मुंबई,22 सितंबर (युआईटीवी)- बिग बॉस 20 की कंटेस्टेंट रीति तिवारी इन दिनों अपने बेबाक अंदाज और निजी जिंदगी से जुड़े खुलासों को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेता और नेता मनोज तिवारी की बेटी रीति ने शो में अपने बचपन,पिता के साथ रिश्ते और ‘स्टार किड’ होने के साथ जुड़ी धारणाओं पर खुलकर बात की। साथी कंटेस्टेंट स्काउट के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि लोगों को अक्सर लगता है कि किसी मशहूर शख्स की संतान होने का मतलब है कि जिंदगी में हर सुविधा, पैसा, पहचान और मौके आसानी से मिल जाते हैं। हालाँकि,रीति का कहना है कि उनकी कहानी ऐसी नहीं रही है।
रीति ने बातचीत के दौरान अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वह काफी छोटी थीं,तब उनके पिता घर छोड़कर चले गए थे। उस दौर में पिता से उनकी बातचीत भी नियमित नहीं हो पाती थी। उन्होंने बताया कि वह फोन पर भी अपने पिता से बात नहीं कर पाती थीं। उनके माता-पिता के बीच अक्सर विवाद होते थे और इन परिस्थितियों का असर उनके बचपन पर भी पड़ा। रीति के मुताबिक,वह अपने पिता से साल में केवल एक बार ही मिल पाती थीं।
पिता के साथ कम समय बिताने के कारण उनके मन में उनके बारे में कई सवाल भी रहे। उन्होंने बताया कि जब वह बड़ी हुईं,तो उन्होंने अपने पिता को एक सेलिब्रिटी या सार्वजनिक व्यक्ति के रूप में नहीं,बल्कि एक इंसान के तौर पर जानने की इच्छा महसूस की। इसी वजह से करीब 18 या 19 साल की उम्र में उन्होंने फैसला किया कि वह अपने पिता के साथ समय बिताना चाहती हैं और समझना चाहती हैं कि वह वास्तव में किस तरह के व्यक्ति हैं।
रीति ने कहा कि जब उन्होंने यह फैसला लिया,तब तक उनके रिश्ते में कई चीजें पहले ही पीछे छूट चुकी थीं। बचपन में पिता के साथ जिस तरह का समय और जुड़ाव होना चाहिए था,वह उन्हें नहीं मिल पाया। ऐसे में बाद में रिश्ते को समझने और करीब आने की कोशिश आसान नहीं थी। उनके बयान से साफ था कि पिता के साथ उनका रिश्ता केवल प्रसिद्धि और परिवार की पहचान से जुड़ा हुआ नहीं है,बल्कि इसमें बचपन की दूरी और भावनात्मक अनुभव भी शामिल रहे हैं।
रीति ने ‘स्टार किड’ शब्द के साथ जुड़ी धारणा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लोग किसी सेलिब्रिटी की संतान को देखते ही मान लेते हैं कि उसे अपने माता-पिता की कमाई, संपत्ति,पहचान और अवसरों का सीधा लाभ मिला होगा। उनके अनुसार,उनकी जिंदगी में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने पिता की दौलत और शोहरत का इस्तेमाल कर आगे बढ़ने के बजाय केवल उनका नाम मिला।
रीति ने कहा कि मनोज तिवारी की बेटी होने की वजह से उन्हें समाज में सम्मान जरूर मिलता है। जहाँ भी वह जाती हैं,लोग उन्हें उनके पिता के नाम से पहचानते हैं और सम्मान देते हैं,लेकिन उनके मुताबिक,इस पहचान के साथ मिलने वाला सम्मान और आर्थिक सुविधा या पेशेवर मदद दो अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पिता की उपलब्धियों से उन्हें एक पहचान जरूर मिली,लेकिन वह उनके करियर की सीढ़ी नहीं बनी।
अपने करियर को लेकर भी रीति ने पिता के रुख के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मनोज तिवारी ने उनसे साफ शब्दों में कहा था कि वह उनके करियर में उनकी मदद नहीं करेंगे। हालाँकि,रीति के मुताबिक, उनके पिता ने यह बात किसी नकारात्मक भावना या नाराजगी की वजह से नहीं कही थी। उनका मानना था कि यदि रीति में प्रतिभा और क्षमता है तो वह अपने दम पर आगे बढ़ सकती हैं।
रीति ने पिता की सोच को बताते हुए कहा कि उनसे कहा गया था कि अगर उनमें काबिलियत है तो वह खुद अपनी पहचान बनाएँगी और उन्हें उनके लिए कुछ करने की जरूरत नहीं होगी। रीति के अनुसार,इस रवैये का मतलब यह नहीं था कि उनके पिता उन्हें आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते थे,बल्कि वह चाहते थे कि उनकी सफलता उनकी अपनी मेहनत और क्षमता से हासिल हो।
