कोलकाता,8 जनवरी (युआईटीवी)- ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकिट की प्रवर्तक कंपनी इटरनल को जीएसटी विभाग की ओर से बड़ा झटका लगा है। कंपनी को पश्चिम बंगाल के राज्य कर (अपील) के अतिरिक्त आयुक्त की ओर से करीब 3.7 करोड़ रुपये का जीएसटी डिमांड नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस अप्रैल 2019 से मार्च 2020 की अवधि से जुड़ा है और इसमें मूल कर के साथ-साथ ब्याज और जुर्माना भी शामिल है। हालाँकि,कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश को चुनौती देगी और उसके पास मजबूत कानूनी आधार मौजूद हैं।
मंगलवार देर शाम नियामक फाइलिंग के जरिए इटरनल ने इस नोटिस की जानकारी सार्वजनिक की। फाइलिंग के मुताबिक,कंपनी को 6 जनवरी 2026 को यह नोटिस प्राप्त हुआ,जिसमें कुल 3,69,80,242 रुपये की माँग की गई है। इस राशि में 1.92 करोड़ रुपये का जीएसटी, 1.58 करोड़ रुपये का ब्याज और 19.24 लाख रुपये का जुर्माना शामिल है। नोटिस कथित तौर पर आउटपुट जीएसटी के कम भुगतान से संबंधित है,जिसे लेकर कर विभाग ने आपत्ति जताई है।
कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि इस नोटिस में संबंधित अवधि के दौरान आउटपुट टैक्स के कम भुगतान का आरोप लगाया गया है और उसी आधार पर ब्याज और जुर्माने की माँग उठाई गई है। हालाँकि,इटरनल का मानना है कि उसका पक्ष मजबूत है और वह इस माँग से सहमत नहीं है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके बाहरी कानूनी और कर सलाहकारों ने मामले की समीक्षा की है और उनकी राय भी कंपनी के पक्ष में है।
इटरनल ने फाइलिंग में कहा कि वह इस आदेश को स्वीकार नहीं करती और संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कहना है कि वह उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का सहारा लेगी और इस माँग का प्रभाव उसके वित्तीय स्वास्थ्य पर सीमित रहने की उम्मीद है। कंपनी ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इस नोटिस से उसके संचालन या दीर्घकालिक रणनीति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जोमैटो और ब्लिंकिट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रहे हैं और नियामकीय जाँच भी लगातार बढ़ रही है। बीते कुछ वर्षों में जीएसटी विभाग ने ई-कॉमर्स और टेक आधारित कंपनियों के टैक्स ढांचे की गहन समीक्षा शुरू की है। आउटपुट टैक्स,इनपुट टैक्स क्रेडिट और विभिन्न सेवाओं के वर्गीकरण को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहे हैं। इटरनल का यह मामला भी उसी व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जा रहा है,जिसमें टैक्स अधिकारियों और डिजिटल कंपनियों के बीच व्याख्या को लेकर मतभेद उभरते हैं।
बाजार की प्रतिक्रिया की बात करें,तो इस खबर का जोमैटो के शेयर पर तत्काल कोई नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला। बुधवार को जोमैटो का शेयर 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 280.50 रुपये पर बंद हुआ। हालाँकि,पिछले एक महीने में शेयर में 1.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद,लंबी अवधि में निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न मिला है। बीते छह महीनों में शेयर ने 8.49 प्रतिशत का रिटर्न दिया है,जबकि पिछले एक साल में यह रिटर्न 11.11 प्रतिशत रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल इस जीएसटी नोटिस को एक नियामकीय चुनौती के रूप में देख रहे हैं,न कि कंपनी की बुनियादी स्थिति पर सवाल के तौर पर। इटरनल का व्यवसाय मॉडल,ब्रांड वैल्यू और बाजार में मजबूत पकड़ अभी भी निवेशकों का भरोसा बनाए हुए हैं। यही वजह है कि नोटिस की खबर के बावजूद शेयर में कोई बड़ी बिकवाली देखने को नहीं मिली।
यह पहली बार नहीं है,जब किसी बड़ी टेक या ई-कॉमर्स कंपनी को जीएसटी से जुड़ी मांग का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी कई स्टार्टअप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को टैक्स नोटिस मिले हैं,जिनमें से कई मामलों में बाद में राहत भी मिली है। अक्सर ऐसे मामलों में अंतिम फैसला अपीलीय मंचों पर ही होता है,जहाँ कानून की व्याख्या और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
इटरनल के लिए यह मामला प्रतिष्ठा और अनुपालन दोनों के लिहाज से अहम है। कंपनी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह कर कानूनों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है और जहाँ उसे लगता है कि माँग अनुचित है,वहाँ वह कानूनी रास्ता अपनाएगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अपीलीय प्राधिकरण इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या कंपनी को आंशिक या पूर्ण राहत मिलती है।
फिलहाल,कंपनी और निवेशकों की नजरें अपील प्रक्रिया पर टिकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं आता,तब तक इसे एक प्रक्रियात्मक विवाद के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इटरनल ने जिस तरह से पारदर्शिता के साथ इस नोटिस की जानकारी दी है,उससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी नियामकीय मोर्चे पर सतर्क और सक्रिय बनी हुई है।
