचना की है,विशेष रूप से उन शहरों की जो ‘सैंक्चुअरी सिटी’ नीतियों का समर्थन करते हैं। दूसरी ओर,ममदानी एक डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट नेता के रूप में प्रवासी समुदायों के अधिकारों की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की यह बैठक वैचारिक रूप से विपरीत ध्रुवों के बीच संवाद का संकेत देती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि न्यूयॉर्क शहर की संघीय अनुदानों पर निर्भरता इस संवाद का एक व्यावहारिक कारण भी हो सकती है। शहर की बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ, आवास योजनाएँ और सामाजिक सेवाएं काफी हद तक संघीय फंडिंग पर आधारित हैं। ऐसे में मेयर और राष्ट्रपति के बीच कार्यात्मक संबंध बनाए रखना प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक हो सकता है,भले ही राजनीतिक मतभेद कायम रहें।

कोलंबिया विश्वविद्यालय,जो देश के प्रमुख निजी शिक्षण संस्थानों में से एक है,हाल के वर्षों में संघीय अधिकार और परिसर की स्वायत्तता को लेकर विवादों का केंद्र रहा है। विश्वविद्यालय परिसरों में संघीय एजेंसियों की मौजूदगी और कार्रवाई को लेकर अक्सर कानूनी और नैतिक प्रश्न उठते रहे हैं। अघायेवा की गिरफ्तारी और रिहाई ने इस बहस को एक बार फिर जीवित कर दिया है।

हालाँकि,व्हाइट हाउस ने इस बैठक पर औपचारिक बयान जारी नहीं किया है,लेकिन यह स्पष्ट है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार से आगे बढ़कर ठोस मुद्दों पर केंद्रित थी। आवास निर्माण,संघीय सहयोग और अप्रवासन प्रवर्तन जैसे विषयों पर चर्चा ने यह संकेत दिया है कि दोनों पक्ष कम से कम कुछ क्षेत्रों में संवाद की गुंजाइश तलाश रहे हैं।

यह बैठक अमेरिकी राजनीति में बदलते समीकरणों की झलक पेश करती है। चुनावी बयानबाजी और वैचारिक टकराव के बावजूद,प्रशासनिक आवश्यकताएँ और स्थानीय मुद्दे नेताओं को संवाद की मेज तक ला सकते हैं। न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक शहर के लिए संघीय सरकार के साथ तालमेल महत्वपूर्ण है,जबकि राष्ट्रपति के लिए भी बड़े शहरों के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखना राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इससे आवास संकट तथा अप्रवासन जैसे जटिल मुद्दों पर ठोस समाधान निकल पाते हैं।