बातचीत के दौरान रीति ने अपनी आर्थिक स्थिति से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने पिता से वह आर्थिक मदद नहीं मिलती,जिसकी लोग एक प्रसिद्ध परिवार की बेटी होने के नाते कल्पना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने मासिक खर्च के लिए लगभग 20 से 25 हजार रुपये मिलते हैं। रीति ने सवाल किया कि अगर उन्हें हर महीने सीमित रकम मिलती है,तो वह खुद इतनी राशि क्यों नहीं कमा सकतीं।
उन्होंने अपने रोजमर्रा के खर्चों का उदाहरण देते हुए बताया कि कई बार वह बहुत साधारण तरीके से अपनी जरूरतें पूरी करती हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी पेट भरने के लिए दिन में दो बार 10 रुपये का वड़ा पाव खाकर भी गुजारा करना पड़ता है। इसी तरह वाहन के लिए जरूरत के मुताबिक करीब 500 रुपये का डीजल भरवाती हैं। उनका कहना था कि वह अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च करती हैं और हर सुविधा उनके लिए पहले से उपलब्ध नहीं होती।
रीति ने विदेश में पढ़ाई से जुड़े अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उन्हें बाहर जाकर पढ़ाई करने के लिए बहुत अधिक पैसे नहीं दिए। उनके अनुसार,वह जो कुछ माँगती थीं,वह जरूरी नहीं कि उन्हें मिल जाए। यह बात उन्होंने उन धारणाओं के संदर्भ में कही,जिनके मुताबिक किसी मशहूर अभिनेता या नेता की बेटी को पढ़ाई और करियर के लिए आर्थिक संसाधनों की कोई कमी नहीं होती।
‘स्टार किड्स’ को लेकर समाज में बनी आम धारणा पर रीति ने कहा कि लोगों को लगता है कि ऐसे बच्चों ने जन्म से ही एक विशेष तरह की आरामदायक जिंदगी देखी होती है। उनके पिता की पहचान की वजह से उन्हें अच्छे अवसर,महँगी सुविधाएँ और आर्थिक सुरक्षा आसानी से मिल जाती है,लेकिन रीति का अनुभव इससे अलग रहा है। उन्होंने खुद को एक आम इंसान बताते हुए कहा कि उनके लिए भी संघर्ष और आर्थिक सीमाएँ वास्तविकता का हिस्सा रही हैं।
रीति की बातचीत का एक अहम पहलू यह भी रहा कि उन्होंने अपने पिता की प्रसिद्धि और अपनी व्यक्तिगत पहचान के बीच अंतर को सामने रखा। एक तरफ उन्हें मनोज तिवारी की बेटी होने की वजह से सामाजिक सम्मान और पहचान मिलती है,तो दूसरी तरफ वह अपने करियर में खुद की क्षमता साबित करना चाहती हैं। यही विरोधाभास उनके लिए ‘स्टार किड’ होने के अनुभव को जटिल बनाता है।
मनोज तिवारी लंबे समय से मनोरंजन और सार्वजनिक जीवन दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनकी बेटी के रूप में रीति की पहचान पहले से बनी हुई है,लेकिन बिग बॉस के घर में उन्होंने जिस तरह अपने व्यक्तिगत अनुभवों के बारे में बात की,उससे उनके जीवन का वह पक्ष सामने आया,जो आम तौर पर किसी चर्चित परिवार की सार्वजनिक छवि के पीछे छिपा रहता है।
रीति की बातों से यह भी स्पष्ट होता है कि किसी प्रसिद्ध परिवार में जन्म लेना हमेशा एक जैसी जिंदगी की गारंटी नहीं होता। परिवार की पहचान से सामाजिक सम्मान और अवसरों तक पहुँच का एक अलग प्रभाव हो सकता है,लेकिन आर्थिक सहयोग,भावनात्मक जुड़ाव और करियर में प्रत्यक्ष मदद हर व्यक्ति के अनुभव में अलग हो सकती है। रीति ने अपने अनुभव के जरिए इसी अंतर को सामने रखा।
बिग बॉस के घर में निजी जिंदगी पर हुई यह बातचीत अब चर्चा का विषय बन गई है। रीति ने अपने बचपन से लेकर पिता के साथ रिश्ते और अपने संघर्षों तक कई संवेदनशील पहलुओं को साझा किया। उनकी बातों में एक ओर पिता के नाम से मिलने वाली पहचान और सम्मान का उल्लेख था,तो दूसरी ओर खुद के दम पर आगे बढ़ने की कोशिश भी दिखाई दी। उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि किसी चर्चित व्यक्ति की संतान होने से जीवन की सभी परेशानियाँ अपने आप खत्म नहीं हो जातीं।
रीति के लिए पिता का नाम निश्चित रूप से एक पहचान है,लेकिन वह इसे अपनी पूरी पहचान नहीं मानतीं। उनके अनुसार,सम्मान मिलने के बावजूद उन्हें अपने फैसले, करियर और रोजमर्रा की जिंदगी में कई चीजों का सामना खुद करना पड़ा है। बिग बॉस में सामने आई उनकी यह कहानी ‘स्टार किड’ शब्द के पीछे छिपे अलग-अलग अनुभवों की ओर ध्यान खींचती है और बताती है कि प्रसिद्ध परिवार में पैदा होने वाले हर व्यक्ति की जिंदगी एक जैसी नहीं होती।
