वाशिंगटन,21 अप्रैल (युआईटीवी)- अरब सागर में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है,जब अमेरिकी नौसेना ने ईरानी ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज पर गोलीबारी कर उसे जब्त कर लिया। इस घटना के बाद तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘सशस्त्र समुद्री डकैती’ करार दिया है और जल्द ही जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम ने पहले से ही तनावपूर्ण अमेरिका-ईरान संबंधों को और अधिक जटिल बना दिया है,खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच संघर्ष-विराम की अवधि समाप्त होने वाली है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार,यह कार्रवाई तब की गई,जब ईरानी झंडे वाला मालवाहक जहाज ‘एम/वी तासिका’ अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। कमांड ने बताया कि जहाज को रोकने के लिए लगभग छह घंटे तक गतिरोध चला,जिसके दौरान अमेरिकी सेना ने कई बार चेतावनी दी। रेडियो के माध्यम से बार-बार संदेश भेजकर जहाज के चालक दल को सूचित किया गया कि वे नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहे हैं और उन्हें तुरंत दिशा बदलनी चाहिए।
हालाँकि,अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार,जहाज के चालक दल ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया और अपनी दिशा नहीं बदली। इसके बाद अमेरिकी नौसेना ने कठोर कदम उठाते हुए एक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर के जरिए जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया। इस कार्रवाई का उद्देश्य जहाज की गति को रोकना था,ताकि उसे सुरक्षित रूप से कब्जे में लिया जा सके। गोलीबारी के बाद जहाज का प्रोपल्शन सिस्टम निष्क्रिय हो गया,जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया।
बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन में शामिल अमेरिकी युद्धपोत ने जहाज के चालक दल को पहले इंजन रूम खाली करने का आदेश दिया,ताकि किसी प्रकार की जानहानि न हो। इसके बाद इंजन पर निशाना साधकर कई राउंड फायर किए गए। इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी मरीन बल जहाज पर सवार हुए और उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। फिलहाल जहाज पर लदे हजारों कंटेनरों की तलाशी ली जा रही है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसमें किस प्रकार का सामान मौजूद है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,यह जहाज पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था और उस पर ईरान की आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े होने का संदेह था। इसी कारण उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। इस महीने की शुरुआत में वाशिंगटन द्वारा ईरानी समुद्री गतिविधियों पर नाकाबंदी लगाए जाने के बाद यह पहला अवसर है,जब अमेरिका ने इस तरह की सैन्य कार्रवाई की है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अपने प्रतिबंधों को लागू करने के लिए अब अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है।
दूसरी ओर,ईरान ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई न केवल अवैध है,बल्कि यह खुले तौर पर समुद्री डकैती के समान है। ईरान के खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने एक बयान जारी कर चेतावनी दी कि इस्लामिक गणराज्य की सशस्त्र सेनाएँ जल्द ही इस कार्रवाई का जवाब देंगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस कदम के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जहाज के चालक दल ने जानमाल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी प्रकार का विरोध नहीं किया। उनका कहना था कि चालक दल ने संयम बरतते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दी,ताकि किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके। इसके बावजूद ईरान ने इस घटना को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है,जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का संघर्ष-विराम समाप्त होने की कगार पर है। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस युद्धविराम को आगे बढ़ाया जाएगा या नहीं। ऐसे में इस तरह की सैन्य कार्रवाई ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है और किसी बड़े टकराव की आशंका बढ़ा दी है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है,जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। यह जलडमरूमध्य लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का केंद्र रहा है। यहाँ होने वाले किसी भी टकराव का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है,खासकर तेल की कीमतों पर। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है,तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है,जिससे आर्थिक अस्थिरता बढ़ने की संभावना है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएँ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करती हैं और इससे व्यापक संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार,अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के कारण इस तरह के टकराव समय-समय पर सामने आते रहते हैं। हालाँकि,हर बार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए जाते हैं,लेकिन इस बार हालात अधिक जटिल नजर आ रहे हैं। इसका कारण यह है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी लगातार बढ़ती जा रही है और सैन्य गतिविधियों में भी तेजी आई है।
अरब सागर में हुई यह घटना केवल एक जहाज की जब्ती तक सीमित नहीं है,बल्कि यह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस स्थिति को किस तरह सँभालते हैं और क्या वे किसी बड़े संघर्ष से बचने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाते हैं या नहीं। फिलहाल,पूरे विश्व की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है,क्योंकि इसका असर केवल क्षेत्रीय ही नहीं,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है।
